India's Asiatic Lion Population Rises: भारत के वन्यजीव संरक्षण इतिहास में आज एक सुनहरा अध्याय जुड़ गया है. देश के इकलौते एशियाई शेरों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है. 2020 में 674 शेरों की संख्या अब 2024 में बढ़कर 891 तक पहुंच गई है. यह केवल आंकड़े नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण के प्रति भारत की गंभीरता और प्रतिबद्धता का सशक्त प्रमाण है.
भारत में शेरों की संख्या में वृद्धि में अन्य कारकों की भी भूमिका रही. जानें कि कौन से कारण रहे.ये भी पढ़े:Gir National Park Video: PM मोदी पहुंचे गुजरात के गिर नेशनल पार्क, जंगल में लिया लायन सफारी का आनंद. देखें खूबसूरत तस्वीरें और वीडियो
प्रोजेक्ट लायन’ बना भारत का गर्व, पीएम मोदी की अगुवाई में हुआ संभव
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इसे भारत की संरक्षण नीतियों की ऐतिहासिक जीत बताया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘प्रोजेक्ट लायन’ को जो राष्ट्रीय प्राथमिकता दी गई, वही इसका आधार बनी.'यह सफलता समन्वित प्रयासों, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और स्थानीय समुदायों के सहयोग का परिणाम है ऐसा उन्होंने कहा.
कैबिनेट मिनिस्टर ने किया ट्वीट
It is really heartening to note that the number of lions in India has risen to 891 from 674 in 2020.
This astounding success of conservation has been achieved due to the the concerted efforts of PM Shri @narendramodi ji, who first as Gujarat CM, and then as Indian PM, made… pic.twitter.com/nB9YUhu8ua
— Bhupender Yadav (@byadavbjp) May 21, 2025
गुजरात का गिर जंगल बना शेरों का मजबूत किला
गुजरात का गिर जंगल एशियाई शेरों का अंतिम प्राकृतिक निवास स्थान है, और यहीं से ‘प्रोजेक्ट लायन’ की असली शुरुआत हुई. गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बताया कि कैसे राज्य सरकार और स्थानीय समुदायों ने मिलकर शेरों के संरक्षण को एक जनआंदोलन में बदल दिया.
ज़मीन पर किए गए ठोस और कारगर कदम
‘प्रोजेक्ट लायन’ के अंतर्गत जिन व्यावहारिक उपायों को अपनाया गया, उन्होंने सीधे तौर पर शेरों की सुरक्षा और संख्या में वृद्धि को संभव बनाया.
- 237 बीट गार्ड्स की भर्ती, जिनमें 75 महिलाएं भी शामिल
- 92 बचाव वाहन तैनात, जो घायल या संकट में फंसे वन्यजीवों की त्वरित सहायता कर सकें
- 11,000 माचने (वॉच टावर) बनाए गए, जिससे शेरों की निगरानी और मानवीय टकराव में कमी आई
- 55,000 से अधिक खुली कुंओं के चारों ओर सुरक्षा दीवारें बनाई गईं, ताकि शेर और अन्य जानवर दुर्घटनावश न गिरें
इन उपायों ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम किया और शेरों के लिए एक सुरक्षित और स्थायी पर्यावरण तैयार किया.
‘प्रोजेक्ट लायन’ सिर्फ एक प्रजाति नहीं, एक राष्ट्रीय दृष्टिकोण
इस परियोजना ने साबित कर दिया कि जब संरक्षण कार्य में वैज्ञानिक योजना, शासन की इच्छाशक्ति और जनसहभागिता को जोड़ा जाए, तो कोई भी प्रजाति विलुप्त नहीं हो सकती.‘प्रोजेक्ट लायन’ अब वन्यजीव संरक्षण का एक आदर्श मॉडल बन चुका है, जिसमें पर्यावरणीय स्थिरता, पर्यटन, स्थानीय रोजगार और जैव विविधता का संतुलन है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताई खुशी
गुजरात के मुख्यमंत्री की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए पीएम मोदी ने ट्वीट किया.'प्रोजेक्ट लायन सिर्फ निवास स्थान को मजबूत नहीं कर रहा, बल्कि गुजरात में एशियाई शेरों का भविष्य भी सुरक्षित कर रहा है. यह हमारे साझा प्रयासों की सफलता है.
अन्य राज्यों में भी हो सकता है शेरों का पुनर्वास
अब सरकार की योजना है कि एशियाई शेरों का निवास अन्य राज्यों जैसे मध्य प्रदेश, राजस्थान तक विस्तारित किया जाए, जिससे उनकी आबादी और भी स्थिर और सुरक्षित हो सके.













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