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Fact Check: क्या सच में दलित को सोफे पर बैठने के कारण पीटा गया? पहले उत्तर प्रदेश और अब बिहार के नाम से वायरल वीडियो की जाने सच्चाई

पिछले दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था और उसमें दावा किया गया था कि सोफे पर दलित के बैठने के बाद उसकी समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पिटाई कर दी. अब इसी वीडियो क्लिप को बिहार का बताकर वायरल किया जा रहा है.

Fact Check: क्या सच में दलित को सोफे पर बैठने के कारण पीटा गया? पहले उत्तर प्रदेश और अब बिहार के नाम से वायरल वीडियो की जाने सच्चाई
Credit-(FB)

Fact Check: पिछले दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था और उसमें दावा किया गया था कि सोफे पर दलित के बैठने के बाद उसकी समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पिटाई कर दी. अब इसी वीडियो क्लिप को बिहार का बताकर वायरल किया जा रहा है. इसमें वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है और दावा किया जा रहा है कि बिहार में सोफे पर बैठने के कारण दलित की पिटाई कर दी गई. बता दें की ये वायरल वीडियो नाही उत्तर प्रदेश का है और नाही बिहार का है. ये वायरल हो रहा है वीडियो महाराष्ट्र के लातूर जिले का है और जिसके साथ मारपीट की जा रही है वह दलित नहीं है, बल्कि छावा संघटन के कार्यकर्ता है.

इस वीडियो को फेसबुक पर गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है. ये भी पढ़े:Fact Check: नेताओं के सामने सोफे पर बैठ गया दलित! गुस्साएं समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने की जमकर पिटाई, जानें सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस VIDEO की सच्चाई

वीडियो का दावा है गलत

क्या है इस वीडियो की सच्चाई

फैक्ट-चेक करने पर यह सामने आया कि वायरल वीडियो का बिहार से कोई संबंध नहीं है. यह घटना महाराष्ट्र के लातूर जिले का है, जहां 20 जुलाई 2025 को एनसीपी और मराठा संगठन 'छावा' के कार्यकर्ताओं के बीच विवाद हो गया था.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में ताश के पत्ते फेंकने से हुई मारपीट

लातूर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान छावा संगठन के कार्यकर्ताओं ने विरोध स्वरूप एनसीपी महाराष्ट्र अध्यक्ष सुनील तटकरे के सामने ताश के पत्ते फेंक दिए.वे कृषि मंत्री मानिकराव कोकाटे से इस्तीफे की मांग कर रहे थे, जिन पर विधानसभा सत्र के दौरान मोबाइल पर 'रमी' गेम खेलने का आरोप लगा था.प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुए इस विरोध के बाद एनसीपी कार्यकर्ता आक्रोशित हो गए और छावा संगठन के लोगों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट शुरू कर दी. इस दौरान छावा संगठन के कार्यकर्ता विजय घाटगे, जो वीडियो में सोफे पर बैठे दिख रहे हैं, उनके साथ भी हाथापाई हुई.

खुद पीड़ित ने बताई थी कहानी

वायरल वीडियो में दिख रहे विजय घाटगे ने स्पष्ट किया कि इस झगड़े का जाति से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने बताया कि यह राजनीतिक विवाद था और उनके दलित होने की वजह से उन्हें नहीं पीटा गया. इस तरह उन्होंने वायरल हो रहे गलत दावे को खारिज कर दिया.

सोशल मीडिया पर गलत जानकारी से सावधान रहने की जरूरत

इस क्लिप को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया और एक झूठा जातीय एंगल देकर राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश की गई. यह घटना बताती है कि सोशल मीडिया पर फैलती भ्रामक सूचनाएं कितनी तेजी से लोगों को गुमराह कर सकती हैं. ऐसे वीडियो की पहले जांच करें और शेयर करने से पहले सावधानी बरतें.

 

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 04, 2025 01:50 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).