Stalin Resigns From CM Post: TVK की तमिलनाडु में सरकार बनाने की कवायद तेज, प्रदेश में हार के बाद स्टालिन ने CM पद से दिया इस्तीफा
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Stalin Resigns From CM Post:  तमिलनाडु की राजनीति में दशकों पुराने द्रविड़ किलों को ढहाते हुए अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी 'तमिलगा वेट्री कझगम' (TVK) ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है. चुनाव परिणामों में मिली हार के बाद मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपना त्याग पत्र राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को सौंप दिया है, जिसे स्वीकार कर लिया गया है.

 

राज्यपाल ने स्टालिन से नई सरकार के गठन तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में बने रहने का अनुरोध किया है. इस चुनाव परिणाम ने तमिलनाडु में पिछले 62 वर्षों से चले आ रहे डीएमके (DMK) और एआईएडीएमके (AIADMK) के वर्चस्व को चुनौती दी है.  यह भी पढ़े: Tamil Nadu Election Result 2026: तमिलनाडु में विजय की पार्टी TVK के सामने CM स्टालिन भी नहीं टिके, कोलाथुर सीट से मिली करारी हार

टीवीके (TVK) बनी सबसे बड़ी पार्टी

चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, विजय की पार्टी टीवीके 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है. हालांकि, बहुमत के जादुई आंकड़े (118) से वह अब भी 10 सीटें दूर है.

 डीएमके को सिर्फ मिले  73 सीट 

दूसरी ओर, सत्ताधारी डीएमके गठबंधन को करारी शिकस्त मिली है और वह करीब 73 सीटों पर सिमट गया है. एआईएडीएमके को 47 सीटों से संतोष करना पड़ा है. इस त्रिकोणीय मुकाबले ने राज्य में 'हंग असेंबली' (त्रिशंकु विधानसभा) जैसी स्थिति पैदा कर दी है.

 

सरकार बनाने की कवायद तेज

सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते विजय ने सरकार बनाने का दावा पेश करने की तैयारी शुरू कर दी है. सूत्रों के अनुसार, टीवीके अब कांग्रेस और अन्य छोटे दलों के संपर्क में है ताकि बहुमत का आंकड़ा जुटाया जा सके.

विजय ने अपनी जीत के बाद कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि यह जनता के विश्वास की जीत है और वे भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन देने के लिए प्रतिबद्ध हैं. विजय ने दो सीटों (तिरुचि ईस्ट और पेरम्बूर) से चुनाव लड़ा था और दोनों पर जीत हासिल की है.

डीएमके की हार और स्टालिन का संदेश

अपनी हार स्वीकार करते हुए एम.के. स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक भावुक संदेश साझा किया. उन्होंने मतदाताओं का आभार व्यक्त किया और कहा कि वे जनादेश का सम्मान करते हैं. स्टालिन ने यह भी स्पष्ट किया कि डीएमके अब एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाएगी और द्रविड़ विचारधारा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगी.

विशेषज्ञों का मानना है कि सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) और युवाओं के बीच विजय की भारी लोकप्रियता ने डीएमके के पारंपरिक वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाई है.

क्या है आगे की राह?

तमिलनाडु में अब सबकी नजरें राजभवन पर टिकी हैं. राज्यपाल जल्द ही सबसे बड़ी पार्टी के नेता के रूप में विजय को सरकार बनाने का न्योता दे सकते हैं. यदि टीवीके अन्य दलों का समर्थन हासिल करने में सफल रहती है, तो विजय तमिलनाडु के अगले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले सकते हैं.

यह बदलाव राज्य की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है, जहाँ पहली बार किसी तीसरी शक्ति ने द्रविड़ राजनीति के दो दिग्गजों को हाशिए पर धकेल दिया है.