West Bengal Voter List Revision: पश्चिम बंगाल में SC ने मतदाता सूची संशोधन के लिए बढ़ाया समय, अब इस डेट तक आ सकती है फाइनल लिस्ट
Supreme Court | PTI

West Bengal Voter List Revision: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में चल रही मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए एक और सप्ताह का विस्तार दिया है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग की दलीलों को सुनने के बाद यह फैसला लिया. इस विस्तार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी वैध मतदाता का नाम सूची से बाहर न छूटे. इस निर्णय के साथ ही, जो फाइनल वोटर लिस्ट पहले 14 फरवरी को जारी होनी थी, अब उसके 21 फरवरी 2026 तक टलने के आसार हैं.

ममता बनर्जी ने खुद की पैरवी, उठाए गंभीर सवाल

इस मामले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद व्यक्तिगत रूप से (In-Person) कोर्ट में पेश होकर अपनी बात रखी. उन्होंने दलील दी कि जिस प्रक्रिया को पूरा करने में आमतौर पर दो साल का समय लगता है, उसे महज तीन महीनों में समेटा जा रहा है. मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि "पॉइंट ब्लैंक शॉट" जैसे वीडियो और तकनीकी खामियों के कारण बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं, विशेषकर महिलाओं और अल्पसंख्यकों के नाम हटाए जा रहे हैं. उन्होंने कोर्ट से नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने की गुहार लगाई. यह भी पढ़े: West Bengal: SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सख्ती, निर्वाचन आयोग ने दिए अनुपालन के निर्देश

चुनाव आयोग की दलील

वहीं, चुनाव आयोग (ECI) की ओर से वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने पर्याप्त संख्या में 'क्लास-2' अधिकारियों को तैनात नहीं किया, जिसके कारण आयोग को 'माइक्रो-ऑब्जर्वर' नियुक्त करने पड़े.

  • रुझान: आंकड़ों के अनुसार, करीब 1.36 करोड़ मतदाताओं के नाम 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' (तार्किक विसंगति) की सूची में डाले गए थे.

  • सुनवाई: इनमें से लगभग 95% सुनवाई पूरी हो चुकी है, लेकिन लगभग 5% से 6% काम अभी भी लंबित है, जिसके लिए अतिरिक्त समय की मांग की गई थी.

'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' और कागजी कार्यवाही

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि नाम की स्पेलिंग में छोटी-मोटी गलतियों के आधार पर किसी का नाम नहीं काटा जाना चाहिए.

  1. वैध दस्तावेज: कोर्ट ने निर्देश दिया है कि निवास प्रमाण पत्र (Domicile) और अन्य सरकारी पहचान पत्रों को प्राथमिकता दी जाए.

  2. पारदर्शिता: चुनाव आयोग को निर्देश दिया गया है कि वे उन सभी लोगों की सूची सार्वजनिक करें जिनके नाम विसंगतियों के कारण हटाए जाने की प्रक्रिया में हैं.

क्यों अहम है यह प्रक्रिया?

पश्चिम बंगाल में 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले यह संशोधन प्रक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण है. राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) मनोज कुमार अग्रवाल ने बताया कि कोलकाता, हावड़ा और दक्षिण 24 परगना जैसे जिलों के कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में अभी भी सत्यापन का काम बाकी है. इस अतिरिक्त समय से प्रशासनिक मशीनरी को डेटा को सही ढंग से डिजिटाइज़ करने और अंतिम त्रुटियों को सुधारने का मौका मिलेगा.