Rupee vs Dollar: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया पहली बार 93 के पार, रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा; जानें अर्थव्यवस्था पर इसका असर

शुक्रवार, 20 मार्च 2026 को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.12 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. मध्य पूर्व में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता के कारण घरेलू मुद्रा पर दबाव बना हुआ है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Pixabay)

मुंबई: वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और मध्य पूर्व (वेस्ट एशिया) में बढ़ते संघर्ष के बीच भारतीय रुपया (Indian Rupees) शुक्रवार को रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिर गया. अमेरिकी डॉलर (US Dollar) के मुकाबले घरेलू मुद्रा पहली बार 93 के स्तर को पार कर 93.12 पर पहुंच गई. शुक्रवार को रुपये में 0.55 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिसने बुधवार के 92.63 के पिछले रिकॉर्ड निचले स्तर को भी पीछे छोड़ दिया. विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव शुरू होने के बाद से रुपया लगभग 2 प्रतिशत तक टूट चुका है. यह भी पढ़ें: Stocks To Buy or Sell Today, March 20, 2026: TCS, HDFC Bank और NTPC समेत इन 5 शेयरों पर रहेगी निवेशकों की नजर; जानें आज बाजार में हलचल की मुख्य वजहें

रुपये पर दबाव के मुख्य कारण

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक स्तर पर निवेशकों के बीच जोखिम से बचने की प्रवृत्ति (Risk Aversion) के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है. 'एनरिच मनी' के सीईओ पोन्मुडी आर. के अनुसार, USD/INR जोड़ी का 92.8 के स्तर से ऊपर ट्रेड करना रुपये के लिए चिंताजनक है. यदि यह 93.00 के ऊपर बना रहता है, तो आने वाले समय में यह 93.20 से 93.40 के स्तर तक जा सकता है, जबकि इसे 92.70 के पास समर्थन (Support) मिलने की उम्मीद है.

शेयर बाजार में सुधार, लेकिन FII ने की बिकवाली

मुद्रा बाजार में गिरावट के विपरीत, घरेलू शेयर बाजारों में शुक्रवार को सकारात्मक रुख देखा गया. सेंसेक्स 900 से अधिक अंकों (लगभग 1%) की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा, वहीं निफ्टी में भी 300 अंकों या 1.35 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई. हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ओर से बिकवाली का सिलसिला जारी है। एक्सचेंज डेटा के अनुसार, गुरुवार को FII ने 7,558.19 करोड़ रुपये के शेयर बेचे.

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी की उम्मीद

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार को कुछ कमी देखी गई. इसका मुख्य कारण अमेरिका द्वारा ईरानी कच्चे तेल पर प्रतिबंधों में ढील देने के संकेत हैं, ताकि वैश्विक कीमतों को नियंत्रित किया जा सके. ब्रेंट क्रूड वायदा 3.39 प्रतिशत गिरकर 104.96 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड 3.22 प्रतिशत गिरकर 92.47 डॉलर पर रहा.

अमेरिकी ट्रेजर सचिव स्कॉट बेसेंट के बयानों से बाजार को उम्मीद है कि वाशिंगटन समुद्र में मौजूद ईरानी तेल पर प्रतिबंधों में ढील दे सकता है, जिससे आपूर्ति बढ़ेगी और कीमतें कम होंगी.

युद्ध का गहराता असर

पश्चिम एशिया में संघर्ष अब अपने 21वें दिन में प्रवेश कर चुका है. इस तनाव का सीधा असर ऊर्जा बाजार पर पड़ा है. 2 मार्च को ब्रेंट क्रूड की कीमत जो 77.74 डॉलर थी, वह 19 मार्च तक लगभग 40 प्रतिशत बढ़कर 108.65 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी. भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है, ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और रुपये की कमजोरी देश में आयात बिल और महंगाई बढ़ाने का काम कर सकती है.

 

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