Nitish Kumar’s Resigns From CM Post: नीतीश कुमार का नया ठिकाना होगा दिल्ली, बिहार के मुख्यमंत्री पद से दिया इस्तीफा
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Nitish Kumar’s Resigns From CM Post: बिहार की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक बदलाव हुआ है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. आज सुबह राज्य सचिवालय में अपनी अंतिम कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करने के बाद, उन्होंने राजभवन जाकर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन को अपना औपचारिक इस्तीफा सौंपा. नीतीश कुमार, जिन्होंने दो दशकों से अधिक समय तक राज्य की बागडोर संभाली, हाल ही में 10 अप्रैल 2026 को राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ ली थी. उनके इस्तीफे के साथ ही बिहार में 'नीतीश युग' का एक लंबा अध्याय आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया है.

सम्राट चौधरी होंगे बिहार के नए मुख्यमंत्री

इस्तीफे के बाद बिहार में सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की महत्वपूर्ण विधायक दल की बैठक में सम्राट चौधरी को सर्वसम्मति से नेता चुन लिया गया है। भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में यह निर्णय लिया गया। बिहार के इतिहास में यह पहला अवसर है जब भारतीय जनता पार्टी अपना मुख्यमंत्री राज्य को देने जा रही है। एनडीए (NDA) गठबंधन के घटक दलों ने भी सम्राट चौधरी के नेतृत्व पर अपनी पूर्ण सहमति व्यक्त की है.  यह भी पढ़े:  Samrat Chaudhary Bihar New CM: सम्राट चौधरी बिहार के होंगे नए मुख्यमंत्री, BJP विधायक दल के नेता चुने गए, कल लेंगे सीएम पद की शपथ 

नीतीश कुमार ने  दिया इस्तीफा

शपथ ग्रहण और नई सरकार की रूपरेखा

सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार के गठन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं.निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, वे कल, 15 अप्रैल 2026 को सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। पटना के राजभवन में आयोजित होने वाले इस शपथ ग्रहण समारोह में एनडीए के शीर्ष नेतृत्व के शामिल होने की संभावना है.

राज्य में नए उपमुख्यमंत्री के नामों को लेकर भी कयास तेज हैं, जिनमें पार्टी और गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं के नाम प्रमुखता से चल रहे हैं. फिलहाल, पटना में राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र राजभवन और भाजपा कार्यालय बना हुआ है.

इस्तीफा स्वीकार

राज्यपाल ने इस्तीफा स्वीकार करते हुए नीतीश कुमार को नई सरकार के गठन तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में बने रहने का निर्देश दिया है. यह बदलाव बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में एक नए और निर्णायक युग का संकेत है.