नई दिल्ली, 26 मई: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Chief Minister Rekha Gupta) इन दिनों नीतिगत फैसलों के बजाय अपने दफ्तर की एक कुर्सी को लेकर इंटरनेट और राजनीतिक गलियारों में भारी चर्चा का विषय बनी हुई हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) और अन्य डिजिटल माध्यमों पर मुख्यमंत्री के कार्यालय की कुछ तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं, जिसमें वे एक बेहद आधुनिक और आलीशान ऑफिस चेयर पर बैठी नजर आ रही हैं. सोशल मीडिया (Social Media) पर दावा किया जा रहा है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री द्वारा इस्तेमाल की जा रही यह प्रीमियम एग्जीक्यूटिव कुर्सी बेहद महंगी है और बाजार में इसकी अनुमानित कीमत 66,000 रुपये से लेकर 82,000 रुपये के बीच है. इस खुलासे के बाद दिल्ली की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है, जहां विरोधी दल और आम नागरिक इसे लेकर मीम्स शेयर कर रहे हैं और तीखी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. यह भी पढ़ें: CM Rekha Gupta Attack: आपकी दीदी न रुकेंगी, न डरेंगी, दिल्ली को बेहतर बनाएंगे; सीएम रेखा गुप्ता
क्या खास है सीएम रेखा गुप्ता की इस वायरल कुर्सी में?
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर चल रहे दावों और तस्वीरों के विश्लेषण के अनुसार, मुख्यमंत्री कार्यालय में रखी यह कुर्सी प्रीमियम श्रेणी की 'रेड ओक इम्पेरियो' (Red Oak Imperio) लक्जरी एग्जीक्यूटिव चेयर बताई जा रही है. यह कुर्सी कोई सामान्य सिटिंग अरेंजमेंट नहीं है, बल्कि लंबे समय तक लगातार बैठकर काम करने वाले शीर्ष अधिकारियों की शारीरिक सहूलियत और आराम को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई है.
इस हाई-टेक कुर्सी की मुख्य विशेषताओं में एक इन-बिल्ट इलेक्ट्रॉनिक मल्टी-पॉइंट मसाज सिस्टम (Massage System), ऑटोमैटिक फुटरेस्ट (पैर आराम देने वाला स्टैंड), गहरी रीलाइनिंग क्षमता और एक विशेष 'जीरो-ग्रेविटी' (Zero-Gravity Seating Mode) मोड शामिल है, जो काम के लंबे घंटों के दौरान रीढ़ की हड्डी और शरीर के तनाव को कम करता है. इसके अलावा, कुर्सी में उच्च घनत्व वाले फोम कुशन और प्रीमियम असली लेदर की अपहोल्स्ट्री का इस्तेमाल किया गया है.
विपक्ष और सोशल मीडिया का वार: सादगी के दावों पर तीखे सवाल
तस्वीरें वायरल होते ही यह मामला दिल्ली सरकार के खर्चों और प्राथमिकताओं पर केंद्रित हो गया है. कई सोशल मीडिया यूजर्स और विपक्षी कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि क्या जनता के टैक्स के पैसे से चलने वाले सरकारी दफ्तर में इतनी महंगी और आलीशान कुर्सी की वाकई कोई जरूरत थी?
आलोचकों का कहना है कि यह दिल्ली सरकार के उन सार्वजनिक दावों के बिल्कुल विपरीत है, जिसमें सादगी और मितव्ययिता (Austerity) की बात की जाती रही है. नेटिजन्स ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की उन पुरानी तस्वीरों और दौरों का भी हवाला दिया, जब वे अपनी सादगीपूर्ण छवि को प्रदर्शित करने के लिए दिल्ली मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करती नजर आई थीं. आलोचक अब इस कुर्सी को वास्तविक शासन प्राथमिकताओं के बजाय 'दिखावे की राजनीति' का प्रतीक बता रहे हैं.
समर्थकों का बचाव: वरिष्ठ संवैधानिक पदों के लिए यह सामान्य बुनियादी ढांचा
दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री और सत्ता पक्ष के समर्थकों ने इस विवाद को पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया मामला बताया है. समर्थकों का तर्क है कि देश की राजधानी के शीर्ष संवैधानिक और प्रशासनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के कार्यालय का फर्नीचर तय सरकारी नियमों और मानक प्रशासनिक बुनियादी ढांचे (Administrative Infrastructure) के तहत ही खरीदा जाता है.
बचाव पक्ष के लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री जैसे उच्च पदों पर आसीन अधिकारियों को दिन में 14 से 16 घंटे लगातार बैठकर फाइलें देखनी होती हैं और बैठकें करनी होती हैं, जिसके कारण पीठ दर्द और स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों से बचने के लिए वैज्ञानिक रूप से डिजाइन की गई अर्गोनॉमिक (Ergonomic) कुर्सियों का इस्तेमाल बेहद जरूरी और सामान्य बात है. उनका कहना है कि यदि इसकी खरीद में सभी आधिकारिक प्रक्रियाओं और बजट नियमों का पालन किया गया है, तो इसे अनावश्यक रूप से बड़ा मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए.
उल्लेखनीय है कि रेखा गुप्ता वर्तमान में दिल्ली की नौवीं मुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत हैं और वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के टिकट पर शालीमार बाग विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं. साल 2025 के शुरुआती चुनाव में उनकी नियुक्ति के साथ ही राष्ट्रीय राजधानी में भाजपा की करीब 27 साल बाद सत्ता में वापसी हुई थी. ऐसे में, इस कुर्सी विवाद ने दिल्ली की राजनीति में सरकारी खर्चों की पारदर्शिता और जनता के बीच नेताओं की छवि को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है.













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