नई दिल्ली, 30 जून: चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया मंगलवार से दिल्ली, कर्नाटक, महाराष्ट्र, झारखंड और मेघालय में शुरू हो गई. इसके तहत बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं से एन्यूमरेशन फॉर्म भरवा रहे हैं. इस बीच SIR को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव भी तेज हो गया है. बिहार के बाद अब पूरे देश में होगी वोटर लिस्ट की जांच, SIR पर चुनाव आयोग का बड़ा फैसला
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने और अपने परिवार का एन्यूमरेशन फॉर्म जमा कर प्रक्रिया पूरी की. उन्होंने सभी पात्र मतदाताओं से निर्धारित समय सीमा के भीतर सही जानकारी के साथ फॉर्म भरकर अपने-अपने BLO को जमा करने की अपील की. वहीं, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने भी अपने सदाशिवनगर स्थित आवास पर फॉर्म भरा.
इस बीच INDIA गठबंधन की ओर से SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) और आम आदमी पार्टी (AAP) समेत 23 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय सांसद ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को संयुक्त पत्र भेजा है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि विपक्षी दल "Solidarity, Unity and Resistance (SURE)" के सिद्धांत पर एकजुट हैं.
DMK के प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने SIR प्रक्रिया को "मनमानी" और "लोकतंत्र विरोधी" बताते हुए कहा कि यह मतदाताओं को सूची से बाहर करने की कोशिश है, जबकि लोकतंत्र का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को मतदान का अधिकार देना होना चाहिए.
AAP के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि उनकी पार्टी भले ही INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं है, लेकिन विपक्ष के मुद्दों पर हमेशा उसके साथ खड़ी रहेगी. उन्होंने कहा कि संसद में संजय सिंह विपक्ष की मजबूत आवाज हैं.
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे ने चुनाव आयोग पर केंद्र सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा उठाई गई 12 आपत्तियों पर आयोग ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है.
वहीं, कर्नाटक के ऊर्जा मंत्री के.जे. जॉर्ज ने कहा कि राज्य सरकार चाहती है कि सभी पात्र नागरिक फॉर्म भरकर जमा करें ताकि कोई भी मतदाता छूट न जाए. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) इस अभियान पर लगातार काम कर रहे हैं.
भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया. पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि कांग्रेस खुद SIR को गंभीरता से नहीं ले रही है और कर्नाटक में डी.के. शिवकुमार ही इस अभियान का चेहरा बने हुए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस हर चुनाव में अपनी हार का ठीकरा कभी EVM, कभी वोट चोरी और अब SIR पर फोड़ती है.
पूर्व कर्नाटक मंत्री और भाजपा विधायक प्रभु चौहान ने लोगों से BLO के साथ सहयोग करने और सभी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने की अपील की. उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को शुद्ध करने के लिए यह प्रक्रिया जरूरी है और इसे एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था द्वारा संचालित किया जा रहा है.
चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, SIR के लिए 1 अक्टूबर को अर्हता तिथि (Qualifying Date) माना गया है. 5 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित होगी. इसके बाद 5 अगस्त से 4 सितंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी. सभी आपत्तियों के निस्तारण के बाद 7 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी.












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