Ebola Cases in India: बेंगलुरु में इबोला का अलर्ट टला, युगांडा से आई महिला की टेस्ट रिपोर्ट आई नेगेटिव; देश में अब तक कोई मामला नहीं
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: File Image)

बेंगलोर/नई दिल्ली, 27 मई: कर्नाटक (Karnataka) की राजधानी बेंगलुरु (Bengaluru) में संभावित स्वास्थ्य संकट को लेकर मची खलबली के बीच राहत की एक बड़ी खबर सामने आई है. स्वास्थ्य अधिकारियों ने बुधवार को पुष्टि की है कि शहर के एक सरकारी अस्पताल में संदिग्ध लक्षणों के बाद आइसोलेशन (एकांतवास) में रखी गई युगांडा की एक 28 वर्षीय महिला की इबोला वायरस (Ebola Virus Disease - EVD) टेस्ट रिपोर्ट पूरी तरह नेगेटिव आई है. यह महिला हाल ही में पूर्वी अफ्रीकी देश युगांडा से अहमदाबाद होते हुए बेंगलुरु पहुंची थी, जहां उसे शरीर में हल्के दर्द (Body Ache) की शिकायत के बाद एहतियात के तौर पर सरकारी महामारी रोग अस्पताल (Epidemic Diseases Hospital) में भर्ती कराया गया था. रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों और निगरानी तंत्र ने राहत की सांस ली है. यह भी पढ़ें: Ebola Outbreak: इबोला महामारी के खतरे को लेकर आंध्र प्रदेश सरकार सतर्क, विजयवाड़ा एयरपोर्ट पर विदेश के आने यात्रियों की स्क्रीनिंग शुरू

पुणे एनआईवी (NIV) ने की जांच; मरीज की हालत स्थिर

बेंगलुरु जिला सर्जन और अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार बामनागर से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, महिला के रक्त के नमूने तुरंत विस्तृत आणविक विश्लेषण के लिए पुणे स्थित 'नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी' (NIV) भेजे गए थे. एनआईवी द्वारा साझा की गई रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि महिला के शरीर में इबोला वायरस के अंश नहीं पाए गए हैं.

अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि महिला की स्थिति इस समय पूरी तरह से स्थिर है और वह तेजी से स्वस्थ हो रही है. हालांकि स्थापित सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रोटोकॉल (Public Health Protocols) के अनुसार, अत्यधिक सावधानी बरतने के लिए संदिग्ध मामलों में 48 घंटे के बाद एक दोहराव परीक्षण (Repeat Test) किया जाता है, लेकिन चूंकि महिला में कोई नए या गंभीर लक्षण विकसित नहीं हुए हैं, इसलिए वरिष्ठ अधिकारियों की सलाह पर आगामी निर्णय लिया जाएगा.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने की समीक्षा; हवाई अड्डों पर सख्त स्क्रीनिंग

इस घटनाक्रम के बीच, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने देश भर में संक्रामक बीमारियों को लेकर कड़ी निगरानी व्यवस्था लागू कर दी है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने हाल ही में अफ्रीका के कुछ हिस्सों में बढ़ते मामलों को देखते हुए देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारियों और बुनियादी ढांचे की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की. स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत में अब तक 'बुंदीबुग्यो इबोला' (Bundibugyo Ebola) स्ट्रेन का एक भी मामला सामने नहीं आया है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा हाल ही में मध्य अफ्रीका में इबोला के प्रकोप को 'अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' (PHEIC) घोषित किए जाने के बाद भारत सरकार ने त्वरित कदम उठाए हैं. सरकार ने एक आधिकारिक ट्रैवल एडवाइजरी जारी कर भारतीय नागरिकों को कांगो (DRC), युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्राओं से बचने की सलाह दी है. इसके अतिरिक्त, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और आव्रजन अधिकारियों के सहयोग से देश के सभी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों और प्रवेश बिंदुओं (Points of Entry) पर अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की 'थर्मल स्क्रीनिंग' और थर्मल ट्रैकिंग को कड़ा कर दिया गया है.

क्या है इबोला वायरस और इसके मुख्य लक्षण?

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, इबोला वायरस रोग एक बेहद गंभीर और जानलेवा संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से मनुष्यों और गैर-मानव प्राइमेट्स (जैसे बंदर, चिंपैंजी) को प्रभावित करती है. यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थों (Bodily Fluids) जैसे रक्त, लार, पसीने या दूषित सामग्रियों के सीधे संपर्क में आने से फैलता है.

इस बीमारी के शुरुआती लक्षणों में अचानक तेज बुखार, मांसपेशियों और शरीर में तेज दर्द, अत्यधिक कमजोरी, गले में खराश और सिरदर्द शामिल हैं. गंभीर मामलों में यह आंतरिक और बाहरी रक्तस्राव (Bleeding) तथा ऑर्गन फेलियर का कारण बन सकता है. वर्तमान में बुंदीबुग्यो वायरस स्ट्रेन के खिलाफ कोई विशेष स्वीकृत टीका या सटीक एंटीवायरल उपचार उपलब्ध नहीं है, इसलिए त्वरित पहचान और आइसोलेशन ही इससे बचने का एकमात्र प्रभावी तरीका है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक चैनलों द्वारा जारी प्रामाणिक जानकारी पर ही भरोसा करें.