जर्मनी में दोहरे मापदंडों के चलते घिरे दिग्गज नेता का इस्तीफा
जनता के लिए कड़ा कानून और खुद विदेश जाकर उसी कानून का उल्टा करना, जर्मनी में चांसलर के बाद दूसरे नंबर के नेता कहे जाने वाले येंस श्पान को इसी कारण तीन दिन भीतर इस्तीफा देना पड़ा है.
जनता के लिए कड़ा कानून और खुद विदेश जाकर उसी कानून का उल्टा करना, जर्मनी में चांसलर के बाद दूसरे नंबर के नेता कहे जाने वाले येंस श्पान को इसी कारण तीन दिन भीतर इस्तीफा देना पड़ा है.46 साल के येंस श्पान, कोविड-19 महामारी के दौरान जर्मनी के स्वास्थ्य मंत्री रह चुके थे. समलैंगिक येंस श्पान, जर्मन राजनीति में खुद को एलजीबीटीक्यू अधिकारों के चैंपियन की तरह पेश करते आए. शनिवार दोपहर तक श्पान, जर्मनी की गठबंधन सरकार की सबसे बड़ी पार्टी सीडीयू के संसदीय दल के लीडर थे. आप्रवासन पर कड़ा रुख लेने के लिए वह पार्टी के भीतर बेहद मजबूत भी होते गए. हाल के समय में उन्हें चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स के बाद चांसलर पद के अगले दावेदार के तौर पर देखा जा रहा था. लेकिन बुधवार दोपहर होते होते श्पान का राजनीतिक करियर खत्म सा हो गया.
असल में 15 जुलाई को श्पान के पार्टनर डानिएल फुंके ने इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर पोस्ट की. तस्वीर में फुंके और श्पान एक शिशु के साथ थे. तस्वीर का कैप्शन था, "हम परिवार हैं." जर्मनी में सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले अखबार बिल्ड ने यह खबर प्रकाशित करते हुए हेडलाइन लिखी, "श्पान और उनके पति पिता बन गए हैं."
लेकिन फुंके की इंस्टाग्राम पोस्ट पर राजनेताओं की बधाई के बजाए एक खामोशी पसरी रही. यह खामोशी उस तूफान से पहले की थी, जो श्पान के राजनीतिक करियर में आने वाली थी. शुक्रवार दोपहर तक खुद सीडीयू पार्टी के भीतर श्पान को लेकर गहरी नाराजगी सार्वजनिक होने लगी. विपक्षी दलों और प्रेस ने श्पान के व्यवहार को दोहरा मापदंड, यानी जनता के लिए कुछ और खुद के लिए कुछ और करार दिया.
जर्मनी में सरोगेसी से जुड़ा कानून क्या है
असल में सारा विवाद जर्मनी के सरोगेसी (किराये की कोख) का है. जर्मनी में सरोगेसी गैरकानूनी है. 2020 में जब येंस श्पान जर्मनी के स्वास्थ्य मंत्री थे, तब एक संसदीय दरख्वास्त पर उनके मंत्रालय ने कहा कि सरोगेसी बैन पर बदलाव की कोई योजना नहीं है. मंत्रालय ने इसे "बच्चे के कल्याण की प्राथमिक सुरक्षा" करार दिया.
इसके बाद 2026 की फरवरी में भी जब सीडीयू पार्टी की अधिवेशन में सरोगेसी पर प्रतिबंध जारी रखने के लिए वोटिंग हो रही थी, तो भी श्पान एकदम खामोश रहे. वह खामोशी तब थी, जब उनके लिए बच्चा पैदा करने वाली मां, गर्भ धारण कर चुकी थी.
असल में जर्मनी में ऐसे कई मामले हैं जहां लोगों ने अमेरिका या दूसरे देशों में जाकर सरोगेसी के सहारे संतान पाई हो. ऐसी संतान को विदेश में पालना पोसना जर्मनी में गैरकानूनी नहीं है. लेकिन उस संतान को जर्मन नागरिक के तौर पर मान्यता दिलाना बेहद कठिन चुनौती है.
जर्मनी में प्रतिबंधित सरोगेसी के बावजूद श्पान और उनके पार्टनर ने अमेरिका जाकर सरोगेट मदर के सहारे बच्चा पैदा किया. श्पान के पिता बनने के खबर सार्वजनिक होने के बाद राजनेताओं में नैतिक मूल्यों को लेकर बहस छिड़ गई. मीडिया और सोशल मीडिया पर श्पान की आलोचना होने लगी. वहीं श्पान ने कहा कि यह मामला उनके निजी जीवन से जुड़ा है.
श्पान की पार्टी सीडीयू ने ही खुद उनसे किनारा किया
शुक्रवार को सीडीयू की महिला यूनियन की अहम एक्जीक्यूटिव बैठक हुई. करीब 95,000 सदस्यों वाली इस यूनियन की चैयरपर्सन स्वास्थ्य मंत्री नीना वारकन हैं. इस बैठक में श्पान के खिलाफ तीखा आक्रोश दिखा. श्पान के व्यवहार को अस्वीकार्य बताया गया. असल में फरवरी में हुए पार्टी अधिवेशन में सीडीयू की यही महिला यूनियन सरोगेसी के खिलाफ प्रस्ताव लाई थी. एक्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक इसी मांग पर खत्म हुई कि वारकन, चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स से बात करेंगी और साफ साफ कहेंगी कि श्पान को इस्तीफा देना ही होगा.
शनिवार को श्पान ने अपने त्याग पत्र में लिखा, "हाल के बरसों में, मुझे यह अहसास हुआ है कि अपने पति के साथ परिवार शुरू करने और पिता बनने की मेरी निजी खुशी, मेरे राजनीतिक कार्यालय के साथ फिट नहीं बैठती है."
श्पान को लेकर हुए इस विवाद की वजह से राजनीतिक दवाब झेल रहे सीडीयू के नेता और चांसलर मैर्त्स ने कहा, "राजनीति में विश्वसनीयता सबसे मूल्यवान पूंजी है." मैर्त्स ने श्पान के इस्तीफे का स्वागत करते हुए कहा, "यह सही और ना टाला जा सकने वाला" फैसला है.
इस बीच जर्मन चांसलर ने यह भी कहा कि वह अपने मंत्रिमंडल में बदलाव करने जा रहे हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 20, 2026 08:30 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

