Ebola Outbreak: वैश्विक स्तर पर बढ़ते स्वास्थ्य खतरों के बीच आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार (26 मई) को विजयवाड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक विशेष इबोला स्क्रीनिंग कैंप स्थापित किया है. एहतियाती कदम उठाते हुए राज्य सरकार द्वारा तैनात मेडिकल टीमें विशेष रूप से सिंगापुर से आने वाले यात्रियों की थर्मल और स्वास्थ्य जांच कर रही हैं. अधिकारियों ने बताया कि इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य किसी भी संदिग्ध मामले की पहचान करना और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है.
पैनिक न होने की अपील
राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि हवाई अड्डे पर की जा रही यह जांच अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य चेतावनियों के बाद शुरू की गई एक सामान्य निवारक निगरानी प्रक्रिया है. इसलिए आम जनता को पैनिक होने या घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है. हवाई सफर कर रहे यात्रियों को भी सलाह दी जा रही है कि यदि उन्हें तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, उल्टी या ब्लीडिंग (रक्तस्राव) जैसा कोई लक्षण महसूस हो, तो वे तुरंत मेडिकल टीम को इसकी रिपोर्ट करें. यह भी पढ़े: Ebola Outbreak in DR Congo: कांगो में इबोला का प्रकोप, 65 लोगों की मौत और 200 से अधिक संदिग्ध मामले, अफ्रीका सीडीसी ने जारी किया अलर्ट
कांगो और युगांडा में तेजी से फैल रहा है संक्रमण
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेब्रेयिसस द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला का 'बुंडिबुग्यो स्ट्रेन' (Bundibugyo Strain) तेजी से फैल रहा है. कांगो में अब तक 101 मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें 10 लोगों की मौत हुई है. हालांकि, वास्तविक आंकड़े इससे काफी अधिक होने की आशंका है क्योंकि 900 से अधिक संदिग्ध मामलों और 220 संदिग्ध मौतों की जांच की जा रही है. इसके पड़ोसी देश युगांडा में भी दो स्वास्थ्य कर्मियों सहित संक्रमण के नए मामले सामने आए हैं, जिससे वहां कुल पुष्ट मामलों की संख्या सात हो गई है.
पुराना डायग्नोस्टिक्स फेल
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की पूर्व मुख्य वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन ने इस स्थिति को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि डब्लूएचओ ने इसे 'अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' घोषित किया है. स्वामीनाथन के अनुसार, यह प्रकोप इबोला के एक दुर्लभ स्ट्रेन के कारण है, जिसे मौजूदा डायग्नोस्टिक टूल्स (जांच उपकरणों) से शुरुआती चरण में पकड़ना काफी मुश्किल हो रहा है, क्योंकि पुराने उपकरण दूसरे स्ट्रेन के लिए तैयार किए गए थे. शुरुआती पहचान न होने के कारण इसके इलाज और वैक्सीन विकास में भी दिक्कतें आ रही हैं.
भारत की भूमिका पर सौम्या स्वामीनाथन का बयान
सौम्या स्वामीनाथन ने सोमवार को रेखांकित किया कि वैश्विक स्वास्थ्य संकट के इस दौर में भारत इबोला से जुड़े अनुसंधान को गति देने में बड़ी भूमिका निभा सकता है. भारत के पास मौजूद उन्नत वैज्ञानिक बुनियादी ढांचे के बल पर वैक्सीन (टीके), डायग्नोस्टिक्स और मोनोक्लोनल एंटीबॉडी के विकास को तेज किया जा सकता है. इसके लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और डब्लूएचओ के प्रयोगशाला नेटवर्क के बीच वैश्विक स्तर पर आपसी सहयोग को मजबूत करना बेहद जरूरी है.
वर्तमान में, मध्य अफ्रीका के संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में जांच और उपचार की सीमित उपलब्धता के कारण डब्लूएचओ और सहयोगी एजेंसियां बड़े पैमाने पर कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और निगरानी में जुटी हैं ताकि संक्रमण की चेन को जल्द से जल्द तोड़ा जा सके.













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