RBI ने रेपो रेट में नहीं किया बदलाव, क्या आपके होम लोन की EMI बदलेगी?
RBI Repo Rate

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अपनी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक (29 सितंबर से 1 अक्टूबर तक) में यह तय किया कि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और यह 5.50% पर ही बना रहेगा. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने जानकारी दी है, कि समिति के सभी सदस्यों ने इस फैसले पर सहमति जताई है. इसके साथ ही, अन्य प्रमुख नीतिगत दरों में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है – स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) की दर 5.25% पर बनी रहेगी, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) और बैंक रेट 5.75% पर जैसे अभी हैं वैसे ही रहेंगे.

इसका मतलब है, कि बैंकों को रिज़र्व बैंक से पैसा उधार लेने और जमा रखने की दरों में कोई बदलाव नहीं होगा. इससे यह साफ होता है, कि फिलहाल ब्याज दरें न तो घटने वाली हैं और न ही बढ़ने वाली है. यही कारण है कि मौद्रिक नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ रखा गया है, यानी आरबीआई आगे के हालात देखकर ही कोई बड़ा कदम उठाएगा.

त्योहारी सीज़न में रियल एस्टेट सेक्टर को राहत

रेपो रेट स्थिर रहने का सीधा असर रियल एस्टेट सेक्टर पर दिख रहा है. विशेषज्ञों का कहना है, कि अब होम लोन की ईएमआई (EMI) बढ़ेगी नहीं, जिससे खरीदारों का भरोसा मजबूत होगा. इसका सबसे ज्यादा फायदा पहली बार घर खरीदने वालों और मध्यम आय वर्ग को मिलेगा, क्योंकि उन्हें अपने बजट में आसानी से घर खरीदने का मौका मिलेगा.

नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (National Real Estate Development Council) महाराष्ट्र की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट मंजू याग्निक ने कहा है, कि ब्याज दरें न बढ़ने से लंबे समय से टल रहे खरीद फैसले पूरे होंगे और बिल्डरों को बेहतर तरीके से प्रोजेक्ट की योजना बनाने और पूरा करने में मदद मिलेगी. वहीं, अशार ग्रुप (Ashar Group) के वाइस प्रेसिडेंट और फाइनेंस हेड धर्मेंद्र रैचुरा ने कहा कि उधारी की लागत स्थिर रहने से डेवलपर्स को समय पर प्रोजेक्ट पूरा करने और निवेश बनाए रखने में सहूलियत होगी, भले ही वैश्विक स्तर पर आर्थिक चुनौतियां क्यों न हों.

अगस्त में भी अपनाया था ‘रुककर देखने’ का रवैया

आरबीआई ने इस साल फरवरी से अब तक तीन बार रेपो रेट में कटौती की है, जिससे कुल 100 बेसिस पॉइंट (BPS) की कमी की गई. लेकिन अगस्त में हुई द्विमासिक मौद्रिक नीति (Bi-monthly Monetary Policy) बैठक में केंद्रीय बैंक ने कोई बदलाव नहीं किया. उस समय आरबीआई ने कहा था कि वह ‘रुककर देखने’ की रणनीति अपनाएगा, ताकि अमेरिकी टैरिफ और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक हालात का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर कितना पड़ता है, इसका ठीक से आकलन किया जा सके.

होम लोन लेने वालों के लिए क्या मायने रखता है यह फैसला?

रेपो रेट स्थिर रहने से मौजूदा होम लोन लेने वालों को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि उनकी ईएमआई में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी. वहीं नए ग्राहकों के लिए यह सही समय है, कि वे अलग-अलग बैंकों के लोन ऑफर की तुलना करें और यदि आगे ब्याज दरें बढ़ने की आशंका हो तो फिक्स्ड रेट लोन लेने पर विचार करें.

दूसरी ओर, जिन उधारकर्ताओं के लोन अब भी पुराने सिस्टम जैसे बेस रेट (Base Rate) या एमसीएलआर (MCLR) से जुड़े हैं, उनके लिए यह मौका है कि वे अपने लोन एग्रीमेंट की समीक्षा करें और चाहें तो रेपो रेट से जुड़े लोन में शिफ्ट हो जाएं. ऐसा करने से ब्याज दरें ज्यादा पारदर्शी रहेंगी और बैंक द्वारा किए गए बदलाव का फायदा जल्दी मिलेगा. एएनएरॉक ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि रेपो रेट स्थिर रहने से मौजूदा होम लोन की ईएमआई जस की तस बनी रहेगी, जिससे खरीदारों का भरोसा मजबूत रहेगा.

आगे क्या होगा?

आरबीआई हर साल छह बार द्विमासिक मौद्रिक नीति बैठकें करता है, जिनमें ब्याज दरों, मुद्रा की उपलब्धता, महंगाई और अर्थव्यवस्था से जुड़े अहम पॉइंटर्स पर फैसले लिए जाते हैं.

इस बार रेपो रेट को 5.50% पर स्थिर रखने से होम लोन लेने वालों को तुरंत राहत मिली है. मौजूदा ग्राहकों की ईएमआई नहीं बढ़ेगी और नए ग्राहकों को भी ज्यादा ब्याज नहीं चुकाना पड़ेगा. हालांकि, आगे ब्याज दरों की दिशा वैश्विक आर्थिक हालात और महंगाई के रुझान पर निर्भर करेगी.