Waqf Bill Passed or Not: वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को लेकर जोरदार बहस जारी है. स्पीकर ने बताया कि इस बहस को रात 10 बजे तक चलने की अनुमति दी गई है. इस दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा, "वक्फ बिल को लेकर यह डर फैलाया जा रहा है कि सरकार मुस्लिम समुदाय के धार्मिक मामलों और उनकी संपत्तियों में दखल दे रही है. यह सिर्फ वोटबैंक की राजनीति के लिए किया जा रहा है." उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस कानून का कोई भी प्रावधान पीछे की तारीख से लागू नहीं होगा.
शाह ने विपक्ष को घेरते हुए कहा कि बिल में साफ लिखा है कि यह कानून तभी प्रभावी होगा जब सरकार इसकी अधिसूचना जारी करेगी. इसके बावजूद मुसलमानों को डराया जा रहा है.
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वक्फ संशोधन बिल पर लोकसभा में गरमाई बहस
विपक्ष के सवालों का जवाब
अमित शाह ने विपक्ष के इस आरोप पर भी जवाब दिया कि वक्फ बोर्ड के तहत भूमि के दुरुपयोग हो रहा है. उन्होंने बताया कि 1913 से 2013 तक वक्फ बोर्ड के पास 18 लाख एकड़ जमीन थी, लेकिन 2013 से 2025 के बीच इसमें 21 लाख एकड़ की वृद्धि हुई. इसके अलावा, विपक्ष ने इस पर सवाल उठाया कि नए बोर्ड में 12 गैर-मुस्लिम सदस्यों को क्यों शामिल किया गया. इस पर शाह ने स्पष्ट किया कि ये सदस्य सिर्फ प्रशासनिक कार्यों को देखेंगे और किसी भी धार्मिक मामले में हस्तक्षेप नहीं करेंगे.
उन्होंने कहा, "कोई गैर-मुस्लिम धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा, वे सिर्फ यह देखेंगे कि दान की गई संपत्ति का सही उपयोग हो रहा है या नहीं." अमित शाह ने लोकसभा में दो टूक कहा कि संसद के कानून को सभी को स्वीकार करना होगा.
बिल में क्या है खास?
इससे पहले, केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की सिफारिशों के आधार पर लोकसभा में यह विधेयक पेश किया. उन्होंने बताया कि इस विधेयक का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रशासन में सुधार, पारदर्शिता लाना और टेक्नोलॉजी के जरिए प्रबंधन को आसान बनाना है.
JPC ने इस बिल को लेकर देशभर से 97.27 लाख याचिकाएं और ज्ञापन प्राप्त किए और हर एक पर गहन अध्ययन किया. रिजिजू के अनुसार, यह भारत के संसदीय इतिहास का सबसे बड़ा परामर्श अभियान था.













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