Rajya Sabha Elections: मुख्तार अब्बास नकवी की झोली में न राज्यसभा-न लोकसभा, अब क्या करेंगे BJP के इकलौते मुस्लिम केंद्रीय मंत्री?
नियम के मुताबिक किसी भी सदन का सदस्य नहीं होने के बाद भी मुख्तार अब्बास अगले छह महीने तक मंत्री बने रह सकते हैं. अगर छह महीने के अंदर लोकसभा या राज्यसभा का सदस्य नहीं बनते तो उन्हें इस्तीफा देना पड़ेगा.
दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी ने केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी (Union Minister Mukhtar Abbas Naqvi) को फिर से राज्यसभा (Rajya Sabha) नहीं भेजा. उनकी राज्यसभा सदस्यता सात जुलाई को खत्म हो रही है. कयास लगाए जा रहे थे कि मुख्तार अब्बास नकवी को रामपुर लोकसभा सीट (Lok Sabha) से टिकट मिल सकता है, लेकिन बीजेपी (BJP) ने सपा नेता आजम खान के गढ़ में घनश्याम लोधी को टिकट दे दिया है. राज्यसभा चुनाव से पहले सपा नेता अबू आजमी ने सीएम उद्धव ठाकरे को लिखा पत्र, अल्पसंख्यकों की अनदेखी का लगाया आरोप
बीजेपी ने मुख्तार अब्बास नकवी को न तो राज्यसभा भेजा और ना ही रामपुर संसदीय सीट के लिए हो रहे उपचुनाव में ही उम्मीदवार बनाया. ऐसे में सवाल ये है कि मुख्तार अब्बास नकवी केंद्र में कब तक मंत्री बने रहेंगे. नियम के मुताबिक किसी भी सदन का सदस्य नहीं होने के बाद भी मुख्तार अब्बास अगले छह महीने तक मंत्री बने रह सकते हैं. अगर छह महीने के अंदर लोकसभा या राज्यसभा का सदस्य नहीं बनते तो उन्हें इस्तीफा देना पड़ेगा.
मुख्तार अब्बास नकवी के साथ दो अन्य केंद्रीय मंत्रियों पीयूष गोयल और निर्मला सीतारमण का कार्यकाल भी खत्म हो रहा था, इन दोनों नेताओं को राज्यसभा भेज दिया गया. सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और आजम खान के इस्तीफे से रिक्त हुई आजमगढ़ और रामपुर लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव होने है. बीजेपी ने मुख्तार अब्बास नकवी को यहां से भी चुनाव मैदान में नहीं उतारा. बीजेपी ने रामपुर सीट से घनश्याम लोधी और आजमगढ़ से दिनेश लाल यादव निरहुआ को टिकट दिया है. मुख्तार अब्बास नकवी के लिए लोकसभा के भी दरवाजे बंद हो गए हैं. ऐसे में मुख्तार अब्बास नकवी का राजनीतिक करियर किस तरफ मोड़ लेने वाला पर इस पर संशय बना हुआ है.
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 (4) के मुताबिक कोई भी व्यक्ति जो किसी भी सदन का सदस्य ना हो, वह अधिकतम छह महीने तक ही मंत्री पद पर बने रह सकता है. नियम के मुताबिक छह महीने के भीतर अगर व्यक्ति लोकसभा या राज्यसभा का सदस्य नहीं चुना जाता है तो उसे इस्तीफा देना होगा. इस्तीफे के बाद भी अगर प्रधानमंत्री चाहें तो उसे फिर से मंत्री बना सकते हैं लेकिन ये मौका भी बस एक बार ही मिल सकता है.
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 05, 2022 09:10 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

