पंचायती राज दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने ई-स्वराज पोर्टल और स्वामित्व प्रोजेक्ट लॉन्च किया, जिसके जरिए पंचायतों के प्रबंधन, ऑडिट, कामों की निगरानी, योजना की व्यापकता का ध्यान रखा जा सकेगा. इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा की पंचायती राज दिवस गांव तक पहुंचाने का अवसर है. मोदी ने कहा, "कोरोना ने देश के सामने नई मुसीबत पैदा कर दी है. लेकिन महामारी ने एक संदेश भी दिया है कि हमें आत्मनिर्भर बनना ही पड़ेगा."
उन्होंने कहा कि हमें बाहर का मुंह नहीं देखना है, हमें आत्मनिर्भर बनना ही पड़ेगा. सदियों से यह परंपरा रही है कि आत्मनिर्भर बनो. शहरो को और राज्यों को भी आत्मनिर्भर बनना ही पड़ेगा. मोदी ने कहा कि मजबूत पंचायत आत्मनिर्भर गांव का आधार है. जितना पंचायत मजबूत होगा, लोकतंत्र उतना ही मजबूत होगा. तभी विकास का लाभ सभी को मिलेगा.
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गांवों के पंचायत प्रमुखों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, "6 साल पहले गांव में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी सिर्फ 100 गांव में था, लेकिन आज सवा लाख गांव तक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी हो चुकी है. मोबाइल बनाने का अभियान का नतीजा है कि गांव-गांव तक कम कीमत पर स्मार्टफोन पहुंच चुके हैं. गांव की समस्या मजबूत करने के लिए स्वराज और स्वामित्व योजना की शुरूआत की गई है. इस से ग्राम पंचायत का लेखा-जोखा एक प्लेटफार्म पर उपलब्ध होगा. इससे पंचायत के विकास का डिटेल, फंड, खर्च कोई भी जानकारी ली जा सकती है. इससे गांव के काम करने में पारदर्शिता बढ़ेगी."
स्वामित्व योजना की शुरुआत करते हुए मोदी ने कहा कि ड्रोन के माध्यम से संपत्ति की मैपिंग की जाएगी और जिससे के बाद लोगों को उनके संपत्ति की टाइटल डीड दी जा सकेगी. इससे झगड़े खत्म होंगे गांव में विकास होंगे और इस आधार पर प्रॉपर्टी पर लोन भी मिल सकेगा. उन्होंने कहा शुरुआत में यह योजना पायलट प्रोजेक्ट के रूप में 6 राज्यों में लागू की जा रही है. बाद में इसे पूरे देश में लागू की जाएगी.
देश में जारी कोरोना संकट पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि संकट के समय में जीवन की परीक्षा होती है. कोरोना संकट में गांव के लोगों ने संस्कार और परंपराओं की शिक्षा दी है, जिससे पूरा राष्ट्र सीख सकता है. उन्होंने कहा, "गांव के लोगों ने 'दो गज दूरी' बनाकर सामाजिक दूरी का संदेश दिया है, जिसको शहर वाले सीख सकते हैं."
उन्होंने कहा कि आज पूरा विश्व इस बात को लेकर चकित है कि किस तरह भारत ने कोरोना को जवाब दिया है. हमने सीमित संसाधनों में झुकने की बजाय कोरोना से टक्कर ली है. यह बात जरूर है कि परेशानी हो रही है. लेकिन, संकल्प के सामने हम नए-नए तरीके ढूंढ कर देश को बढ़ाने का काम कर रहे हैं.













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