PM Modi On Petroleum Reserves Update: पश्चिम एशिया में जारी संकट और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर उसके असर के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया है. प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी ऊर्जा नीति को मजबूत बनाने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं, जिससे देश किसी एक क्षेत्र या देश पर निर्भर न रहे. उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत ने अपनी आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित और स्थिर बनाए रखने में सफलता हासिल की है. साथ ही सरकार लगातार इस दिशा में काम कर रही है ताकि आम जनता और उद्योगों पर किसी तरह का असर न पड़े. यह भी पढ़ें: Middle East Conflict: पश्चिम एशिया तनाव के बीच PM मोदी ने की हाई-लेवल बैठक, तेल-गैस सप्लाई पर बड़ा रिव्यू
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि भारत के पास इस समय 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार मौजूद है. इसके अलावा सरकार 65 लाख मीट्रिक टन का अतिरिक्त भंडार तैयार करने की योजना पर काम कर रही है, जिससे भविष्य में किसी भी आपात स्थिति से निपटना आसान होगा.
पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में भारत ने अपने ऊर्जा आयात के स्रोतों में बड़ा विस्तार किया है. पहले जहां देश 27 देशों से ऊर्जा आयात करता था, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 41 देशों तक पहुंच गई है. इससे किसी एक देश पर निर्भरता कम हुई है और आपूर्ति अधिक सुरक्षित हुई है.
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार शिपिंग लाइनों और समुद्री मार्गों पर लगातार नजर बनाए हुए है ताकि पेट्रोल, गैस और उर्वरक की आपूर्ति समय पर देश तक पहुंचती रहे. उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे कई जहाज सुरक्षित भारत पहुंच चुके हैं.
इसके अलावा सरकार ने किसानों को वैश्विक संकट से बचाने के लिए भी कई कदम उठाए हैं. देश में यूरिया प्लांट स्थापित किए गए हैं और उर्वरक आयात के स्रोतों में विविधता लाई गई है. साथ ही जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है और अब तक 22 लाख सोलर पंप वितरित किए जा चुके हैं.
ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एथेनॉल ब्लेंडिंग 20 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है. रेलवे के विद्युतीकरण और मेट्रो नेटवर्क के विस्तार से भी ईंधन की खपत में कमी आई है. सरकार ने राज्यों को 15,000 इलेक्ट्रिक बसें भी उपलब्ध कराई हैं.
प्रधानमंत्री ने कहा कि ऊर्जा अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और सरकार हर संभव प्रयास कर रही है कि वैश्विक संकट का असर देश के नागरिकों पर न्यूनतम पड़े. उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार और उद्योग मिलकर इस चुनौती से सफलतापूर्वक निपटेंगे.











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