Patna: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के समर्थन में 'फन रन' को दिखाई हरी झंडी
सीएम सम्राट चौधरी (Photo Credits: IANS)

पटना: बिहार (Bihar) के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Chief Minister Samrat Chaudhary) ने शुक्रवार को पटना में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' ('Women's Power Salutation Act') के समर्थन में आयोजित एक 'फन रन' (Fun Run) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब लोकसभा में इस कानून के कार्यान्वयन को लेकर चर्चाएं तेज हैं. दीघा गोलंबर से जेपी सेतु तक आयोजित इस दौड़ में महिलाओं और युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जो सार्वजनिक जीवन में 'नारी शक्ति' (Women's Power) को मजबूत करने के व्यापक लक्ष्य को दर्शाता है. यह भी पढ़ें: Bihar CM Portfolio Allocation: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने पास रखे 29 विभाग, कैबिनेट विस्तार के बाद होगा बाकी मंत्रालयों का बंटवारा

33 प्रतिशत आरक्षण और प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण

दौड़ का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सभा को संबोधित किया. उन्होंने महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और शासन में उनकी सक्रिय भागीदारी के महत्व पर जोर दिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कानून का लक्ष्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करना है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का हिस्सा है.

उन्होंने बिहार में महिलाओं के अधिकारों और प्रतिनिधित्व के विस्तार के लिए पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा की गई शुरुआती पहलों की भी सराहना की.

कार्यान्वयन की चुनौतियां और भविष्य की योजना

नारी शक्ति वंदन अधिनियम को 2023 में संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित किया गया था और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे अपनी सहमति दी थी. हालांकि, इसका वास्तविक कार्यान्वयन अगली जनगणना और परिसीमन (Delimitation) अभ्यास पूरा होने पर निर्भर है.

संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के नए सिरे से निर्धारण और महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने के लिए जनसंख्या के अद्यतन आंकड़ों की आवश्यकता है ताकि निष्पक्ष प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके. यह भी पढ़ें: Samrat Choudhary Bihar New CM: बिहार में आज से सम्राट चौधरी के युग की शुरुआत, नए सीएम के रूप में ली शपथ, JDU से 2 उपमुख्यमंत्री भी बने; VIDEO

क्या जल्द लागू होगा महिला आरक्षण?

सरकार के भीतर इस कानून को जल्द लागू करने के विकल्पों पर गहन विचार-विमर्श चल रहा है.  चर्चा के केंद्र में कुछ प्रमुख प्रस्ताव हैं:

  • 2011 की जनगणना का उपयोग: नई जनगणना की प्रतीक्षा करने के बजाय 2011 के आंकड़ों का उपयोग करके प्रक्रिया को तेज करना.
  • लोकसभा सीटों में वृद्धि: रिपोर्ट्स के अनुसार, लोकसभा की सदस्य संख्या 543 से बढ़ाकर लगभग 816 करने की योजना है. इससे मौजूदा प्रतिनिधित्व को प्रभावित किए बिना 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जा सकेंगी.
  • परिसीमन आयोग: इस संदर्भ में एक नया 'परिसीमन आयोग' गठित करने के लिए एक अलग विधायी ढांचे पर भी काम किया जा रहा है.

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विश्वास जताया कि इन कदमों से आने वाले चुनावों में महिलाओं की भागीदारी एक नए युग की शुरुआत करेगी.