Parliament Budget Session 2026: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ 'अविश्वास प्रस्ताव' लाएगा विपक्ष; राहुल गांधी को रोकने पर बढ़ा विवाद
इंडिया ब्लॉक नेताओं की फाइल इमेज

नई दिल्ली: संसद (Parliament) के चल रहे बजट सत्र (Budget Session) में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव चरम पर पहुंच गया है. सोमवार, 9 फरवरी को मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) और राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की अध्यक्षता में हुई 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के नेताओं की बैठक में लोकसभा अध्यक्ष (Lok Sabha Speaker) ओम बिरला (Om Birla) के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) लाने का औपचारिक फैसला लिया गया. विपक्ष का आरोप है कि सदन में उनकी आवाज को दबाया जा रहा है और लोकतांत्रिक चर्चा के लिए पर्याप्त स्थान नहीं दिया जा रहा है. यह भी पढ़ें: Union Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बाद PM मोदी भी संसद भवन पहुंचे; बजट 11 बजे पेश होगा

विवाद की मुख्य वजह: सेना प्रमुख का संस्मरण

इस ताजा विवाद की शुरुआत पिछले सप्ताह तब हुई, जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी लोकसभा में पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम. एम. नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण (Memoir) 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' का हवाला देने की कोशिश कर रहे थे.

राहुल गांधी चीन के साथ 2020 के सीमा विवाद पर सरकार को घेरना चाहते थे, लेकिन अध्यक्ष ओम बिरला ने 'नियम 349' का हवाला देते हुए उन्हें रोक दिया. अध्यक्ष का तर्क था कि सदन में किसी भी अप्रकाशित या गैर-प्रमाणित दस्तावेज को उद्धृत नहीं किया जा सकता. विपक्ष ने इसे "अभिव्यक्ति की आजादी का हनन" करार दिया है.

सांसदों का निलंबन और बढ़ता गतिरोध

सदन में तनाव उस समय और बढ़ गया जब पिछले सप्ताह विरोध प्रदर्शन कर रहे विपक्ष के आठ सांसदों को "अशोभनीय व्यवहार" के लिए निलंबित कर दिया गया. विपक्षी दलों का तर्क है कि जहां एक ओर उन्हें बोलने से रोका जा रहा है, वहीं सत्ता पक्ष के सदस्यों को विवादास्पद टिप्पणियां करने की पूरी छूट दी जा रही है.

विपक्ष ने स्पीकर पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा है कि सदन को केवल सरकार की मर्जी से चलाया जा रहा है.

अध्यक्ष ओम बिरला का पक्ष

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपने फैसलों का बचाव करते हुए कहा कि बजट सत्र के दौरान अब तक 19 घंटे से अधिक का समय हंगामे की भेंट चढ़ चुका है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन चर्चा और संवाद के लिए है, न कि नारेबाजी के लिए.

हाल ही में स्पीकर ने यह भी दावा किया था कि उन्हें "विश्वसनीय जानकारी" मिली थी कि कुछ विपक्षी सांसद प्रधानमंत्री के खिलाफ सदन में "अभूतपूर्व कार्रवाई" की योजना बना रहे थे, जिसके कारण उन्होंने कार्यवाही में कड़े रुख अपनाए. यह भी पढ़ें: Union Budget 2026: संसद में 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में क्या होगा खास? यहां जानें सब कुछ

आगे क्या होगा?

विपक्ष अब अनुच्छेद 94(सी) के तहत लोकसभा सचिव को स्पीकर को हटाने का नोटिस सौंपने की तैयारी में है. हालांकि आंकड़ों के लिहाज से यह प्रस्ताव केवल एक प्रतीकात्मक विरोध हो सकता है, लेकिन इसने 2026 के बजट सत्र की पूरी कार्यवाही को प्रभावित कर दिया है.