नई दिल्ली, 13 अप्रैल: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को राष्ट्रीय जनता दल (Rashtriya Janata Dal) यानी आरजेडी (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव को बड़ा झटका देते हुए कथित 'जमीन के बदले नौकरी' (Land-for-Jobs) घोटाले में उनके खिलाफ दर्ज सीबीआई (CBI) की एफआईआर (FIR) और चार्जशीट (Charge Sheet) को रद्द करने से इनकार कर दिया. जस्टिस एम.एम. सुंदरेश (Justice M.M. Sundresh) और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह (Justice N. Kotiswar Singh) की पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा कर दिया, जिसमें भ्रष्टाचार के मामले को रद्द करने की मांग ठुकरा दी गई थी. यह भी पढ़ें: Lalu Yadav’s Grandson Aditya Leaves For Military Training: लालू प्रसाद यादव के पोते आदित्य ने सिंगापुर में शुरू की बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग, रोहिणी आचार्य ने किया इमोशनल पोस्ट
ट्रायल के दौरान कानूनी मुद्दों पर चर्चा की छूट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धारा 17A की प्रयोज्यता से संबंधित विवादित मुद्दे पर कोई राय व्यक्त नहीं कर रहा है. अदालत ने इस सवाल को खुला छोड़ दिया है कि क्या यह प्रावधान 'प्रॉस्पेक्टिव' (भविष्यगामी) है या 'रिट्रोस्पेक्टिव' (पिछली तारीख से प्रभावी).
पीठ ने लालू यादव को ट्रायल कोर्ट के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दे दी है. साथ ही, उन्हें यह स्वतंत्रता दी गई है कि वे ट्रायल के दौरान धारा 17A और अन्य कानूनी आपत्तियों को उठा सकते हैं.
धारा 17A को लेकर दोनों पक्षों की दलीलें
लालू यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि धारा 17A के तहत जांच शुरू करने से पहले पूर्व अनुमति अनिवार्य थी, क्योंकि आरोप लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए उनके आधिकारिक कार्यों के निर्वहन से संबंधित हैं. उन्होंने कहा कि मंजूरी के बिना पूरी कार्यवाही अवैध है.
वहीं, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस.वी. राजू ने इसका विरोध करते हुए कहा कि धारा 17A केवल वहां लागू होती है जहां आरोपी निर्णय लेने वाला या सिफारिश करने वाला प्राधिकारी हो. सीबीआई का तर्क था कि इस मामले में लालू यादव उस श्रेणी में नहीं आते थे, इसलिए किसी पूर्व मंजूरी की आवश्यकता नहीं थी. यह भी पढ़ें: Land for Job Case: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ED कार्यालय पहुंचे, लैंड फॉर जॉब मामले में होगी पूछताछ
क्या है लैंड-फॉर-जॉब घोटाला?
यह मामला उन आरोपों से संबंधित है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे. आरोप है कि भारतीय रेलवे में नियुक्तियां उन लोगों को दी गईं, जिन्होंने बदले में अपने जमीन के टुकड़े लालू यादव के परिवार के सदस्यों और करीबियों को हस्तांतरित किए थे.
सीबीआई ने इस मामले में मई 2022 में एफआईआर दर्ज की थी. इसमें लालू प्रसाद यादव के अलावा उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके परिवार के अन्य सदस्यों और अज्ञात लोक सेवकों को आरोपी बनाया गया है.
मामले की वर्तमान स्थिति
इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने लालू यादव की याचिका को 'मेरिट' की कमी बताते हुए खारिज कर दिया था. वर्तमान में सीबीआई इस मामले में कई चार्जशीट दाखिल कर चुकी है. सुप्रीम कोर्ट के ताजा रुख के बाद अब इस मामले की कानूनी लड़ाई ट्रायल कोर्ट में जारी रहेगी, जहां लालू यादव को अपनी दलीलें रखने का अवसर मिलेगा.













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