Navi Mumbai’s First Signal School: नवी मुंबई के नेरुल में पहला सिग्नल स्कूल, सड़क पर रहने वाले बच्चों मिलेगी शिक्षा
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: Pixabay)

Navi Mumbai’s First Signal School:  अगर कोई चीज़ जीवन बदल सकती है, तो वह है शिक्षा। शिक्षा नहीं है तो जीवन पशुवत हो जाता है. इसी सोच के साथ नवी मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (NMMC) और समर्थ भारत व्यासपीठ के सहयोग से नेरुल में शहर का पहला 'सिग्नल स्कूल' शुरू किया गया है. यह पहल ठाणे में तीन हाट नाका फ्लाईओवर के नीचे सफलतापूर्वक चल रहे सिग्नल स्कूल प्रोजेक्ट पर आधारित है.

स्कूल खोलने का उद्देश्य

शहर का यह पहला सिग्नल स्कूल म्युनिसिपल स्कूल नंबर 102, सेक्टर 4, नेरुल में खोला गया है. इसका उद्देश्य है—ट्रैफिक सिग्नल पर फूल, माला और अन्य वस्तुएं बेचने वाले बच्चों को औपचारिक शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें एक बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर करना.

समर्थ भारत व्यासपीठ के सीईओ की बातें

समर्थ भारत व्यासपीठ के सीईओ बी. सावंत ने कहा कि यह स्कूल सिर्फ एबीसी या 123 सिखाने की जगह नहीं है. यह उन बच्चों को सपने देखने, समाज का हिस्सा बनने और सड़क के कष्टपूर्ण जीवन से बाहर निकलने का अवसर देता है.

अब तक 45 छात्रों का नामांकन

यह स्कूल जून 2025 में आधिकारिक रूप से शुरू हुआ, जो नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत का प्रतीक है. वर्तमान में 45 छात्रों का नामांकन हुआ है, जिनमें 25 लड़कियाँ और 20 लड़के शामिल हैं.  इन छात्रों में27 प्री-प्राइमरी, 10 छात्र कक्षा 1 से 4 तक वहीं  7–8 छात्र कक्षा 5 व 6 के हैं.

काउंसलिंग से बदली सोच

नामांकन से पहले, स्कूल टीम ने बच्चों के माता-पिता के साथ काउंसलिंग सत्र आयोजित किए,
कई माता-पिता शुरू में हिचकिचा रहे थे, लेकिन टीम ने उन्हें समझाया और प्रेरित किया।
"हमने उन माता-पिता को भी मनाया, जिन्होंने कभी अपने बच्चों के लिए स्कूल या कक्षा की कल्पना भी नहीं की थी," टीम के एक सदस्य ने कहा,

बच्चों के लिए सुविधाएं

  • स्कूल बस के जरिए बच्चों को सुरक्षित रूप से लाया और ले जाया जाता है।

  • उपस्थिति औसतन 80% बनी हुई है.

  • कई बच्चे बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं; कई बिना नहाए स्कूल आते हैं.
    ऐसे में स्कूल के केयरटेकर उन्हें नहाने और तैयार होने में मदद करते हैं.

दिनचर्या और पाठ्यक्रम

सुबह की दिनचर्या के बाद, बच्चे सामूहिक रूप से नाश्ता करते हैं और फिर कक्षाएं शुरू होती हैं।
शिक्षा के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास, सामाजिक कौशल और आत्मनिर्भरता पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है, ताकि ये बच्चे आत्मविश्वास के साथ समाज में सम्मिलित हो सकें.