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'Mother of All Deals': भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता संपन्न; सस्ती होंगी विदेशी कारें और वाइन

लगभग दो दशकों की लंबी बातचीत के बाद भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर मुहर लगा दी है. इस समझौते से न केवल दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध मजबूत होंगे, बल्कि भारतीय उपभोक्ताओं के लिए यूरोपीय सामान भी काफी सस्ता हो जाएगा.

'Mother of All Deals': भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता संपन्न; सस्ती होंगी विदेशी कारें और वाइन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Photo Credits: ANI)

नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने आज एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement - FTA) को अंतिम रूप दे दिया है. लगभग 20 वर्षों की लंबी और जटिल वार्ताओं के बाद संपन्न हुए इस समझौते को विशेषज्ञों द्वारा 'सभी समझौतों की जननी' (Mother of All Deals) कहा जा रहा है. यह व्यापक समझौता दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच टैरिफ (आयात शुल्क) को कम करने, बाजारों को खोलने और रणनीतिक संबंधों को गहरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. इससे व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है. यह भी पढ़ें: India Energy Week 2026: पीएम मोदी ने इंडिया एनर्जी वीक कॉन्क्लेव का किया उद्घाटन; भारत-यूरोपीय संघ ट्रेड डेवलपमेंट की 'अहम' घोषणा की (Watch Video)

सस्ती होंगी यूरोपीय लग्जरी कारें और वाइन

इस समझौते के बाद भारतीय उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ा बदलाव यूरोपीय उत्पादों की कीमतों में देखने को मिलेगा.

  • कारों की कीमतों में गिरावट: वर्तमान में यूरोपीय कारों पर आयात शुल्क 110% तक है. इस समझौते के तहत इसे घटाकर 40% और भविष्य में लगभग 10% तक लाने का लक्ष्य है. इससे मर्सिडीज-बेंज, बीएमडब्ल्यू और वोक्सवैगन जैसी ब्रांड्स की कारें सस्ती हो जाएंगी.
  • उपभोक्ता सामान: यूरोपीय वाइन, स्पिरिट, ऑलिव ऑयल और प्रोसेस्ड फूड पर टैरिफ कम होने या हटने से ये उत्पाद भारतीय बाजारों में अधिक किफायती दरों पर उपलब्ध होंगे.

भारत के निर्यात को मिलेगा जबरदस्त बढ़ावा

यह समझौता केवल आयात तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय निर्यातकों के लिए यूरोपीय संघ के विशाल बाजार के दरवाजे खोलता है.

व्यापक निवेश और सेवाओं में लाभ

व्यापार के अलावा, इस FTA में सेवाओं, डिजिटल ट्रेड और निवेश को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रतिबद्धताएं शामिल हैं.

क्यों खास है यह समझौता?

भारत और यूरोपीय संघ मिलकर वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) और व्यापार का एक बहुत बड़ा हिस्सा साझा करते हैं. इस समझौते के लागू होने से निवेशकों को सेवा और विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्रों में स्पष्टता मिलेगी. एक बार दोनों पक्षों द्वारा अनुसमर्थन (Ratification) मिलने के बाद, यह समझौता इसी वर्ष के भीतर लागू हो सकता है, जिससे दोनों क्षेत्रों के उद्योगों और उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा.

(The above story first appeared on LatestLY on Jan 27, 2026 09:33 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).