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मायावती ने लोकसभा में नेता बदले, रितेश पांडेय को हटाया, गिरीश चंद्र जाटव को दी जिम्मेदारी

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद बसपा ने पार्टी में बदलाव करने शुरू कर दिए हैं. अम्बेडकर नगर से सांसद रितेश पाण्डेय को लोकसभा में पार्टी के नेता के पद से हटा दिया गया है. उनकी जगह नगीना लोकसभा से सांसद गिरीश चंद्र जाटव को अब यह जिम्मेदारी दी गई है.

मायावती ने लोकसभा में नेता बदले, रितेश पांडेय को हटाया, गिरीश चंद्र जाटव को दी जिम्मेदारी
बसपा अध्यक्ष मायावती (Photo Credit : Twitter)

लखनऊ, 15 मार्च : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद बसपा ने पार्टी में बदलाव करने शुरू कर दिए हैं. अम्बेडकर नगर से सांसद रितेश पाण्डेय को लोकसभा में पार्टी के नेता के पद से हटा दिया गया है. उनकी जगह नगीना लोकसभा से सांसद गिरीश चंद्र जाटव को अब यह जिम्मेदारी दी गई है. वहीं, मायावती ने मंगलवार को लखनऊ में बसपा- डीएस फोर के संस्थापक कांशीराम को श्रद्धांजलि अर्पित की है. बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने लोकसभा के बजट सत्र के दौरान ही नेताओं के पदभार में बदलाव कर दिया है. अम्बेडकर नगर से बसपा के लोकसभा सदस्य रितेश पाण्डेय के स्थान पर अब गिरीश चंद्र जाटव को लोकसभा में पार्टी का नेता बनाया गया है. गिरीश चंद्र जाटव बिजनौर के नगीना से लोकसभा सदस्य हैं. इसके साथ ही राम शिरोमणि वर्मा लोकसभा में उप नेता के पद पर बरकरार रहेंगे जबकि संगीता आजाद को चीफ व्हिप बनाया गया है. पहले गिरीश चंद्र जाटव पार्टी के चीफ व्हिप थे.

रितेश पाण्डेय को इस पद से हटाए जाने का कारण अम्बेडकर नगर में पार्टी की हार के साथ ही रितेश पाण्डेय के पिता बसपा से पूर्व सांसद राकेश पाण्डेय के समाजवादी पार्टी के विधायक बनना भी माना जा रहा है. अम्बेडकर नगर में राकेश पाण्डेय का कद काफी बड़ा माना जाता है. इस बार विधानसभा चुनाव से पहले बसपा के बड़े नेताओं लालजी वर्मा व राम अचल राजभर के बाद राकेश पाण्डेय के सपा में शामिल होने से बसपा का बड़ा गढ़ माने जाने वाले अम्बेडकर नगर जिले में बसपा साफ हो गई है. यह भी पढ़ें : मुंबई में अगले साल आईओसी सत्र का आयोजन देश के खेल क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा: प्रमाणिक

उधर, कांशीराम जन्मदिन पर बसपा प्रमुख ने राजधानी लखनऊ के कार्यालय में उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किया. इस अवसर पर कहा कि आत्म-सम्मान और स्वाभिमान के बहुजन मूवमेंट के प्रति ऐतिहासिक संघर्ष और योगदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है. वे हमेशा प्रेरणा के स्रोत बने रहेंगे. संविधान निमार्ता डॉ. भीमराव आम्बेडकर के कारवां का संघर्षशील सफर उतार-चढ़ाव के बावजूद लगातार जारी रहेगा.

(The above story first appeared on LatestLY on Mar 15, 2022 01:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).