Malegaon Blast Case Verdict: मालेगांव बम ब्लास्ट मामले में सभी आरोपी बरी, जानें नेताओं की प्रतिक्रियाएं; VIDEOS
Malegaon Blast Case Verdict: मालेगांव बम ब्लास्ट मामले में 17 साल के लंबे इंतजार के बाद गुरुवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने फैसला सुनाया. सबूतों के अभाव में अदालत ने सभी सातों आरोपियों को बरी कर दिया.कोर्ट के फैसले के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई और विभिन्न दलों के नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी.
सांसद रवि किशन की प्रतिक्रिया
भारतीय जनता पार्टी के गोरखपुर से सांसद रवि किशन ने कहा कि मालेगांव बम ब्लास्ट पर आये फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी हैं. रवि किशन ने "मुझे समझ नहीं आता कि मैं खुशी मनाऊं या दुख... उनके जीवन के 17 साल कौन लौटाएगा? कांग्रेस के जिन आलाकमान नेताओं ने 'भगवा आतंकी' शब्द दिया था, उन्हें जवाब देना चाहिए... उन्हें 100 करोड़ हिंदुओं को यह बताना चाहिए कि किस आधार पर उन्होंने 'भगवा आतंकवाद' शब्द का इस्तेमाल करना शुरू किया था. यह भी पढ़े: Malegaon Bomb Blast Case: आ गया मालेगांव ब्लास्ट केस का फाइनल फैसला, 17 साल बाद साध्वी प्रज्ञा-कर्नल पुरोहित सहित सभी 7 आरोपी बरी
शिवसेना की प्रतिक्रिया
शिवसेना (शिंदे गुट) के सांसद नरेश म्हस्के ने कहा, "यह सच्चाई की जीत है। यह केस 17 सालों से चला आ रहा था. कई लोगों ने कहा था कि उन्होंने एटीएस के दबाव में बयान दिए थे। अब सब कुछ स्पष्ट हो गया है. कांग्रेस सरकार ने ‘हिंदू आतंकवाद’ के नाम पर लोगों को गुमराह किया था, जो अब साबित हो गया है.
सांसद नरेश म्हस्के की प्रतिक्रिया
#WATCH | Delhi: On NIA court acquitting all the accused in the Malegaon Blast case, Shiv Sena MP Naresh Mhaske says, "The truth has won. The case had been going on for the last 17 years. Many army officers claimed that they made certain statements under pressure from the ATS. But… pic.twitter.com/PL9Dvp70uE
— ANI (@ANI) July 31, 2025
शिवसेना (शिंदे गुट) का बयान
वहीं, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के नेता अरविंद सावंत ने NIA की जांच पर सवाल उठाए और कहा कि जांच में विरोधाभास थे. उन्होंने बताया कि अदालत ने जिन बिंदुओं पर सबूतों की कमी बताई, वह NIA की जिम्मेदारी थी.
दरअसल कोर्ट ने बताया कि मामले में दर्ज बयानों और सबूतों में विरोधाभास था.अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि धमाके में इस्तेमाल हुई मोटरसाइकिल किसके पास थी या बम उसमें रखा गया था. साथ ही 34 गवाह अपने बयानों से मुकर गए, जिससे अभियोजन पक्ष की कहानी कमजोर हो गई. हालांकि, अदालत ने पीड़ितों के दर्द को स्वीकार किया, लेकिन कानूनी तौर पर पर्याप्त सबूत न होने के कारण आरोपियों को बरी किया गया.
29 सितंबर 2008 को हुआ था ब्लास्ट
मामला 29 सितंबर 2008 का है, जब मालेगांव में एक बम धमाका हुआ था जिसमें 6 लोग मारे गए और 100 से अधिक घायल हुए थे। शुरुआत में जांच महाराष्ट्र एटीएस ने की थी, जिसकी अगुवाई दिवंगत हेमंत करकरे कर रहे थे। बाद में 2011 में केस NIA को सौंपा गया था.
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 31, 2025 12:21 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

