8th Pay Commission Update: 2027 तक लागू हो सकता है आठवां वेतन आयोग, 1 जनवरी 2026 से एरियर मिलने की संभावना; सुझाव में यूनियनों ने रखी ये मांगें
8वां वेतन आयोग (Photo Credits: File Image)

8th Pay Commission Update:  केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) से जुड़ी बेहद महत्वपूर्ण समीक्षा प्रक्रिया तेज हो गई है. हाल ही में कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन की अध्यक्षता में राष्ट्रीय परिषद की संयुक्त परामर्शदात्री तंत्र (NCJCM) की 49वीं बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में कर्मचारी संगठनों ने वेतन, भत्ते और पेंशन में संशोधन को लेकर अपनी आधिकारिक मांगें और ज्ञापन (Memorandum) सरकार के समक्ष प्रस्तुत किए हैं.

जनवरी 2026 से मिल सकता है एरियर

योजना के मुताबिक आठवें वेतन आयोग को 1 जनवरी 2026 से प्रभावी माना जाना है, क्योंकि सातवें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो रहा है. हालांकि, ताजा प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं को देखते हुए कर्मचारियों को संशोधित वेतन के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है.  यह भी पढ़े:  8th Pay Commission News: 8वें वेतन आयोग को लेकर महाराष्ट्र पेंशनर संगठन की बड़ी मांग, न्यूनतम वेतन ₹65,000 करने और फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने का प्रस्ताव

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, नवंबर 2025 में गठित किए गए इस आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए करीब 18 महीने का समय दिया गया है. इसके चलते आयोग अपनी अंतिम सिफारिशें मध्य 2027 तक सरकार को सौंप पाएगा. कैबिनेट की मंजूरी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बाद इसे अप्रैल 2027 या उसके बाद ही पूरी तरह लागू किया जा सकेगा. राहत की बात यह है कि नया वेतन ढांचा 1 जनवरी 2026 से ही लागू माना जाएगा, जिसके कारण कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को देरी की अवधि का पूरा एरियर (Arrears) एकमुश्त दिया जाएगा.

कर्मचारियों की मुख्य मांगें

कर्मचारी यूनियनों की ओर से नेशनल काउंसिल में कई बड़े प्रस्ताव रखे गए हैं. स्टाफ साइड की तरफ से न्यूनतम मूल वेतन (Minimum Basic Salary) को मौजूदा 18,000 रुपये से बढ़ाकर काफी अधिक करने की मांग की गई है.

इसके साथ ही, वेतन संशोधन के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले 'फिटमेंट फैक्टर' (Fitment Factor) को लेकर भी व्यापक चर्चा चल रही है. कर्मचारी संगठनों की मांग है कि अलग-अलग स्तर के कर्मचारियों के लिए फिटमेंट फैक्टर 2.86 से लेकर 3.25 के बीच तय किया जाए. यदि सरकार इन प्रस्तावों के मध्य मार्ग को भी स्वीकार करती है, तो कर्मचारियों के मूल वेतन में 20% से 35% तक की औसत वृद्धि देखी जा सकती है.

पेंशनभोगियों के लिए बड़ी राहत

इस बैठक में केवल सेवारत कर्मचारियों के वेतन पर ही नहीं, बल्कि 67 लाख से अधिक पेंशनभोगियों के हितों पर भी विस्तृत बातचीत हुई. प्रस्तावों के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 या उससे पहले सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों को भी आठवें वेतन आयोग के दायरे में शामिल किया जाएगा.

इसके अतिरिक्त, कर्मचारी संगठनों ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को वापस लेकर पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली का मुद्दा भी उठाया है. साथ ही, पेंशनभोगियों के लिए फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (FMA) को बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति माह करने और हर 5 साल में पेंशन की समीक्षा करने की सिफारिशें भी आयोग के समक्ष रखी गई हैं.

डेटा जुटाने के लिए आयोग के क्षेत्रीय दौरे शुरू

आठवें वेतन आयोग ने जमीनी स्तर पर विसंगतियों और अलग-अलग क्षेत्रों के कर्मचारियों की स्थिति को समझने के लिए देशव्यापी दौरे (Field Visits) शुरू कर दिए हैं. इसके तहत आयोग की टीम मई 2026 के मध्य में हैदराबाद का दौरा कर चुकी है, जबकि जून 2026 के शुरुआती सप्ताह में श्रीनगर और लेह का दौरा प्रस्तावित है.

इन दौरों और विभिन्न मंत्रालयों से मिल रहे डेटा के आधार पर ही आयोग अपनी अंतरिम रिपोर्ट का खाका तैयार करेगा. तब तक कर्मचारियों को अंतरिम व्यवस्था के तौर पर समय-समय पर मिलने वाले महंगाई भत्ते (DA) का लाभ मिलता रहेगा, जिसे जनवरी 2026 से बढ़ाकर 60% कर दिया गया है.