नई दिल्ली, 18 मई: केंद्र सरकार (Central Government) के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों (Employees and Pensioners) के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है. कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन की अध्यक्षता में 11 मई को आयोजित 'संयुक्त परामर्श तंत्र' (Joint Consultative Mechanism) (JCM) की 49वीं राष्ट्रीय परिषद की बैठक में सेवा और वेतन से जुड़ी पुरानी मांगों को एक नया मोमेंटम मिला है. 3 नवंबर 2025 को सरकार द्वारा 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के औपचारिक गठन के बाद, कर्मचारी यूनियनें अब अपनी लंबी लंबित मांगों को इसके विचारार्थ विषयों (Terms of Reference) में शामिल कराने के लिए सक्रिय हो गई हैं. यह भी पढ़ें: 8वें वेतन आयोग पर बड़ा अपडेट: नए वेतन मैट्रिक्स और फिटमेंट फैक्टर को लेकर कर्मचारियों से सरकार ने मांगे सुझाव, 31 मई तक 8cpc.gov.in पर भेज सकते हैं सिफारिशें
पुरानी पेंशन योजना (OPS) पर बड़ी सहमति
इस जेसीएम बैठक का एक सबसे महत्वपूर्ण परिणाम पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर सामने आया है. कर्मचारी प्रतिनिधियों ने तर्क दिया कि जिन कर्मचारियों की भर्ती 22 दिसंबर 2003 से पहले विज्ञापित रिक्तियों (Vacancies) के तहत हुई थी, उन्हें सीसीएस (पेंशन) नियमों के तहत कवर किया जाना चाहिए—भले ही उनकी वास्तविक नियुक्ति इस कट-ऑफ तारीख के बाद हुई हो. रिपोर्टों के अनुसार, व्यय विभाग (Department of Expenditure) के सचिव ने इसे एक सप्ताह के भीतर लागू करने पर सहमति व्यक्त की है, जिससे ओपीएस-एनपीएस संक्रमण काल के बीच फंसे हजारों कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.
पेंशन सुधार: न्यूनतम पेंशन ₹20,500 करने का प्रस्ताव
बैठक में पेंशन सुधार का मुद्दा सबसे ऊपर रहा. यूनियनों ने मौजूदा पेंशन के संशोधन, कम्यूटेड पेंशन की बहाली और पेंशन से जुड़े मामलों को 8वें वेतन आयोग के एजेंडे में औपचारिक रूप से शामिल करने की मांग की. कैबिनेट सचिव ने संकेत दिया कि कुछ चिंताओं को आयोग के पास भेजा जा सकता है. 7वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम पेंशन फिलहाल ₹9,000 है, जिसे नए फिटमेंट फैक्टर के आधार पर 8वें वेतन आयोग में बढ़ाकर लगभग ₹20,500 करने का प्रस्ताव रखा गया है.
फुल मेडिकल रीइंबर्समेंट और भत्तों की मांग
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े दावों (Healthcare Reimbursement) पर भी तीखी बहस हुई. यूनियनों ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए चिकित्सा खर्चों के पूर्ण भुगतान (Full Reimbursement) की मांग की. उन्होंने ध्यान आकर्षित किया कि सुनने की मशीन (Hearing Aid) के रीइंबर्समेंट की दरों में पिछले एक दशक से कोई संशोधन नहीं हुआ है. इसके अतिरिक्त, यह तर्क भी दिया गया कि डेंटल इंप्लांट्स (दांतों के प्रत्यारोपण) को सीधे कॉस्मेटिक प्रक्रियाओं की श्रेणी में नहीं डाला जाना चाहिए. यह भी पढ़ें: 8th Pay Commission Update: आठवें वेतन आयोग की गतिविधियों में तेजी, यूनियनों के साथ बैठक और सुझावों की तारीख बढ़ी
प्रमोशन में देरी और अनुकंपा नियुक्तियों पर असंतोष
कर्मचारी प्रतिनिधियों ने विभागीय पदोन्नति समितियों (DPCs) में वर्षों की देरी का मुद्दा उठाया, विशेष रूप से रक्षा प्रतिष्ठानों (Defence Establishments) में, जिससे कर्मचारियों के मनोबल और करियर ग्रोथ पर बुरा असर पड़ रहा है. इसके साथ ही, अनुकंपा के आधार पर दी जाने वाली नियुक्तियों पर लगी 5% की मौजूदा सीमा (Ceiling) को भी पीड़ित परिवारों के लिए नाकाफी बताते हुए इसे हटाने की चुनौती दी गई.
ऑर्डनेंस फैक्ट्री के कर्मचारियों के लिए भी एक बड़ा अपडेट आया, जहां कैबिनेट सचिव ने संकेत दिया कि सरकार सेवानिवृत्ति तक 'डीम्ड डेपुटेशन' (Deemed Deputation) की सिफारिश करने की योजना बना रही है, ताकि उनका केंद्रीय कर्मचारी का दर्जा बरकरार रहे.
31 मई तक बढ़ी समयसीमा
कर्मचारी यूनियनों के लिए अपनी मांगों को मजबूती से रखने का यह एक महत्वपूर्ण अवसर है, क्योंकि एनसी-जेसीएम (NC-JCM) के ज्ञापन सौंपने की समयसीमा को बढ़ाकर 31 मई, 2026 कर दिया गया है. चूंकि 8वें वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है और इसकी सिफारिशें 2027 के मध्य तक आने की उम्मीद है, ऐसे में यूनियनों के पास अपनी मांगें मनवाने के लिए यह आखिरी और बेहद महत्वपूर्ण विंडो है.













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