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Twisha Sharma Death Case: ट्विशा शर्मा के पिता ने राज्यपाल से लगाई निष्पक्ष जांच की गुहार, आरोपी सास के 'पावरफुल' सरकारी पद को लेकर जताई चिंता

पूर्व मिस पुणे त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में उनके पिता नवनिधि शर्मा ने मध्य प्रदेश के राज्यपाल को पत्र लिखा है. उन्होंने आरोपी सास गिरिबाला सिंह के प्रशासनिक और अर्ध-न्यायिक पद का हवाला देते हुए जांच प्रभावित होने की आशंका जताई है और उनके निलंबन की मांग की है.

Twisha Sharma Death Case: ट्विशा शर्मा के पिता ने राज्यपाल से लगाई निष्पक्ष जांच की गुहार, आरोपी सास के 'पावरफुल' सरकारी पद को लेकर जताई चिंता
ट्विशा शर्मा मामला (Photo Credits: File Image)

भोपाल, 18 मई: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) में रहने वाली 23 वर्षीय ट्विशा शर्मा (Twisha Sharma) की संदिग्ध और अस्वाभाविक मौत के मामले में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. मृतका के पिता नवनिधि शर्मा ने मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई सी. पटेल (Mangubhai C. Patel) को एक तत्काल प्रतिनिधित्व (Urgent Representation) सौंपा है. इस पत्र में उन्होंने ट्विशा की सास और मामले की मुख्य आरोपी गिरिबाला सिंह (Giribala Singh) के शक्तिशाली प्रशासनिक और न्यायिक रसूख का हवाला देते हुए निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की गुहार लगाई है. यह भी पढ़ें: Twisha Sharma Case: 'मैं फंस गई हूं', मौत से पहले पूर्व मिस पुणे त्विषा शर्मा का आखिरी चैट आया सामने, परिवार ने लगाया सबूत मिटाने का आरोप

आरोपी सास के निलंबन की मांग

राज्यपाल को भेजे गए पत्र में नवनिधि शर्मा ने उल्लेख किया है कि गिरिबाला सिंह राज्य की एक पूर्व वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी रही हैं. इसके साथ ही, वे वर्तमान में मध्य प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Consumer Disputes Redressal Commission) में एक प्रमुख अर्ध-न्यायिक (Quasi-Judicial) पद पर कार्यरत हैं. पीड़ित परिवार ने अपील की है कि जब तक इस आपराधिक मामले की जांच चल रही है, तब तक प्रशासनिक समीक्षा करते हुए गिरिबाला सिंह को उनके न्यायिक कर्तव्यों से तुरंत हटाया या निलंबित किया जाए.

जांच प्रभावित होने की आशंका

पीड़ित परिवार ने स्पष्ट किया कि उनका इरादा न्यायपालिका की छवि को धूमिल करना नहीं है, बल्कि उन्हें वास्तविक रूप से यह आशंका है कि सार्वजनिक पद पर गिरिबाला सिंह की निरंतर उपस्थिति स्थानीय पुलिस, गवाहों के बयानों और मेडिको-लीगल फॉरेंसिक प्रक्रियाओं पर एक अप्रत्यक्ष संस्थागत प्रभाव डाल सकती है.

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का हवाला देते हुए याचिका में रेखांकित किया गया है कि एक पारदर्शी और स्वतंत्र जांच प्राप्त करना उनका मौलिक अधिकार है. परिवार का कहना है कि न्यायिक प्रणाली में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए इस मामले को किसी भी संस्थागत पूर्वाग्रह या प्रभाव से दूर रखना बेहद जरूरी है.

क्या है पूरा मामला?

गौरतलब है कि 12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में स्थित सास गिरिबाला सिंह के आवासीय परिसर में ट्विशा का शव फंदे से लटका हुआ मिला था. घटना के बाद, कटारा हिल्स पुलिस स्टेशन ने 15 मई को एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की, जिसमें त्विषा के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह को मुख्य आरोपी बनाया गया है.

पुलिस ने यह आपराधिक मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 80(2), 85, और 3(5) के साथ-साथ दहेज निषेध अधिनियम, 1961 की धारा 3 और 4 के तहत दर्ज किया है.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बढ़ाई गंभीरता

शुरुआती पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 9 दिसंबर 2025 को हुई शादी के बाद से ही त्विषा को लगातार दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था और उसे मानसिक व शारीरिक रूप से टॉर्चर किया जा रहा था. मामले की गंभीरता को बढ़ाते हुए, अनंतिम (Provisional) पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण फांसी लगाना बताया गया है, लेकिन इसके साथ ही त्विषा के शरीर के अन्य हिस्सों पर किसी कुंद वस्तु (Blunt Force) से लगी मृत्यु-पूर्व की कई चोटों का भी स्पष्ट जिक्र किया गया है.

(The above story first appeared on LatestLY on May 18, 2026 05:42 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).