Mumbai Dowry Cases Rise: मुंबई में दहेज उत्पीड़न के मामलों में बढ़ोतरी, 2026 के शुरुआती तीन महीनों में 124 केस दर्ज
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Mumbai Dowry Cases Rise: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में साल 2026 के शुरुआती तीन महीनों में दहेज के लिए महिलाओं को प्रताड़ित करने के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है. मुंबई पुलिस द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक दहेज की मांग को लेकर शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के कुल 124 मामले दर्ज किए गए हैं. पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 120 था. हालांकि, राहत की बात यह है कि पुलिस इन मामलों की जांच और अपराधियों को पकड़ने (डिटेक्शन) में अधिक तत्परता दिखा रही है.

दहेज के कारण एक महिला की मौत, दो ने की आत्महत्या

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इस साल अब तक भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80(2) के तहत दहेज हत्या का एक मामला दर्ज किया गया है, जो पिछले साल के बराबर ही है. इसके अलावा, दहेज उत्पीड़न से तंग आकर दो महिलाओं द्वारा आत्महत्या करने की दुखद घटनाएं सामने आई हैं, जबकि साल 2025 की समान अवधि में ऐसी 5 घटनाएं दर्ज की गई थीं.  यह भी पढ़े:  Mumbai Crime News: मुंबई के दहिसर में 12 साल के बच्चे ने खिलौना समझकर चला दी पिस्तौल, फिर ऐसे खुला महिला के आपराधिक इतिहास का राज

दहेज के इतर अन्य पारिवारिक कारणों से होने वाले घरेलू उत्पीड़न के मामलों की बात करें, तो इस साल मार्च तक 110 मामले दर्ज किए गए हैं. पिछले साल यह आंकड़ा 134 था, जिससे अन्य घरेलू विवादों में थोड़ी कमी देखी गई है.

पुलिस की 'डिटेक्शन रेट' में हुआ उल्लेखनीय सुधार

मुंबई पुलिस के आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि इस साल दर्ज अपराधों को सुलझाने में पुलिस ने बेहतर प्रदर्शन किया है. दहेज उत्पीड़न के दर्ज 124 मामलों में से पुलिस 103 मामलों को डिटेक्ट (सुलझाना या आरोपियों की पहचान) करने में सफल रही है. इसी तरह, अन्य कारणों से जुड़े घरेलू दुर्व्यवहार के 110 मामलों में से 91 मामलों की जांच में पुलिस ने महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है.

हर वर्ग की महिलाएं प्रभावित

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस गंभीर समस्या से समाज का हर तबका प्रभावित है. पीड़ित महिलाएं समृद्ध इलाकों से लेकर स्लम बस्तियों तक, हर वर्ग से ताल्लुक रखती हैं. पुलिस जांच में सामने आया है कि प्रताड़ना की मुख्य वजहें दहेज से असंतुष्टि, मायके से पैसे लाने का दबाव, रंग-रूप को लेकर विवाद और आपसी पारिवारिक कलह हैं. हालांकि, कई महिलाएं आज भी सामाजिक बदनामी और सहयोग की कमी के डर से चुपचाप इस जुल्म को सहती रहती हैं.

कड़े कानून और जन जागरूकता की आवश्यकता

ये आंकड़े साफ तौर पर संकेत देते हैं कि समाज से दहेज और घरेलू हिंसा जैसी कुप्रथाओं को मिटाने के लिए सख्त कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ पीड़ितों के लिए बेहतर काउंसलिंग और मजबूत सपोर्ट सिस्टम की बेहद जरूरत है. पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस दिशा में सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाकर ही महिलाओं के खिलाफ होने वाले इन अपराधों पर लगाम लगाई जा सकती है.

अपराध और पुलिस कार्रवाई का तुलनात्मक विवरण (31 मार्च तक):

अपराध की श्रेणी (संबंधित कानूनी धाराएं) वर्ष 2026 (31 मार्च तक) वर्ष 2025 (31 मार्च तक)
दहेज संबंधी हत्या (BNS धारा 103(1) / IPC धारा 302) 00 00
दहेज मृत्यु (BNS धारा 80(2) / IPC धारा 304-B) 01 01
दहेज के कारण आत्महत्या (BNS धारा 108 / IPC धारा 306) 02 05
दहेज जनित शारीरिक/मानसिक उत्पीड़न (BNS धारा 85 / IPC धारा 498-A) 124 दर्ज, 103 सुलझे 120 दर्ज, 82 सुलझे
अन्य कारणों से शारीरिक/मानसिक उत्पीड़न (BNS धारा 85 / IPC धारा 498-A)