वसई के पास मुंबई-अहमदाबाद नेशनल हाईवे (NH-48) पर गुरुवार को भारी ट्रैफिक जाम ने एक मासूम की जिंदगी छीन ली. 1.8 साल का एक बच्चा 15 फीट की ऊंचाई से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया था. शुरुआत में बच्चा होश में था और उसे वसई के गैलेक्सी अस्पताल ले जाया गया. डॉक्टरों ने तुरंत सीटी स्कैन की सलाह दी ताकि आंतरिक चोटों का पता लगाया जा सके.
डॉ. समीक्षा ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अस्पताल तक पहुंचने का 20 मिनट का रास्ता 4-5 घंटे में तय हुआ. हाईवे पर रोजाना लगने वाला जाम उस दिन भी यातायात रोक चुका था. जैसे-जैसे बच्चे की हालत बिगड़ती गई, उसका चाचा उसे गोद में लेकर मदद मांगता रहा. इसी बीच एक अनजान शख्स ने बाइक से मदद की और क्लिनिक तक पहुंचाया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी.
समय पर अस्पताल न पहुंच पाने से गई बच्चे की जान
NH48 traffic and Ghodbunder Road potholes took another life 💔
What should have been a 30-min hospital journey turned into 4–5 hours of nightmare on jammed roads of NH48
This is a reminder that until there is accountability, our roads will keep killing silently.@MBVVPOLICE pic.twitter.com/kzg8vpVu9p
— Gems of Mira Bhayandar (@GemsOfMBMC) September 19, 2025
डॉक्टर का दर्द: "हम कुछ नहीं कर पाए"
डॉ. समीक्षा ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, “हमने पूरी कोशिश की, सीपीआर भी दिया, लेकिन बच्चे की जान नहीं बचा पाए. यह मौत मेडिकल सुविधा की कमी से नहीं, बल्कि घंटों के ट्रैफिक जाम के कारण हुई.” उनका पोस्ट अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और लोगों में गुस्सा और दुख दोनों है.
ट्रैफिक किसकी गलती?
डॉ. समीक्षा ने पोस्ट में लिखा, “दिन में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक के बावजूद, हाईवे पर ट्रक और बड़े वाहन भरे हुए थे, जिससे जाम लगा. किसे दोष दें सरकार, नेता, लालची राजनेता या भ्रष्ट ट्रैफिक और पुलिस अधिकारी?”













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