Karnataka Temple New Rules: कर्नाटक के मंदिरों में 'रील' बनाने पर लगाम, सरकार ने लागू किए सख्त नियम; अब वीडियोग्राफी के लिए देनी होगी भारी फीस
कर्नाटक सरकार ने मंदिरों की पवित्रता बनाए रखने के लिए परिसर में रील, फिल्म और डॉक्यूमेंट्री की शूटिंग पर सख्त प्रतिबंध लगा दिए हैं. अब ‘A’ और ‘B’ श्रेणी के मंदिरों में शूटिंग के लिए अनुमति और निर्धारित शुल्क अनिवार्य कर दिया गया है.
Karnataka Temple New Rules: कर्नाटक सरकार (Karnataka Government) ने मंदिरों की धार्मिक गरिमा और अनुशासन को सुरक्षित रखने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. मुजराई विभाग (Muzrai Department) ने शुक्रवार, 20 फरवरी को एक नया निर्देश जारी किया है, जिसके तहत मंदिर परिसरों में सोशल मीडिया रील्स (Social Media Reels), फिल्मों और डॉक्यूमेंट्री की शूटिंग के लिए कड़े नियम लागू कर दिए गए हैं. अब किसी भी तरह की प्रोफेशनल शूटिंग के लिए पहले से अनुमति लेना और निर्धारित शुल्क जमा करना अनिवार्य होगा. यह भी पढ़ें: Bengaluru Horror: कर्ज के चलते 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला की हत्या, लकवाग्रस्त पति के सामने 65 लाख का सोना लूटा
'रील कल्चर' पर सरकार की सख्ती
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि बिना अनुमति के वीडियो रिकॉर्ड करने पर उपकरण जब्त कर लिए जाएंगे और रिकॉर्ड की गई सामग्री को मौके पर ही डिलीट कर दिया जाएगा. यह निर्णय हाल के दिनों में इंस्टाग्राम और यूट्यूब इन्फ्लुएंसर्स द्वारा पूजा अनुष्ठानों और संवेदनशील क्षेत्रों में अनियंत्रित वीडियोग्राफी की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए लिया गया है. प्रशासन का मानना है कि इससे भक्तों की एकाग्रता और मंदिर के वातावरण में खलल पड़ता है.
नई फीस संरचना और वर्गीकरण
मुजराई विभाग ने स्थान और शूटिंग की प्रकृति के आधार पर एक स्पष्ट शुल्क ढांचा तैयार किया है:
- फिल्म शूटिंग: बेंगलुरु शहर के मंदिरों के लिए 15,000 रुपये प्रति दिन और अन्य क्षेत्रों के लिए 10,000 रुपये प्रति दिन.
- टीवी सीरियल और डॉक्यूमेंट्री: पूरे राज्य में 5,000 रुपये प्रति दिन की फ्लैट दर.
- न्यूज चैनल: 5 मिनट से अधिक की विशेष रिपोर्ट के लिए प्रति घंटा शुल्क लगेगा, जबकि 5 मिनट से कम के फुटेज के लिए 250 रुपये का मामूली शुल्क देना होगा.
ये नियम मुख्य रूप से राज्य के 205 "A" ग्रेड मंदिरों (25 लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय) और 193 'B' ग्रेड मंदिरों (5 लाख से 25 लाख रुपये के बीच आय) पर लागू होंगे.
गर्भगृह में वीडियोग्राफी पर पूर्ण प्रतिबंध
विभाग द्वारा जारी 15-सूत्रीय गाइडलाइंस के तहत कुछ क्षेत्रों को पूरी तरह से 'नो कैमरा ज़ोन' घोषित किया गया है. फीस देने के बावजूद गर्भगृह (Sanctum Sanctorum) के अंदर फिल्म बनाना या मुख्य देवता (मूल विग्रह) की तस्वीरें लेना सख्त वर्जित है. इसके अलावा, अनुमति प्राप्त करने वाले व्यक्तियों को पारंपरिक ड्रेस कोड का पालन करना होगा और मंदिर की स्थानीय परंपराओं का सम्मान करना होगा. यह भी पढ़ें: Kerala Shocker: केरल में प्रशासनिक लापरवाही ने ली जान, इडुक्की में सड़क किनारे खुले गड्ढे में गिरने से 27 वर्षीय युवक की मौत
उद्देश्य: मंदिरों को 'डिजिटल बैकड्रॉप' बनने से रोकना
मुजराई कमिश्नर बी. शरथ ने जोर देकर कहा कि मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ‘रील का पागलपन’ श्रद्धालुओं के आध्यात्मिक अनुभव में बाधा न बने. उन्होंने कार्यकारी अधिकारियों को उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने का अधिकार दिया है.
कर्नाटक का मुजराई विभाग राज्य के 34,500 से अधिक मंदिरों का प्रबंधन करता है. यह नया नियम मंदिर प्रबंधन के आधुनिकीकरण और प्राचीन विरासत के संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की एक कड़ी है. इससे पहले, अगस्त 2025 में मंदिरों में प्लास्टिक पर भी प्रतिबंध लगाया गया था.