पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की 100वीं जयंती: पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि, बताया लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पित 'जननेता'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Photo Credits: IANS)

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने शुक्रवार को पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की 100वीं जयंती (100th Birth Anniversary of Former Prime Minister Chandrashekhar) के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. प्रधानमंत्री ने उन्हें एक ऐसा 'जननेता' बताया जो अपने साहस, दृढ़ विश्वास और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते थे.  पीएम मोदी (PM Modi) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया कि यह वर्ष चंद्रशेखर जी की जन्मशती के रूप में मनाया जा रहा है, जो उनके समृद्ध और न्यायपूर्ण भारत के दृष्टिकोण को साकार करने के संकल्प को दोहराने का समय है. यह भी पढ़ें: Women Reservation Bill 2026: महिला आरक्षण बिल भारतीय राजनीति की 'दशा और दिशा' बदल देगा; प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Watch Video)

"साधारण नागरिकों की आकांक्षाओं के प्रति संवेदनशील"

प्रधानमंत्री ने चंद्रशेखर जी के व्यक्तित्व की सराहना करते हुए कहा कि वह भारत की मिट्टी से गहराई से जुड़े हुए थे और आम नागरिकों की समस्याओं व आकांक्षाओं को बखूबी समझते थे. पीएम ने कहा, "उन्होंने सार्वजनिक जीवन में सादगी और स्पष्टता को प्राथमिकता दी." मोदी ने अपनी व्यक्तिगत मुलाकातों को याद करते हुए युवाओं से आह्वान किया कि वे भारत की प्रगति के लिए चंद्रशेखर जी के विचारों और उनके प्रयासों के बारे में विस्तार से पढ़ें.

बलिया से दिल्ली तक का राजनीतिक सफर

चंद्रशेखर का जन्म 17 अप्रैल, 1927 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के इब्राहिमपट्टी गांव में एक किसान परिवार में हुआ था. छात्र जीवन से ही वे राजनीति की ओर आकर्षित हुए और अपनी क्रांतिकारी सोच व आदर्शवाद के लिए जाने गए. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए करने के बाद, वे समाजवादी आंदोलन से जुड़े और आचार्य नरेंद्र देव जैसे दिग्गजों के साथ काम किया.

वे 1977 से 1988 तक जनता पार्टी के अध्यक्ष रहे और दशकों तक भारतीय राजनीति के केंद्र में रहे. राज्यसभा और लोकसभा के सदस्य के रूप में, उन्होंने हमेशा दबे-कुचले वर्गों की आवाज उठाई और तीव्र सामाजिक परिवर्तन के पक्षधर रहे.

आपातकाल के दौरान साहस और ऐतिहासिक पदयात्रा

एक कांग्रेसी नेता होने के बावजूद, 25 जून 1975 को आपातकाल की घोषणा के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। यह उनकी स्पष्टवादिता और सिद्धांतों के प्रति अडिग रहने का प्रमाण था.

उनके जीवन का सबसे उल्लेखनीय अध्याय 1983 की उनकी देशव्यापी 'पदयात्रा' रही. 6 जनवरी से 25 जून 1983 तक उन्होंने कन्याकुमारी से दिल्ली के राजघाट तक लगभग 4,260 किलोमीटर की पैदल यात्रा की. इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य जनता से सीधे जुड़ना और उनकी समस्याओं को जमीनी स्तर पर समझना था.

ग्रामीण भारत के विकास के लिए भारत यात्रा केंद्र

जमीनी स्तर पर बदलाव लाने के लिए, चंद्रशेखर ने देश के विभिन्न राज्यों (केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश और हरियाणा) में लगभग पंद्रह 'भारत यात्रा केंद्र' स्थापित किए. इन केंद्रों का उद्देश्य पिछड़े क्षेत्रों में सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करना और जन शिक्षा के माध्यम से विकास को गति देना था. उनकी विरासत आज भी भारतीय राजनीति में सादगी और जनसेवा के प्रतीक के रूप में जीवित है.