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El Nino Risk: मानसून 2026 पर अल नीनो का साया, भारत में इस साल सामान्य से कम बारिश का अनुमान, खेती और अर्थव्यवस्था पर बढ़ सकता है दबाव

निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट ने साल 2026 के लिए मानसून का पूर्वानुमान जारी किया है. अल नीनो के प्रभाव के कारण इस वर्ष बारिश सामान्य से कम (94%) रहने की संभावना है, जिससे खरीफ फसलों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतियां पैदा हो सकती हैं.

El Nino Risk: मानसून 2026 पर अल नीनो का साया, भारत में इस साल सामान्य से कम बारिश का अनुमान, खेती और अर्थव्यवस्था पर बढ़ सकता है दबाव
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: Pixabay)

नई दिल्ली: देश के विभिन्न हिस्सों में चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी से लोग काफी परेशान नजर आ रहे हैं. गर्मी से निजात पाने के लिए लोगों को मानसून का बेसब्री से इंतजार रहता है. भारत में साल 2026 का मानसून (Monsoon 2026) उम्मीद से कमजोर रह सकता है. निजी मौसम पूर्वानुमान  एजेंसी (Private Weather Forecast Agency) 'स्काईमेट वेदर' (Skymet Weather) के अनुसार, इस साल मानसूनी बारिश लंबी अवधि (Long-Duration Monsoon Rainfall) के औसत (LPA) का 94% रहने का अनुमान है. इस संभावित कमी का मुख्य कारण प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में सक्रिय होता 'अल नीनो' (El Niño) प्रभाव माना जा रहा है, जो अक्सर भारतीय मानसून को कमजोर करने के लिए जिम्मेदार होता है. यह भी पढ़ें: Tamil Nadu Weather Update: तमिलनाडु में बदला मौसम का मिजाज, कई जिलों में बारिश, प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक गरज-चमक के साथ बौछारों के आसार

सूखे की आशंका और मासिक वितरण 

स्काईमेट ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि जून से सितंबर के बीच कुल वर्षा लगभग 817 मिमी रहने की उम्मीद है. एजेंसी ने इस साल 30% सूखे की संभावना और 40% संभावना जताई है कि बारिश सामान्य से कम रहेगी। मानसून के मासिक वितरण पर नजर डालें तो स्थिति और भी चिंताजनक लगती है:

  • जून: शुरुआत अच्छी होने की उम्मीद है (LPA का 101%).
  • जुलाई: बारिश घटकर 95% रह सकती है.
  • अगस्त: केवल 92% बारिश का अनुमान है.
  • सितंबर: सबसे कम 89% बारिश की संभावना है.

खेती और बिजली क्षेत्र पर असर

जुलाई और अगस्त के महीने चावल, दालों और तिलहन जैसी खरीफ फसलों की बुवाई के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं. इन महीनों में बारिश की कमी से कृषि उत्पादन गिर सकता है, जिससे खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं और ग्रामीण इलाकों में आर्थिक संकट पैदा हो सकता है.

स्काईमेट के प्रबंध निदेशक जतिन सिंह के अनुसार, 'यदि मानसून कमजोर रहा तो इस साल ग्रामीण संकट की काफी संभावना है. इसके साथ ही बिजली क्षेत्र (Power Sector) पर भी दबाव बना रह सकता है.'

क्षेत्रवार वर्षा का अनुमान

बारिश का वितरण पूरे देश में असमान रहने के आसार हैं। जून में गंगा के मैदानी इलाकों और पश्चिमी घाटों में अच्छी बारिश हो सकती है. हालांकि, जुलाई और अगस्त में उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत में भारी कमी देखी जा सकती है. सितंबर तक दक्षिण और पूर्व भारत के केवल कुछ ही हिस्सों में सामान्य बारिश की उम्मीद है, जबकि देश का अधिकांश हिस्सा शुष्क रह सकता है.

सर्दियों की बारिश और रबी फसलों का महत्व

दक्षिण-पश्चिम मानसून के बाद, अक्टूबर से दिसंबर तक होने वाला उत्तर-पूर्वी मानसून तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के लिए जल का प्रमुख स्रोत होगा. इसके साथ ही, उत्तर भारत में गेहूं जैसी रबी फसलों के लिए 'पश्चिमी विक्षोभ' (Western Disturbances) से होने वाली सर्दियों की बारिश पर निर्भरता बढ़ जाएगी. फिलहाल सभी की नजरें भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आधिकारिक पूर्वानुमान पर टिकी हैं, जो इसी महीने जारी होने वाला है.

(The above story first appeared on LatestLY on Apr 09, 2026 01:08 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).