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Earthquake in Jammu-Kashmir: जम्मू-कश्मीर के डोडा में तड़के महसूस किए गए भूकंप के झटके, कोई नुकसान नहीं

रविवार, 12 अप्रैल, 2026 की सुबह जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में भूकंप के दो झटकों से धरती कांप उठी. नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, पहला झटका सुबह 4:22 बजे महसूस किया गया

Earthquake in Jammu-Kashmir: जम्मू-कश्मीर के डोडा में तड़के महसूस किए गए भूकंप के झटके, कोई नुकसान नहीं

Earthquake in Jammu-Kashmir: रविवार, 12 अप्रैल, 2026 की सुबह जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में भूकंप के दो झटकों से धरती कांप उठी. नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, पहला झटका सुबह 4:22 बजे महसूस किया गया, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.6 मापी गई. इसके मात्र 15 मिनट बाद, सुबह 4:37 बजे 3.0 तीव्रता का दूसरा झटका दर्ज किया गया. दोनों भूकंपों का केंद्र सतह से 10 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था.

हिमालयी बेल्ट की भौगोलिक संवेदनशीलता

डोडा जिला हिमालयी क्षेत्र का हिस्सा है, जो भूगर्भीय रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच निरंतर टकराव के कारण इस पूरे हिमालयी आर्क में भूकंप की गतिविधियां सामान्य हैं। डोडा के अलावा, किश्तवाड़ और भद्रवाह जैसे पड़ोसी जिले भी अक्सर इस तरह की भूकंपीय गतिविधियों का सामना करते हैं.  यह भी पढ़े:  Earthquake in Assam: असम के बराक घाटी में भूकंप के तेज झटके, सिलचर और आसपास के इलाकों में भी महसूस किए गए; तीव्रता 4.8 रही

जोन VI में शामिल है क्षेत्र

2025 के नवीनतम भूकंपीय वर्गीकरण और IS 1893 अर्थक्वेक डिजाइन कोड के अनुसार, हिमालयी बेल्ट को भारत के सबसे अधिक जोखिम वाले 'जोन VI' में रखा गया है। भारत का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा मध्यम से उच्च भूकंपीय जोखिम वाले क्षेत्रों में आता है। वैज्ञानिक इस क्षेत्र में बड़े भूकंप की संभावना के प्रति भी आगाह करते रहे हैं, जिससे बुनियादी ढांचे की मजबूती एक प्रमुख चिंता का विषय बनी हुई है.

आपदा प्रबंधन और सुरक्षा उपाय

लगातार होती भूकंपीय गतिविधियों को देखते हुए नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) और ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स ने भूकंप-रोधी निर्माण पर विशेष जोर दिया है। अधिकारियों ने आम नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है. महत्वपूर्ण सुझावों में शामिल हैं:

  • भूकंप-रोधी निर्माण तकनीकों को अपनाना.

  • प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (Early Warning Systems) को सुदृढ़ करना.

  • सार्वजनिक जागरूकता और सामुदायिक अभ्यास (Community Drills) में भाग लेना।

नागरिकों को किसी भी प्रकार की आधिकारिक जानकारी और रियल-टाइम अपडेट के लिए नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी की वेबसाइट या उनके मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करने की सलाह दी गई है। वर्तमान में क्षेत्र में स्थिति सामान्य है और किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है.

(The above story first appeared on LatestLY on Apr 12, 2026 09:46 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).