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Indore: इंदौर के हॉस्पिटल में महिला ने दिया दो सिर वाली बच्ची को जन्म, डॉक्टर भी हैरान, एक ही शरीर में धड़क रहे है दो दिल, VIDEO आया सामने

इंदौर में एक अनोखा मामला सामने आया है. जहांपर एक महिला ने ऐसी बच्ची को जन्म दिया. जिसके दो सिर है, लेकिन शरीर एक है.

Indore: इंदौर के हॉस्पिटल में महिला ने दिया दो सिर वाली बच्ची को जन्म, डॉक्टर भी हैरान, एक ही शरीर में धड़क रहे है दो दिल, VIDEO आया सामने
Credit-(X,@ntvtime1)

इंदौर, मध्य प्रदेश: इंदौर में एक अनोखा मामला सामने आया है. जहांपर एक महिला ने ऐसी बच्ची को जन्म दिया. जिसके दो सिर है, लेकिन शरीर एक है. इस घटना को लेकर डॉक्टर भी हैरान हो गए है. बच्चियों की हालत नाजुक बताई जा रही ही और इन्हें अब निगरानी में रखा गया है. बता दें की दुनिया में ऐसे बहुत से बच्चे है, जो जन्म से ही एक शरीर और दो सिर के साथ जन्म लेते है. इनमें से कई बच्चे बड़े भी हो जाते है. इसे मेडिकल की भाषा में 'पैरापैगस डिसेफेलिक ट्विन्स' कहा जाता है. जानकारी के मुताबिक़ जन्म देने वाली महिला मध्यप्रदेश के देवास जिले की निवासी है. उसने अपनी गर्भावस्था के दौरान चार बार प्रसवपूर्व जांच करवाई थी, लेकिन किसी भी जांच में भ्रूण की ये बात सामने नहीं आई.

जिसके कारण अब स्वास्थ सुविधाओं पर भी सवाल उठने लगे है. इस वीडियो को सोशल मीडिया X पर @ntvtime1 नाम के हैंडल से शेयर किया गया है. ये भी पढ़े:Baby Born With Two Heads: मध्यप्रदेश के रतलाम में दो सिर और तीन हाथ के साथ जन्मा दुर्लभ जुड़वा बच्चा

एक शरीर और दो सिर के साथ बच्ची ने लिया जन्म

डॉक्टरों ने सर्जरी कर बच्चियों का जन्म करवाया

गंभीर प्रसव पीड़ा के कारण महिला को देर रात इंदौर लाया गया. डॉक्टर्स की एक विशेषज्ञ टीम ने सर्जरी कर बच्चियों का जन्म कराया. जन्म के बाद दोनों बच्चियों को तुरंत स्पेशल न्यूबोर्न केयर यूनिट में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां उन्हें लगातार डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है.

दो सिर कर रहे हैं शरीर को नियंत्रित

डॉक्टरों की प्रारंभिक जांच के मुताबिक बच्चियों का एक ही शरीर है, लेकिन दोनों सिर सक्रिय हैं और शरीर के अलग-अलग हिस्सों को नियंत्रित कर रहे हैं. दाहिने सिर का नियंत्रण शरीर के दाहिने हिस्से पर है और बाएं सिर का नियंत्रण बाएं हिस्से पर. उनके पास एक हृदय और एक ही फेफड़े हैं, लेकिन आंतों का तंत्र अलग-अलग है.इस प्रकार के जन्मों में जीवित रहने की संभावना बेहद कम होती है. मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति में जीवन टिकाए रखना बहुत चुनौतीपूर्ण होता है. हालांकि अभी बच्चियों को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है और उपचार जारी है.

समय रहते जानकारी मिलती तो माता पिता ले सकते थे फैसला

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रारंभिक गर्भावस्था के दौरान उच्च गुणवत्ता की सोनोग्राफी की जाती, तो इसकी जानकारी मिल सकती थी. इससे माता-पिता और डॉक्टर दोनों समय रहते बेहतर निर्णय ले सकते थे. अधीक्षक डॉक्टर अनुपमा दवे के अनुसार, यह स्थिति तब होती है जब एक फ़र्टिलाइज्ड एग गर्भ में विभाजित होते समय पूरी तरह अलग नहीं हो पाता. परिणामस्वरूप दो भ्रूण आपस में जुड़े रहते हैं. यह कोई वंशानुगत रोग नहीं है, बल्कि प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया की एक दुर्लभ त्रुटि है.

 

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 25, 2025 05:50 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).