Doubt On Rape Story! नाबालिग से रेप के मामले में 7 आरोपी बरी, कोर्ट ने कहा- पीड़िता के आचरण से उसकी कहानी पर संदेह
अदालत ने 12 साल पहले एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार के सात आरोपियों को यह कहते हुए बरी कर दिया कि पीड़िता की कहानी संदिग्ध थी क्योंकि उसका व्यवहार "अप्राकृतिक और सामान्य मानवीय आचरण के बिल्कुल विपरीत" था.
कर्नाटक कोर्ट ने नाबालिग से बलात्कार के सात आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि पीड़िता के आचरण से उसकी कहानी पर संदेह होता है. अदालत ने हाल ही में बारह साल पहले एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार के सात आरोपियों को यह कहते हुए बरी कर दिया कि पीड़िता की कहानी संदिग्ध थी क्योंकि उसका व्यवहार "अप्राकृतिक और सामान्य मानवीय आचरण के बिल्कुल विपरीत" था.
विशेष न्यायाधीश केसी सदानंदस्वामी ने सुझाव दिया कि लड़की का व्यवहार ही उसके द्वारा पेश की गई कहानी पर संदेह करने का एक मजबूत कारण है. ये भी पढ़ें- Bihar: पॉलिटेक्निक की छात्रा के साथ दुष्कर्म, आरोपी गार्ड गिरफ्तार
राज्य के विशेष लोक अभियोजक ने तर्क दिया कि करीब दो सप्ताह की अवधि में, सात आरोपियों में से एक ने शिकायतकर्ता के साथ बलात्कार किया, उसके घर से पैसे और गहने चुराए, उसे बेंगलुरु में एक अन्य आरोपी के घर ले गया जहां उसने उसके साथ फिर से बलात्कार किया.
दूसरी ओर, आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि घटना फरवरी 2011 में हुई थी और शिकायत दर्ज करने के लिए झूठी कहानी बनाकर मई 2011 में शिकायत दर्ज की गई थी. इसके अलावा, उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता ने अपने माता-पिता को घटना के बारे में नहीं बताया था और तर्क दिया कि उसने स्वेच्छा से आरोपी के साथ यात्रा की थी.
Karnataka Court acquits seven men accused of raping minor, says survivor's conduct cast doubts on her storyhttps://t.co/4B2zIaxgoO
— Bar & Bench (@barandbench) November 14, 2023
आरोपियों ने आगे बताया कि उनके पास से कोई आभूषण या नकदी बरामद नहीं हुई. अदालत ने कहा कि जिस दिन शिकायतकर्ता को आरोपी ने वापस छोड़ दिया, वह पुलिस स्टेशन गई और अपराध की रिपोर्ट करने के बजाय, पुलिस को बताया कि उसके माता-पिता उसे एक रिश्तेदार से शादी करने के लिए मजबूर कर रहे थे.
अदालत ने यह भी पाया कि आरोपियों के पास से कोई आभूषण या नकदी बरामद नहीं हुई. यह भी पाया गया कि गवाहों ने अपने स्वयं के बयानों के विपरीत गवाही दी थी. शिकायतकर्ता के बयान के अनुसार, वह स्वेच्छा से एक व्यक्ति के स्थान पर रुकी थी. इसके अलावा, यह देखा गया कि लड़की बलात्कार का विरोध करने में सक्षम थी और अगर उसने ऐसा किया होता, तो यह बात मेडिकल रिपोर्ट में दिखाई देती, जबकि ऐसा नहीं हुआ.
इस प्रकार, न्यायालय ने अभियुक्तों की दलीलों में बल पाया कि अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे अभियुक्तों के अपराध को साबित करने में विफल रहा है. इसलिए, इसने सभी आरोपियों को बरी कर दिया.
(The above story first appeared on LatestLY on Nov 14, 2023 08:58 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

