बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी 'कर्नाटक सोप्स एंड डिटर्जेंट्स लिमिटेड' (Karnataka Soaps and Detergents Limited) (KSDL) ने मंगलवार, 10 फरवरी 2026 को आधिकारिक तौर पर अभिनेत्री तमन्ना भाटिया (Tamannaah Bhatia) के साथ अपने दो साल के जुड़ाव की शुरुआत की. प्रतिष्ठित 'मैसूर सैंडल सोप' (Mysore Sandal Soap) के नए लुक और रिलॉन्च के साथ शुरू हुई इस साझेदारी का उद्देश्य ब्रांड को वैश्विक स्तर पर ले जाना है. हालांकि, इस नियुक्ति ने क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और स्थानीय कन्नड़ प्रतिभाओं (Local Kannada Talent) की अनदेखी को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है. यह भी पढ़ें: Golmaal 5: क्या अमिताभ बच्चन की 'दो और दो पांच' की रीमेक है रोहित शेट्टी की फिल्म ‘गोलमाल 5’? निर्देशक ने तोड़ी चुप्पी
तमन्ना भाटिया और KSDL के बीच करोड़ों की डील
कर्नाटक सरकार ने अभिनेत्री तमन्ना भाटिया के साथ कथित तौर पर 6.2 करोड़ रुपये का करार किया है. यह कदम KSDL के टर्नओवर को तेजी से बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है. उद्योग मंत्री एम.बी. पाटिल ने इस मौके पर कहा कि सरकार का लक्ष्य 2030 तक कंपनी के राजस्व को 5,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाना है.
मंत्री पाटिल ने तमन्ना के चयन का बचाव करते हुए उनकी 'पैन-इंडिया अपील' और 3 करोड़ से अधिक सोशल मीडिया फॉलोअर्स का हवाला दिया. मंत्रालय के अनुसार, उत्तर भारत, यूरोप और पश्चिम एशिया जैसे बाजारों में पैठ बनाने के लिए तमन्ना जैसी वैश्विक पहचान वाली अभिनेत्री की उपस्थिति अनिवार्य है.
तमन्ना भाटिया मैसूर सैंडल सोप की ब्रांड एंबेसडर बनीं
ಶತಮಾನಕ್ಕೂ ಮೀರಿದ ಪರಂಪರೆ, ಭವಿಷ್ಯವನ್ನೇ ಗುರಿಯಾಗಿಟ್ಟ ದೃಢ ಸಂಕಲ್ಪ!
ನಾಲ್ವಡಿ ಕೃಷ್ಣರಾಜ ಒಡೆಯರ್- ಸರ್ ಎಂ. ವಿಶ್ವೇಶ್ವರಯ್ಯ ಮುಂತಾದ ಮಹನೀಯರ ದೂರದೃಷ್ಟಿಯಿಂದ ಹುಟ್ಟಿದ ಕೆ.ಎಸ್.ಡಿ.ಎಲ್ ಇಂದು ಹೊಸ ಯುಗಕ್ಕೆ ಕಾಲಿಡುತ್ತಿದೆ.
ಮೈಸೂರು ಸ್ಯಾಂಡಲ್ ಸೋಪ್ ಗೆ ನವೀನ ರೂಪ, ಉತ್ತರ ಭಾರತವನ್ನೂ ಮತ್ತಷ್ಟು ವ್ಯಾಪಕವಾಗಿ ತಲುಪುವ… pic.twitter.com/g9qBnZEBOF
— M B Patil (@MBPatil) February 10, 2026
स्थानीय कार्यकर्ताओं और संगठनों का विरोध
तमन्ना भाटिया की नियुक्ति की घोषणा के बाद से ही प्रो-कन्नड़ संगठनों और सांस्कृतिक हस्तियों ने इसका कड़ा विरोध किया है. 'कर्नाटक डिफेंस फोरम' जैसे संगठनों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए तर्क दिया कि 100 साल पुरानी विरासत वाले इस ब्रांड का प्रतिनिधित्व किसी कन्नड़ भाषी कलाकार को ही करना चाहिए.
आलोचकों का सवाल है कि इस भूमिका के लिए रुक्मिणी वसंत, श्रीनिधि शेट्टी या सप्तमी गौड़ा जैसे स्थानीय सितारों को क्यों नहीं चुना गया? यहां तक कि मैसूर शाही परिवार के यदुवीर वाडियार ने भी चिंता व्यक्त की है कि गैर-स्थानीय एंबेसडर चुनने से ब्रांड का राज्य के साथ सांस्कृतिक संबंध कमजोर हो सकता है. यह भी पढ़ें: ‘Ramayana’: 'रामायण' से रिप्लेसमेंट की खबरों पर विक्रांत मैसी का करारा जवाब, बोले- 'मैं कभी इस फिल्म का हिस्सा था ही नहीं'
'कन्नड़ गौरव' विवाद पर सरकार का स्पष्टीकरण
विरोध के जवाब में KSDL बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यह एक 'व्यावसायिक निर्णय है, सांस्कृतिक नहीं.' मंत्री एम.बी. पाटिल ने बताया कि विशेषज्ञों की एक समिति ने कई उम्मीदवारों का मूल्यांकन किया था.
उन्होंने यह भी खुलासा किया कि कन्नड़ फिल्म उद्योग के कई बड़े सितारे प्रतिस्पर्धी ब्रांडों के साथ पहले से अनुबंध में होने के कारण इस डील के लिए उपलब्ध नहीं थे. सरकार का मानना है कि ब्रांड को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए यह रणनीतिक बदलाव आवश्यक है.












QuickLY