Ethanol in Petrol: सरकार पेट्रोल में 20% इथेनॉल क्यों मिला रही है, क्या ये बेहद जरूरी है? पुरानी गाड़ियों के माइलेज को लेकर आया बयान

E20 Fuel Mileage: भारत सरकार का 2030 तक पेट्रोल में 20% इथेनॉल (Ethanol in Petrol) मिलाने का लक्ष्य 2025 में ही पूरा हो गया है. 2023 से बेची जा रही BS6 फेज-2 गाड़ियां  E20 पेट्रोल के लिए पूरी तरह से सक्षम हैं, क्योंकि ये वाहन इसी मिश्रित ईंधन के लिए डिजाइन किए गए हैं. लेकिन पुराने BS3 और BS4 वाहनों में समस्या आ रही है. ये वाहन E20 ईंधन के अनुकूल नहीं हैं, जिससे इंजन और ईंधन प्रणाली (Engine and Fuel System) को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ रहा है. ऑटोमोटिव इंजीनियरों का कहना है कि ऐसे वाहनों में गैस्केट, रबर पाइप और होज जल्दी खराब हो सकते हैं.

इसके साथ ही E20 ईंधन के इस्तेमाल से वाहनों के माइलेज में 2-5 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है. यह गिरावट मुख्य रूप से इथेनॉल के कैलोरी मान के पेट्रोल से कम होने के कारण है.

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तेल मंत्रालय ने दिया स्पष्टीकरण

तेल मंत्रालय (Ministry of Oil) ने इस महीने स्पष्ट किया कि E20 के कारण ईंधन दक्षता (Fuel Efficiency) में 'भारी' कमी की खबरें सही नहीं हैं. मंत्रालय के अनुसार, E10 वाहनों में माइलेज पर प्रभाव नगण्य है और कई वाहन निर्माता 2009 से अपनी कारों को E20 के अनुकूल बना रहे हैं. मंत्रालय ने यह भी कहा कि E20 ईंधन वाहनों के त्वरण को बेहतर बनाता है, जो शहरों में ड्राइविंग के दौरान महत्वपूर्ण है. इथेनॉल की उच्च वाष्पीकरण ऊष्मा, इनटेक मैनिफोल्ड तापमान को कम करती है, जिससे वायु-ईंधन मिश्रण का घनत्व बढ़ता है और आयतन दक्षता में सुधार होता है.

4 अगस्त को, मंत्रालय ने कहा कि E10 डिजाइन वाले वाहनों (Vehicles with E10 Design) में माइलेज में केवल 1-2 प्रतिशत की मामूली गिरावट आ सकती है, जबकि अन्य वाहनों में यह 3-6 प्रतिशत तक हो सकती है.

ऑटोमोबाइल कंपनियों की प्रतिक्रिया

मारुति सुजुकी और हुंडई (Maruti Suzuki and Hyundai) जैसी प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की, जबकि टाटा मोटर्स ने कहा कि उनके वाहन E20 के अनुकूल हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि E20 के अनुकूल वाहनों के इंजन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन गैर-संगत वाहनों को लंबे समय में नुकसान का खतरा हो सकता है.

पेट्रोल में इथेनॉल क्यों मिला रही सरकार?

सरकार का लक्ष्य पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाकर न केवल प्रदूषण कम करना है, बल्कि किसानों की आय में भी सुधार करना है. इस कदम को देश में ऊर्जा सुरक्षा और हरित ईंधन की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है.

इस बदलाव के साथ, वाहन मालिकों को अपने वाहनों की अनुकूलता की जांच करनी होगी और आवश्यकतानुसार पुराने वाहनों में अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी, ताकि आगे चलकर कोई नुकसान न हो.