E20 Petrol Mileage: इथेनॉल वाले पेट्रोल पर बवाल! क्या सच में यह आपकी गाड़ी का माइलेज घटा रहा है?

Ethanol Blended Petrol: आजकल सड़कों पर और सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ी हुई है - E20 पेट्रोल. जब सरकार ने 2023 में इसे लॉन्च किया, तो बड़े-बड़े दावे किए गए. कहा गया कि इससे प्रदूषण (CO2) कम होगा और गाड़ी का इंजन पहले से बेहतर चलेगा. लेकिन अब कई कार मालिक शिकायत कर रहे हैं कि E20 पेट्रोल डलवाने के बाद उनकी गाड़ी का माइलेज काफ़ी गिर गया है.

लोगों की शिकायतें क्या हैं?

सोशल मीडिया पर कई लोगों ने अपनी आपबीती सुनाई है. प्रमोद जोशी नाम के एक शख्स ने X (पहले ट्विटर) पर लिखा कि उनकी फॉक्सवैगन वेंटो कार जो पहले 10 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती थी, E20 पेट्रोल डालने के बाद सीधे 6.3 किलोमीटर प्रति लीटर पर आ गई. उन्होंने बताया कि पहले उनकी कार ने कभी भी 8 किलोमीटर प्रति लीटर से कम का माइलेज नहीं दिया था.

एक और यूज़र ने लिखा कि दुनिया में भारत ही अकेला ऐसा देश है जो उन गाड़ियों में भी E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर जोर दे रहा है जो इसके लिए बनी ही नहीं हैं. उनका कहना है कि E20 पेट्रोल न सिर्फ़ माइलेज घटाता है, बल्कि इंजन को भी नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे गाड़ी की उम्र कम हो सकती है.

सरकार का क्या कहना है?

इन शिकायतों के जवाब में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भी अपना पक्ष रखा है. सरकार का कहना है कि माइलेज में भारी गिरावट की बातें सही नहीं हैं और इनके पीछे कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं है.

हालांकि, मंत्रालय ने यह ज़रूर माना है कि E20 फ्यूल से माइलेज में थोड़ी कमी आ सकती है. उनके मुताबिक:

  • चार पहिया वाहनों (Four-wheelers) में 1 से 2 प्रतिशत की कमी.
  • दो पहिया वाहनों (Two-wheelers) में 3 से 6 प्रतिशत की कमी.

सरकार का कहना है कि अगर किसी की गाड़ी के माइलेज में इससे ज़्यादा गिरावट आ रही है, तो उन्हें अपनी गाड़ी की जांच करानी चाहिए. सरकार ने सलाह दी है कि पुरानी गाड़ियों में E20 फ्यूल के साथ संगत (compatible) पार्ट्स का इस्तेमाल करें और 20,000-30,000 किलोमीटर चलने के बाद रबर के पुराने पुर्जों को बदलवा लें.

तो फिर E20 पेट्रोल के फ़ायदे क्या हैं?

अब सवाल उठता है कि अगर माइलेज थोड़ा घटता है, तो सरकार इसे क्यों बढ़ावा दे रही है. इसके पीछे कुछ तकनीकी कारण हैं:

  1. हाई ऑक्टेन नंबर: आसान भाषा में समझें तो ऑक्टेन नंबर जितना ज़्यादा होता है, इंजन उतना ही स्मूथ चलता है और नॉकिंग (खट-खट की आवाज़) कम करता है. इथेनॉल का ऑक्टेन नंबर (108.5) साधारण पेट्रोल (84.4) से बहुत ज़्यादा होता है. जब इन्हें मिलाया जाता है, तो E20 पेट्रोल का ऑक्टेन नंबर भी बढ़ जाता है, जो आजकल की नई और पावरफुल गाड़ियों के लिए बहुत अच्छा है. इससे गाड़ी चलाने का अनुभव बेहतर होता है.
  2. इंजन को ठंडा रखता है: इथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में ज़्यादा ठंडक देने की क्षमता होती है. जब यह इंजन में जाता है, तो उसे ठंडा रखता है. इससे इंजन के अंदर हवा और फ्यूल का मिक्सचर ज़्यादा मात्रा में पहुंचता है, जिससे इंजन की क्षमता बढ़ती है और गाड़ी को बेहतर पावर मिलती है.

इस पूरे मामले का सार यह है कि E20 पेट्रोल भविष्य का फ्यूल है, जिसे पर्यावरण को ध्यान में रखकर बनाया गया है. जो गाड़ियां नई हैं और E20 के हिसाब से बनी हैं, उनमें परफॉर्मेंस बेहतर हो सकती है.

लेकिन, पुरानी गाड़ियों के मालिकों की चिंता भी जायज़ है. अगर आपकी गाड़ी पुरानी है, तो E20 डलवाने पर माइलेज में थोड़ी गिरावट आ सकती है. सरकार की सलाह के अनुसार, गाड़ी की सही देखरेख और पुराने रबर पार्ट्स को समय पर बदलवाने से इस समस्या को कम किया जा सकता है. यह कहना कि E20 पेट्रोल पूरी तरह से विलेन है, गलत होगा. लेकिन यह भी सच है कि पुरानी गाड़ियों पर इसके असर को लेकर लोगों को और ज़्यादा जानकारी देने की ज़रूरत है.