Ethanol Blending Policy: आजकल पेट्रोल-डीजल में एथेनॉल मिलाने वाली पॉलिसी पर बहस छिड़ी हुई है. कांग्रेस के मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने सरकार पर कुछ कड़े सवाल दागे हैं. ये सवाल किसानों के फायदे से लेकर भ्रष्टाचार तक को छूते हैं.
पहला सवाल: एथेनॉल से देश के किसानों को कितना फायदा हुआ?
सरकार कहती है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग से किसानों को बड़ा फायदा हो रहा है. जैसे, पिछले 10 सालों में इथेनॉल उत्पादन बढ़ने से किसानों को 1 लाख 4 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की अतिरिक्त कमाई हुई है. गन्ना और मक्का किसानों को ज्यादा दाम मिल रहे हैं, क्योंकि इथेनॉल बनाने के लिए इनकी जरूरत पड़ती है. आज करीब 50% इथेनॉल मक्के से बन रहा है. इससे CO2 उत्सर्जन भी कम हुआ है, लगभग 626 लाख मीट्रिक टन. सरकार का दावा है कि ये पॉलिसी किसानों को 'अन्नदाता' से 'ऊर्जादाता' बना रही है.
लेकिन कांग्रेस पूछ रही है कि असली फायदा कितना पहुंचा?
क्या ये सिर्फ बड़े मिल मालिकों तक सिमट गया, या छोटे किसानों को भी मिला? कई लोग कहते हैं कि गन्ने की ज्यादा खेती से पानी की कमी वाले इलाकों में किसान परेशान हैं, और असली मुनाफा कंपनियों की जेब में जा रहा है.
दूसरा सवाल: एथेनॉल मिश्रण के बाद भी महंगा पेट्रोल-डीजल क्यों मिल रहा है?
ये सवाल हर आम आदमी की जुबान पर है. सरकार ने E20 पॉलिसी लाई, मतलब पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाना. दावा था कि इससे क्रूड ऑयल का आयात कम होगा, और कीमतें घटेंगी. रूस से सस्ता तेल आने के बावजूद भी कीमतें नहीं घटीं. उल्टा, लोगों की शिकायत है कि E20 से गाड़ियों की माइलेज 6-15% तक कम हो गई, इंजन में जंग लग रही है, और पुरानी गाड़ियां जल्दी खराब हो रही हैं.
हमारे सवाल:
• एथेनॉल से देश के किसानों को कितना फायदा हुआ?
• एथेनॉल मिश्रण के बाद भी महंगा पेट्रोल-डीजल क्यों मिल रहा है?
• अगर E20 को बढ़ावा देना पब्लिक पॉलिसी है तो इसका फायदा सिर्फ नितिन गडकरी के बेटों को ही क्यों मिला?
• नरेंद्र मोदी करप्शन पर 'जीरो टॉलरेंस' की… pic.twitter.com/VBwmENdjZs
— Congress (@INCIndia) September 4, 2025
इंश्योरेंस कंपनियां क्लेम रिजेक्ट कर रही हैं. शुद्ध पेट्रोल चाहिए तो प्रीमियम वाला लो, वरना E10 या E20 ही मिलेगा. कांग्रेस पूछ रही है कि सस्ते तेल से जो बचत हो रही, वो कहां जा रही? जनता को क्यों नहीं राहत? लगता है, फायदा कहीं और पॉकेट में जा रहा है.
तीसरा सवाल: अगर E20 को बढ़ावा देना पब्लिक पॉलिसी है तो इसका फायदा सिर्फ नितिन गडकरी के बेटों को ही क्यों मिला?
ये सबसे तीखा आरोप है. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी E20 पॉलिसी को जोर-शोर से प्रमोट कर रहे हैं. लेकिन उनके बेटों की कंपनियां – CIAN Agro (निखिल गडकरी) और Manas Agro (सारंग गडकरी) – एथेनॉल बनाती हैं. CIAN का राजस्व 2024 में 17 करोड़ था, जो 2025 में 511 करोड़ हो गया – मतलब 2900% से ज्यादा बढ़ोतरी!
देश को बताया गया कि रूस से सस्ता कच्चा तेल आ रहा है, लेकिन 👇
• जब रूस से सस्ता कच्चा तेल आया तो...
• वहां से मोदी जी के दोस्त की रिफाइनरी में गया
• फिर मोदी जी के भतीजों की कंपनी में गया, जहां एथेनॉल मिक्स हुआ • इसके बाद- दिल्ली में बैठे नरेंद्र मोदी ने उस तेल में टैक्स… pic.twitter.com/UX3rV7sVSR
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Manas का टर्नओवर 5990 करोड़ से 9591 करोड़ पहुंच गया. गडकरी परिवार की 17 चीनी मिलें एथेनॉल का बड़ा स्रोत हैं. सवाल ये कि क्या पॉलिसी जनता या परिवार के बिजनेस के लिए बनी? हितों का टकराव लगता है – मंत्री नीति बनाते हैं, और परिवार मुनाफा कमाता है. गडकरी कहते हैं कि कोई नुकसान नहीं, लेकिन जनता की गाड़ियां रो रही हैं.
चौथा सवाल: नरेंद्र मोदी करप्शन पर 'जीरो टॉलरेंस' की बात करते हैं, लेकिन क्या वो अपने भतीजों पर जांच बैठाएंगे?
मोदी जी हमेशा कहते हैं कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस. लेकिन कांग्रेस पूछ रही है कि क्या ये सिर्फ भाषण हैं? अगर E20 जैसी पॉलिसी से कुछ लोगों को अनुचित फायदा हो रहा, तो जांच क्यों नहीं? 'भतीजों' का जिक्र शायद मोदी के रिश्तेदारों या करीबियों पर है, जहां आरोप लगते हैं कि कुछ कंपनियां या लोग फायदे उठा रहे. लेकिन कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया. सरकार कहती है कि पॉलिसी पारदर्शी है, लेकिन विपक्ष कहता है कि जांच होनी चाहिए, वरना जीरो टॉलरेंस सिर्फ शब्दों में रह जाएगा.
पांचवां सवाल: साल 2014-2025 के बीच पेट्रोल-डीजल पर CESS के जरिए जो पैसा (करीब 40 लाख करोड़ रुपए) कमाया गया- उसका हिसाब जनता को कब मिलेगा?
ये बड़ा सवाल है. 2014 से अब तक पेट्रोल-डीजल पर सेंट्रल एक्साइज, CESS और टैक्स से सरकार ने लाखों करोड़ कमाए. अनुमान है कि 40 लाख करोड़ के करीब. लेकिन ये पैसा कहां गया? इंफ्रास्ट्रक्चर, वेलफेयर या कहीं और? एथेनॉल से 1.21 लाख करोड़ की बचत हुई, लेकिन कीमतें क्यों नहीं घटीं?
कांग्रेस हिसाब मांग रही है. जनता टैक्स दे रही, लेकिन राहत नहीं मिल रही. क्या ये पैसा सही जगह लगा, या किसी की जेब में?













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