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E20 Petrol in India: क्या इथेनॉल वाला पेट्रोल आपकी कार का दुश्मन है? माइलेज और इंजन को लेकर सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

देश में E20 यानी इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल की वजह से कई लोग गाड़ी के माइलेज में कमी और इंजन को लेकर चिंता जता रहे हैं. हालांकि, यह पेट्रोल पर्यावरण के लिए बेहतर है और नई गाड़ियों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन इससे माइलेज में 5-7% की मामूली गिरावट आना सामान्य है.

E20 Petrol in India: क्या इथेनॉल वाला पेट्रोल आपकी कार का दुश्मन है? माइलेज और इंजन को लेकर सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

आजकल अगर आप सोशल मीडिया पर हैं, तो शायद आपने भी ऐसी पोस्ट देखी होंगी जहाँ लोग अपनी गाड़ी के माइलेज (Mileage) को लेकर शिकायत कर रहे हैं. कई कार मालिकों का कहना है कि जब से उन्होंने अपनी गाड़ी में नया वाला पेट्रोल डलवाना शुरू किया है, गाड़ी तेल ज़्यादा पीने लगी है. इस पूरी बहस के केंद्र में है 'इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल' यानी E20 पेट्रोल.

तो चलिए समझते हैं कि यह पूरा मामला क्या है और क्या आपको भी चिंता करने की ज़रूरत है.

लोगों की शिकायतें क्या हैं?

इंटरनेट पर, खासकर X (पहले ट्विटर) पर, लोग दो मुख्य बातें कह रहे हैं:

  1. माइलेज में भारी गिरावट: कई लोगों का दावा है कि उनकी कार का माइलेज अचानक से कम हो गया है. एक यूज़र ने लिखा कि उनकी कार पहले 15 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती थी, जो अब घटकर 11.5 किलोमीटर प्रति लीटर रह गया है. एक और यूज़र ने तेल कंपनी को टैग करते हुए पूछा, "भाई, पेट्रोल में कितना इथेनॉल मिला रहे हो? पिछले एक साल से गाड़ी का माइलेज गिरा हुआ है."
  2. इंजन की उम्र को लेकर चिंता: माइलेज के अलावा, लोगों को यह भी डर है कि यह नया पेट्रोल कहीं उनकी गाड़ी के इंजन को धीरे-धीरे खराब तो नहीं कर रहा. उन्हें चिंता है कि इससे इंजन में घिसावट बढ़ सकती है और आगे चलकर कोई बड़ा और महँगा खर्चा आ सकता है. कुछ लोग तो यह भी आरोप लगा रहे हैं कि पेट्रोल में 20% की जगह 30% तक इथेनॉल मिलाया जा रहा है और उसे सामान्य पेट्रोल बताकर बेचा जा रहा है.

लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू भी है

अब सवाल उठता है कि अगर इससे इतनी दिक्कत है, तो सरकार और तेल कंपनियाँ पेट्रोल में इथेनॉल मिला क्यों रही हैं? इसके कुछ अच्छे कारण भी बताए जा रहे हैं:

    • पर्यावरण के लिए बेहतर: इथेनॉल, गन्ने जैसी फसलों से बनता है. इसे पेट्रोल में मिलाने से प्रदूषण कम होता है. यह पर्यावरण के लिए एक ज़्यादा साफ और हरा-भरा विकल्प है.

    • हानिकारक केमिकल से छुटकारा: पहले पेट्रोल में ऑक्टेन नंबर बढ़ाने के लिए लेड (lead) जैसी ज़हरीली चीज़ें मिलाई जाती थीं, जो इंसानी सेहत के लिए बहुत खतरनाक थीं. इथेनॉल मिलाने से इन हानिकारक केमिकल्स की ज़रूरत खत्म हो जाती है.

    • आधुनिक गाड़ियां हैं तैयार: कुछ जानकारों का कहना है कि आजकल की नई गाड़ियां (खासकर 2022-23 के बाद बनी) E20 पेट्रोल के हिसाब से ही डिजाइन की गई हैं. उनके इंजन और पार्ट्स पर इस पेट्रोल का कोई बुरा असर नहीं होता.

तो क्या सच में माइलेज कम होता है?

हां, यह बात सच है. विज्ञान के हिसाब से, इथेनॉल में शुद्ध पेट्रोल के मुकाबले थोड़ी कम एनर्जी होती है. इसलिए, जब आप E20 पेट्रोल इस्तेमाल करते हैं, तो आपकी गाड़ी का माइलेज 5-7% तक कम हो सकता है. यह एक सामान्य बात है और इसके लिए गाड़ियों को पहले से टेस्ट किया जाता है. रही बात इंजन खराब होने की, तो यह आपकी गाड़ी के मॉडल पर निर्भर करता है.

    • अगर आपकी गाड़ी नई है (BS6 फेज-2): तो आपको चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है. आपकी कार E20 पेट्रोल के लिए ही बनी है. आप अपनी कार के फ्यूल टैंक के ढक्कन पर 'E20 Compatible' का स्टिकर भी देख सकते हैं.

    • अगर आपकी गाड़ी पुरानी है (10-15 साल पुरानी): तो आपको थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए. पुरानी गाड़ियों के इंजन में लगे कुछ रबर और प्लास्टिक के पार्ट्स को इथेनॉल से नुकसान पहुँचने का खतरा रहता है. हालांकि, यह असर भी लंबे समय के इस्तेमाल के बाद ही दिखता है.

कुल मिलाकर, इथेनॉल वाला पेट्रोल पर्यावरण के लिए एक अच्छा कदम है, लेकिन इससे माइलेज पर थोड़ा असर पड़ना तय है. अगर आपकी गाड़ी नई है, तो बेफिक्र होकर इसका इस्तेमाल करें. अगर गाड़ी पुरानी है, तो आप अपने कार मैकेनिक से इस बारे में सलाह ले सकते हैं. सोशल मीडिया पर चल रही बातों से घबराने की बजाय अपनी गाड़ी के बारे में सही जानकारी रखना ज़्यादा ज़रूरी है.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 31, 2025 02:16 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).