चित्रकूट दंपत्ति को फांसी: बाल शोषण केस में ऐतिहासिक फैसला
यूपी के बांदा जिले की पॉक्सो कोर्ट ने एक जूनियर इंजीनियर और उनकी पत्नी को कई बच्चों के यौन शोषण और उनके पोर्न वीडियो बनाने के आरोप में फांसी की सजा सुनाई है.
यूपी के बांदा जिले की पॉक्सो कोर्ट ने एक जूनियर इंजीनियर और उनकी पत्नी को कई बच्चों के यौन शोषण और उनके पोर्न वीडियो बनाने के आरोप में फांसी की सजा सुनाई है. कोर्ट ने इसे दुर्लभतम अपराध माना है.उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की पॉक्सो कोर्ट ने बच्चों के यौन शोषण और पॉर्न वीडियो, अश्लील तस्वीरें बनाने के मामले में जूनियर इंजीनियर रामभवन और उनकी पत्नी दुर्गावती को फांसी की सजा सुनाई गई है. पांच साल पुराने इस मामले में रामभवन पर 6.45 लाख और दुर्गावती पर 5.40 लाख का जुर्माना भी लगाया गया है. यह मामला पांच साल पहले संज्ञान में आया था और फिर इंटरपोल की सूचना पर सीबीआई ने इसकी रिपोर्ट दर्ज की थी.
सीबीआई के अधिकारियों के मुताबिक, रामभवन ने ब्राजील, अमेरिका, चीन, अफगानिस्तान समेत दर्जनों देशों में बुंदेलखंड के इस इलाके के तमाम बच्चों के पॉर्न वीडियो इंटरनेट के जरिए बेचे. अधिकारियों के मुताबिक, डार्क वेब पर एक पोर्न वीडियो को अपलोड करने पर उसे लाखों रुपये मिलते थे. इसके जरिए इंजीनियर ने करोड़ों रुपयों की कमाई की और इस काम में उनकी पत्नी दुर्गावती ने भी बराबर साथ दिया. करीब 10 साल तक यह सिलसिला चलता रहा.
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कोर्ट के फैसले के बाद सरकारी वकील कमल सिंह ने मीडिया को बताया, "इंटरपोल की तरफ से सीबीआई को सूचना मिली थी कि बांदा के नरैनी निवासी जेई रामभवन नाबालिग बच्चों का यौन शोषण कर उनकी तस्वीरें और वीडियो पॉर्न साइट को बेच रहा है. सीबीआई को 34 बच्चों के यौन शोषण से जुड़े वीडियो और 679 तस्वीरों वाली पेन ड्राइव भी इंटरपोल की ओर से उपलब्ध कराई गई. सीबीआई ने 31 अक्टूबर 2020 को रामभवन और उनकी पत्नी के खिलाफ केस दर्ज किया. 16 नवंबर 2020 को रामभवन को चित्रकूट की एसडीएम कॉलोनी से गिरफ्तार किया गया और फिर एक महीने बाद उनकी पत्नी दुर्गावती को भी गिरफ्तार कर लिया गया.”
रामभवन बांदा जिले का रहने वाला है और जिस दौरान उसने ये अपराध किए, उस समय उसकी तैनाती चित्रकूट जिले में थी. मामले की जांच कर रही सीबीआई ने दोनों अभियुक्तों के खिलाफ 24 फरवरी 2021 को बांदा कोर्ट में चार्जशीट दायर की. 5 जून 2023 से बांदा के विशेष पॉक्सो कोर्ट में इस मामले की सुनवाई शुरू हुई.
'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' मामला
सरकारी वकील कमल सिंह बताते हैं, "कोर्ट में सुनवाई के क्रम में 74 गवाह पेश किए गए जिनमें 25 पीड़ित बच्चे, डॉक्टर, शिक्षक और अन्य गवाह शामिल रहे. विशेष पॉक्सो कोर्ट ने इसे दुर्लभतम अपराध मानते हुए रामभवन और उनकी पत्नी दुर्गावती को अंतिम सांस तक फांसी पर लटकाए जाने की सजा सुनाई है.”
फैसले के दौरान विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्र ने अपनी टिप्पणी में कहा कि जिस तरह से इन दोनों ने मिलकर इतने बड़े पैमाने पर मासूमों का बचपन तबाह किया, उसे देखते हुए इनके सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है. समाज में कड़ा संदेश देने के लिए फांसी ही एकमात्र रास्ता है.
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विशेष पॉक्सो कोर्ट ने दोनों अभियुक्तों को सिर्फ सजा ही नहीं सुनाई, बल्कि प्रत्येक पीड़ित बच्चे को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने के भी आदेश दिए हैं. अदालत ने आदेश में कहा है कि अभियुक्तों के घर से बरामद नकदी सभी पीड़ितों में बांटी जाए.
बांदा की इसी पॉक्सो कोर्ट ने पिछले दिनों दो अन्य मामलों में भी मासूमों के साथ दुष्कर्म के अभियुक्तों मृत्युदंड की सजा सुनाई. न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्र ने पिछले छह महीने में तीसरी बार फांसी की सजा सुनाई है.
कोर्ट ने बच्चों के यौन शोषण के मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि रामभवन की हैवानियत ने बच्चों को अंदर तक हिला दिया. कोर्ट की टिप्पणी थी, "बच्चों के नाजुक अंग तक क्षतिग्रस्त हो गए. दिल्ली एम्स में बच्चों का इलाज चला. इलाज करने वाले डॉक्टरों की टीम ने कोर्ट में गवाही भी दी. बच्चों के साथ दरिंदगी देख डॉक्टर भी विचलित हो गए थे.”
इन्हीं सब के आधार पर कोर्ट ने इस मामले को दुर्लभतम (रेयरेस्ट ऑफ द रेयर) माना और फैसले में कहा कि दोनों पति-पत्नी को मरते दम तक फंदे पर लटकाए रखा जाए. कोर्ट ने 18 फरवरी को दोनों को दोषी ठहराया था. रामभवन की पत्नी दुर्गावती को गवाहों पर दबाव डालकर समझौता कराने का दोषी पाया गया था.
छह महीने में तीसरी फांसी की सजा
पॉक्सो कोर्ट के जज प्रदीप कुमार मिश्र पिछले छह महीने में तीन मामलों में फांसी की सजा सुना चुके हैं. हालांकि दो अन्य मामलों में फैसलों को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है. कोर्ट ने इस मामले को दुर्लभतम बताते हुए फांसी की सजा सुनाई है जबकि फांसी की सजा को लेकर दुनिया भर में बहस चल रही है कि इसे खत्म किया जाए. कई देशों में फांसी की सजा के प्रावधान को खत्म भी किया जा चुका है.
इलाहाबाद हाईकोर्ट में वरिष्ठ वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता कमल कृष्ण रॉय कहते हैं कि ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' बड़ा जटिल मामला है, इसे परिभाषित करना इतना आसान नहीं है.
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डीडब्ल्यू से बातचीत में कमल कृष्ण रॉय कहते हैं, "सजा ऐसी होनी चाहिए जिससे अपराधी को अपने किए का पछतावा हो. मृत्यु दंड मिलने के बाद तो सब कुछ खत्म हो जाएगा. इसलिए ऐसे जघन्य कृत्य करने वाले अपराधियों को ऐसी सजा हो कि वो सारा जीवन जेल में रहें और जेल में उन्हें किसी तरह की कोई खास सुविधा भी न दी जाए. ऐसा न हो कि अस्पताल में भर्ती होकर सजा काट रहे हों. क्योंकि सारा जीवन जेल में बिताना मौत से भी बुरा है और अपराधी को अपने कृत्य का पश्चाताब करने का भी मौका मिलता है. इसीलिए दुनिया भर में मृत्यु दंड को खत्म करने संबंधी बहस चल रही है.”
कमल कृष्ण रॉय कहते हैं कि इस फैसले को यदि ऊपरी अदालत में चुनौती दी जाए तो इसे बदला भी जा सकता है.
बाल यौन शोषण गंभीर समस्या
बाल यौन शोषण न सिर्फ भारत में बल्कि पूरी दुनिया में एक गंभीर सामाजिक समस्या है जो केवाल शारीरिक छेड़छाड़ तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसमें अश्लील बातें करना, गलत तरीके से छूना, अश्लील तस्वीरें दिखाना या बनवाना, ऑनलाइन गलत संदेश भेजना या बच्चे को डराकर-धमकाकर शोषण करना भी शामिल है. जेई रामभवन ने भी अपनी पत्नी की मदद से बच्चों को इसी तरह से अपने चंगुल में फंसाया.
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वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता वंदिता मिश्रा कहती हैं, "यूं तो कोई भी बच्चा लालच में आ सकता है लेकिन वे बच्चे आसानी से ऐसे लोगों के चंगुल में फंसते हैं जिनके माता-पिता थोड़े लापरवाह होते हैं. झुग्गी बस्ती, बेघर लोगों के बच्चे आसानी से इस जाल में फंस जाते हैं.”
विशेषज्ञों का कहना है कि आज के समय में ऑनलाइन माध्यम की वजह से भी बच्चों में इस तरह के खतरे बढ़ गए हैं, क्योंकि कुछ लोग सोशल मीडिया या गेमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए बच्चों से दोस्ती कर उन्हें बहलाने-फुसलाने की कोशिश करते हैं.
बच्चों को बचाने के लिए और क्या करना होगा?
हालांकि भारत में बच्चों की सुरक्षा के लिए यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012 लागू है, जो बच्चों के विरुद्ध यौन अपराधों पर कड़ी सजा का प्रावधान करता है, बावजूद इसके ऐसे अपराधों में कमी नहीं आ रही है.
महिलाओं का भी ऐसी वारदातों में शामिल होना और भी ज्यादा गंभीर और भयावह मामला है. वंदिता मिश्रा कहती हैं, "हमारे समाज में यह स्टीरियोटाइप है कि महिलाएं किसी की मां हैं, पत्नी हैं तो अपराध नहीं कर सकतीं, जबकि अपराध कोई भी कर सकता है इसका जेंडर से कोई संबंध नहीं है. दूसरे, पॉर्न अब एक बड़ा बाजार बन गया है. उस पर सख्ती से लगाम लगनी चाहिए. रामभवन की पत्नी ने भी यही सोचकर अपने पति का साथ दिया होगा कि उन्हें खूब पैसे मिल रहे हैं और कोई बदनामी भी नहीं हो रही है.”
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों की निगरानी के साथ-साथ उन्हें जागरूक करने की भी जरूरत है ताकि वो ये समझ सकें कि सामने वाली की उनके प्रति नीयत कैसी है. उनके भीतर इतना आत्मविश्वास होना चाहिए कि वे किसी भी गलत घटना के बारे में अपने माता-पिता, शिक्षक या किसी भरोसेमंद बड़े व्यक्ति को तुरंत बता सकें.
(The above story first appeared on LatestLY on Feb 23, 2026 03:50 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

