Vehicle Fitness Test Fees: पुरानी गाड़ियों के मालिकों के लिए बढ़ी मुसीबत! व्हीकल फिटनेस फीस में भारी बढ़ोत्तरी, ढाई से लेकर 25 हजार रूपए वसूलेगी सरकार
केंद्र सरकार (Central Government) ने देशभर में वाहन फिटनेस टेस्ट (Vehicle Fitness Test) की फीस में बड़ा बदलाव किया है.
Vehicle Fitness Test Fees: केंद्र सरकार (Central Government) ने देशभर में वाहन फिटनेस टेस्ट (Vehicle Fitness Test) की फीस में बड़ा बदलाव किया है. नई फीस (New Fees) पहले से कई गुना ज्यादा हो गई है और यह बदलाव तुरंत लागू हो चुका है. सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य पुरानी और असुरक्षित गाड़ियां सड़क से हटाना है.पहले ज्यादा फीस केवल 15 साल से अधिक पुराने वाहनों पर लागू होती थी, लेकिन अब यह सीमा घटाकर 10 साल कर दी गई है. यानी 10 साल पूरे करते ही वाहनों पर बढ़ी हुई फिटनेस फीस लागू होगी.
वाहनों को तीन नई श्रेणियों (New Categories) में बांटा गया. 10 से 15 वर्ष,15 से 20 वर्ष,20 वर्ष से अधिक.हर श्रेणी में वाहन जितना पुराना होगा, उसका शुल्क उतना ज्यादा होगा. ये भी पढ़े:दिल्ली में पुराने कमर्शियल वाहनों पर रोक! 1 नवंबर से सिर्फ BS6 गाड़ियों को ही मिलेगी एंट्री, जानें CNG, LNG और EV को लेकर क्या है नियम?
सभी प्रकार के वाहनों पर लागू होंगे नए शुल्क
इस संशोधन के बाद टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर, क्वाड्रिसाइकिल, हल्के मोटर वाहन, और मध्यम तथा भारी कमर्शियल वाहनों (Commercial Vehicles) सभी पर नई दरें लागू होंगी. यह पहले की तरह एक समान शुल्क प्रणाली नहीं होगी, बल्कि वाहन की उम्र के आधार पर निर्धारित होगी.
15 साल से कम पुराने वाहनों पर भी बढ़ा शुल्क
अपडेटेड रूल 81 के तहत, अब 10 साल से कम उम्र के वाहनों को भी फिटनेस टेस्ट के लिए बढ़ा हुआ शुल्क देना होगा:
मोटरसाइकिल: 400 रूपए
लाइट मोटर वाहन: 600 रूपए
मध्यम और भारी कमर्शियल वाहन: 1,000 रूपए
यह नई दरें वाहन के 10 साल पूरा करते ही लागू हो जाएगी.
20 साल से अधिक पुराने वाहनों की फिटनेस फीस में बेहद बड़ी बढ़ोतरी
पुराने ट्रक/बस: 25,000 रूपए (पहले 2,500)
मध्यम कमर्शियल वाहन: 20,000 (पहले 1,800)
20 साल से अधिक पुराने एलएमवी : 15,000 रूपए
पुराने तीन-व्हीलर: 7,000 रूपए
पुराने दोपहिया: 2,000 (पहले 600 रूपए )
यह बढ़ोतरी पिछली फ्लैट रेट प्रणाली की तुलना में कई गुना अधिक है.
गाड़ियों की उम्र पर आधारित शुल्क से बदली व्यवस्था
नई व्यवस्था में हर वाहन की उम्र और श्रेणी दोनों को आधार माना जाएगा. पहले 15 साल पूरा करते ही सभी वाहनों पर एक जैसा शुल्क लगता था, लेकिन अब हर आयु-समूह के लिए अलग और क्रमशः बढ़ता हुआ शुल्क तय कर दिया गया है.
पुराने कमर्शियल वाहनों पर सबसे ज्यादा बोझ
सरकार के मुताबिक, यह कदम सड़क सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण (Pollution Control) और पुराने वाहनों के नियमन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है. खासकर भारी वाणिज्यिक वाहनों के मालिकों पर इसका आर्थिक प्रभाव काफी ज्यादा पड़ेगा, क्योंकि कई मामलों में फीस 10 गुना तक बढ़ गई है.
(The above story first appeared on LatestLY on Nov 19, 2025 07:03 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

