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8th Pay Commission: ₹69,000 न्यूनतम वेतन और 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग; AIDEF ने 8वें वेतन आयोग को सौंपा 5-यूनिट फैमिली फॉर्मूला

8वें केंद्रीय वेतन आयोग के समक्ष रक्षा क्षेत्र के असैन्य कर्मचारियों के प्रमुख संगठन 'ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन' ने एक विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया है. फेडरेशन ने 7वें वेतन आयोग के 3-यूनिट फैमिली मॉडल की जगह माता-पिता को शामिल करते हुए 5-यूनिट फैमिली फॉर्मूले का प्रस्ताव रखा है और इसी आधार पर 3.83 का फिटमेंट फैक्टर तथा कर्मचारियों के लिए न्यूनतम बेसिक पे ₹69,000 प्रति माह तय करने की मांग की है.

8th Pay Commission: ₹69,000 न्यूनतम वेतन और 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग; AIDEF ने 8वें वेतन आयोग को सौंपा 5-यूनिट फैमिली फॉर्मूला
8th Pay Commission Latest News (Photo Credits: File Photo)

नई दिल्ली: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन ढांचे के पुनरीक्षण को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है. रिपोर्ट के अनुसार, ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) ने 8वें वेतन आयोग को औपचारिक पत्र भेजकर कर्मचारियों के न्यूनतम वेतन, फिटमेंट फैक्टर और सेवानिवृत्ति लाभों में आमूलचूल बदलाव की सिफारिश की है.

फेडरेशन का तर्क है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों और महंगाई को देखते हुए 7वें वेतन आयोग का सैलरी निर्धारण फॉर्मूला अप्रासंगिक हो चुका है. यदि आयोग इन मांगों पर विचार करता है, तो इससे देश भर के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की आय और सामाजिक सुरक्षा पर सीधा असर पड़ेगा. यह भी पढ़ें: 8th Pay Commission Update: 8वें वेतन आयोग को लेकर मुंबई में 22-23 अक्टूबर को बैठक, अपडेट और सिफारिशों पर होगी चर्चा

क्या है 5-यूनिट फैमिली फॉर्मूला?

रिपोर्ट के अनुसार, एआईडीईएफ ने रेखांकित किया है कि 7वें वेतन आयोग ने न्यूनतम उपभोग जरूरतों की गणना केवल 3 सदस्यीय परिवार इकाई के आधार पर की थी, जिसमें आश्रित माता-पिता को पूरी तरह बाहर रखा गया था.

फेडरेशन ने इसे संशोधित कर 5 यूनिट करने का प्रस्ताव दिया है:

परिवार का सदस्य मौजूदा वेटेज (7th CPC) प्रस्तावित वेटेज (8th CPC) बदलाव
कर्मचारी स्वयं 1.0 1.0
जीवनसाथी 0.8 1.0 +0.2
दो बच्चे 1.2 1.6 +0.4
आश्रित पिता 0.8 +0.8
आश्रित माता 0.8 +0.8
कुल यूनिट 3.0 5.2 (पूर्णांक 5) +2.2

फेडरेशन ने इसके पक्ष में 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007' का भी हवाला दिया है, जिसके तहत बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल कर्मचारी का कानूनी और नैतिक दायित्व है. ऐसे में उनके भोजन, वस्त्र, आवास, दवाइयों और स्वास्थ्य देखभाल के खर्च को न्यूनतम वेतन गणना में शामिल करना अनिवार्य होना चाहिए.

3.83 फिटमेंट फैक्टर और ₹69,000 न्यूनतम वेतन का गणित

परिवार के 5 उपभोग इकाइयों पर आधारित बढ़े हुए खर्चों की गणना करते हुए AIDEF ने 3.83 का फिटमेंट फैक्टर लागू करने का प्रस्ताव रखा है:

  • न्यूनतम बेसिक पे: वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 प्रति माह है.

  • यदि 3.83 के गुणक (Fitment Factor) से इसकी गणना की जाए, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी लगभग ₹68,940 बैठती है, जिसे राउंड फिगर में ₹69,000 करने की मांग रखी गई है.

  • संगठन का कहना है कि 2026 के जीवन-यापन खर्च, बच्चों की उच्च शिक्षा, आवास किराया और डिजिटल सेवाओं की लागत को संतुलित करने के लिए यह वृद्धि न्यायसंगत है.

पेंशन सुधार और OPS की बहाली पर जोर

वेतन के अलावा फेडरेशन ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के कल्याण के लिए तीन महत्वपूर्ण बिंदु उठाए हैं:

  1. पुरानी पेंशन योजना (OPS) की वापसी: फेडरेशन ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को अपर्याप्त बताते हुए पुरानी गारंटीकृत पेंशन योजना बहाल करने का आग्रह किया है. संगठन का तर्क है कि बाजार जोखिमों पर निर्भर पेंशन योजनाएं बुढ़ापे की वित्तीय सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकतीं.

  2. कम्यूटेशन अवधि 15 से घटकर 11 वर्ष हो: वर्तमान नियमों के अनुसार, सेवानिवृत्ति के समय कम्यूट कराई गई (एकमुश्त ली गई) पेंशन की राशि को 15 वर्षों तक काटा जाता है. फेडरेशन ने बढ़ती महंगाई और संशोधित जीवन प्रत्याशा तालिकाओं का हवाला देते हुए इस अवधि को 11 वर्ष करने की मांग की है, क्योंकि बैंक ब्याज और मूलधन की वसूली 11 से 12 वर्षों में पूरी हो जाती है.

  3. 2026 से पूर्व के पेंशनर्स की हिस्सेदारी: एआईडीईएफ ने 8वें वेतन आयोग से अपने विचारार्थ विषयों (Terms of Reference - ToR) में संशोधन करने की मांग की है, ताकि 1 जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों की पेंशन संशोधन, फैमिली पेंशन और नए-पुराने पेंशनर्स के बीच समानता की समीक्षा भी की जा सके.

आगे क्या होगा?

कर्मचारी संगठनों द्वारा रखी गई ये सिफारिशें फिलहाल 8वें वेतन आयोग के विचारार्थ प्रस्ताव के स्तर पर हैं. आयोग सभी हितधारकों, मंत्रालयों और वित्तीय विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श करने के बाद ही अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा, जिसके बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल इस पर अंतिम निर्णय लेगा.

(The above story first appeared on LatestLY on Sep 24, 2026 04:51 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).