नयी दिल्ली, 15 जुलाई मुहर्रम (इस्लामी महीने) के महीने की आठवीं तारीख को उत्तर भारत में शिया समुदाय ने जगह-जगह मुहर्रम जुलूस निकाला। श्रीनगर में लगातार दूसरे साल यह जुलूस निकाला गया, जबकि बिहार के नवादा में इस मौके पर फलस्तीनी ध्वज लहराने पर तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया।
पैगंबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन और उनके परिवार के सदस्यों तथा साथियों की इराक के कर्बला में मुहर्रम महीने की एक से 10 तारीख के बीच घेराबंदी की गई थी और कई लोगों का कत्ल कर दिया गया था। इमाम हुसैन का कत्ल मुहर्रम महीने की दसवीं तारीख को किया गया था, जिसे आशूरा कहा जाता है।
कश्मीर के शिया समुदाय के लोगों ने सोमवार को श्रीनगर के गुरुबाजार-डलगेट मार्ग पर शांतिपूर्ण तरीके से मुहर्रम जुलूस निकाला। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि जुलूस में कुछ लोगों ने फलस्तीनी ध्वज ले रखे थे और उन्होंने फलस्तीन में लोगों के विरूद्ध हो रही हिंसा को खत्म करने की मांग की।
कश्मीर में आतंकवाद के उभरने के बाद मुहर्रम के जुलूस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, क्योंकि अधिकारियों को आशंका थी कि अलगाववादी इस विशाल जनसमूह का दुरुपयोग गलत उद्देश्यों के लिए कर सकते हैं।
श्रीनगर में जुलूस सोमवार तड़के गुरुबाजार इलाके से शुरू हुआ और जहांगीर चौक एवं मौलाना आजाद रोड होते हुए डलगेट पर समाप्त हुआ।
हजारों की संख्या में लोग सुबह साढ़े पांच बजे गुरुबाजार में एकत्र हुए। अधिकारियों ने जुलूस के लिए सीमित समय दिया था, ताकि सामान्य जनजीवन प्रभावित न हो।
बिहार के नवादा में मुहर्रम से पहले रविवार को एक जुलूस के दौरान कथित तौर पर फलस्तीनी ध्वज लहराने पर पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया ।
पकरीबरांवा के अनुमंडल पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) महेश चौधरी ने ‘पीटीआई-’ से कहा कि पुलिस ने जिले के धमौल इलाके में हुई इस घटना की जांच शुरू की है।
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