छह साल बाद यूरोप की इरास्मुस स्टूडेंट स्कीम में लौटेगा ब्रिटेन
ब्रेक्जिट के छह साल बाद ब्रिटेन यूरोप की जानी-मानी स्टूडेंट एक्सचेंज योजना इरास्मुस में वापसी कर रहा है.
ब्रेक्जिट के छह साल बाद ब्रिटेन यूरोप की जानी-मानी स्टूडेंट एक्सचेंज योजना इरास्मुस में वापसी कर रहा है. हजारों युवाओं को इससे फायदा मिलने की उम्मीद है.ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने एक समझौते को अंतिम रूप दे दिया है. इसके मुताबिक ब्रिटेन एक बार फिर से इरास्मुस+ स्टूडेंट एक्सचेंज स्कीम का हिस्सा बन सकेगा. ब्रिटिश सरकार ने एक बयान जारी कर बताया है कि इस योजना से लगभग एक लाख युवाओं को लाभ होने की उम्मीद है. यह समझौता उन लोगों के लिए खास महत्व रखता है जो 1 जनवरी, 2026 से इस स्कीम में दाखिले के पात्र होंगे.
हालांकि, यह समझौता फिलहाल केवल एक साल के लिए है. इसके मुताबिक ब्रिटेन 2027 में इस योजना की लागत के लिए 57 करोड़ पाउंड (लगभग 6,500 करोड़ रुपये) का योगदान करेगा.
क्या है इरास्मुस?
इरास्मुस को यूरोपीय संघ का सबसे अहम स्टूडेंट एक्सचेंज स्कीम माना जाता है. यह योजना युवाओं को यूरोप के अधिकांश देशों में एक वर्ष तक पढ़ाई और प्रशिक्षण का अवसर देती है. इस स्कीम की शुरुआत वर्ष 1987 में यूनिवर्सिटी एक्सचेंज से हुई थी. हालांकि, इसमें अब स्कूल एक्सचेंज, काम करने का अनुभव, प्रशिक्षण और खेल गतिविधियां भी शामिल हैं. कार्यक्रम में शामिल छात्रों को इसके लिए मेजबान स्कूल या यूनिवर्सिटी को कोई फीस नहीं देनी होती. वह अपने मूल संस्थान को ही फीस का भुगतान जारी रखते हैं.
जर्मनी में पढ़ रहे भारतीय छात्रों की पढाई असल में कितनी मुफ्त
इस योजना में सभी 27 ईयू सदस्य देश शामिल हैं. इसके अलावा नॉर्वे, आइसलैंड, लिश्टेनश्टाइन, सर्बिया, तुर्की और नॉर्थ मैसेडोनिया भी इस योजना का हिस्सा हैं. ताजा उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में 14 लाख से भी ज्यादा युवाओं ने इस योजना के तहत पात्र देशों में काम किया, प्रशिक्षण लिया या स्वयंसेवा की.
ब्रिटेन ने क्यों छोड़ा इरास्मुस?
ब्रेक्जिट के बाद ब्रिटेन ने 2020 में यूरोपीय संघ को औपचारिक रूप से छोड़ दिया था. इसके बाद यूरोपीय संघ ने ब्रिटेन को इस प्रोग्राम में बने रहने के के लिए शुल्क अदा करने का विकल्प भी दिया था. तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की सरकार को यह स्कीम काफी महंगी लगी.
उस समय जॉनसन ने यह भी कहा कि इरास्मुस ब्रिटेन के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है. उनके अनुसार, जितने ब्रिटिश छात्र यूरोप के अन्य देशों में पढ़ने जाते हैं, उससे लगभग दोगुने यूरोपीय छात्र पढ़ाई के लिए ब्रिटेन आते हैं. अंत में ब्रिटेन ने जनवरी 2021 में इरास्मुस प्रोग्राम को औपचारिक रूप से अलविदा कह दिया.
क्यों एक बार फिर इरास्मुस का हिस्सा बनना चाहता है ब्रिटेन?
इस समय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ब्रिटिश सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं. उनकी सरकार यूरोपीय संघ के साथ अपने रिश्तों को फिर से "रीसेट" यानी कि मजबूत करने की नीति पर खास ध्यान दे रही है. इस प्रयास के तहत ब्रिटेन सरकार ने अपनी नीति में एक बहुत ही महत्वपूर्ण परिवर्तन किया. सरकार ने दिसंबर 2025 में ब्रिटेन के इरास्मुस प्रोग्राम से फिर से जुड़ने की घोषणा की.
बुधवार के अपने बयान में ब्रिटेन की स्किल्स मंत्री जैकी स्मिथ ने कहा, "भाषा सीखने से लेकर आत्मविश्वास और कार्य अनुभव हासिल करने तक, इरास्मुस+ युवाओं को अपने जीवन में बदलाव लाने का अवसर देता है."
इरास्मुस में शिक्षा, प्यार और बच्चे
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेय लाएन का कहना है कि यूरोप और ब्रिटेन के शैक्षणिक संबंध लंबे समय से दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद रहे हैं. उनका यह भी कहना है कि "इन शैक्षणिक रिश्तों को मजबूत करना दोनों पक्षों के छात्रों, शिक्षकों, शिक्षा व्यवस्था, अर्थव्यवस्था और समाज के लिए फायदेमंद है."
ब्रिटेन के अलावा, गैर-ईयू सदस्य स्विट्जरलैंड भी इरास्मुस स्कीम का हिस्सा बनने जा रहा है.
(The above story first appeared on LatestLY on Apr 17, 2026 06:20 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

