बेंगलुरु, चार अगस्त तीस वर्षीय वन्यजीव छायाकार श्रीकांत मन्नेरपुरी का कहना है कि वह संयोग से इस पेशे में आ गए। तटीय काकीनाडा में उनका विद्यालय ओलिव रिडले कछुओं के प्रजनन परियोजना स्थलों के पास था। एक दिन वह जिज्ञासावश ऐसे ही एक स्थान पर पहुंच गए और तब उन्हें पता चला कि वह संरक्षणवादी बनना चाहते हैं।
मन्नेरपुरी ने कहा, ‘‘मेरा अनुमान है कि मेरे परिवार, खासकर मेरी मां को नजर आ गया कि क्या होने जा रहा है। जब मैं छोटा बच्चा था, तो फैंसी कारों या मोटरसाइकिलों की तस्वीरें मुझे आकर्षित नहीं करती थीं। मुझे घास के मैदान में शान से बैठे शेर का पोस्टर अधिक अच्छा लगता था। बाद में, मैं डिस्कवरी चैनल के वन्यजीव वृत्तचित्रों को देखने में अपना खाली वक्त निकालने लगा।’’
संयोग से या संयोग से नहीं, पुरस्कार विजेता फोटोग्राफर को बिलकुल यह समझ में आ गया था कि वह कैमरे के साथ क्या करना चाहते हैं। वह न केवल आंध्र प्रदेश की प्राकृतिक धरोहर की सुंदरता, बल्कि इसके समक्ष मौजूद खतरों की ओर दुनिया का ध्यान आकृष्ट करना चाहते थे।
मन्नेरपुरी ने कहा, ‘‘जब मैं वन्यजीव फोटोग्राफी और संरक्षण का काम अपनाने का विचार कर रहा था, तब मुझे कई लोगों ने जिम कार्बेट, रणथंभौर और बांदीपुर जैसे वन्यजीव अभयारण्यों में जाने की सलाह दी। कोई भी आंध्र प्रदेश की बात नहीं करता था। इसलिए मैंने अब तक यहां अनन्वेषित रहे वनों एवं मैंग्रोव पर काम करने का फैसला किया।’’
राज्य की प्राकृतिक पारिस्थितिकी के प्रति विभिन्न खतरों पर अत्यंत गहनता से तैयार किए गए उनके प्रलेखन से शीघ्र ही उन्हें देश-विदेश में पुरस्कार मिलने लगे।
मन्नेरपुरी को 2022 में लंदन स्थित ‘नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम’ की 58वीं वन्यजीव फोटाग्राफी प्रतिस्पर्धा की ‘सागर श्रेणी’ में ‘अत्यंत प्रशंसनीय पुरस्कार’ मिला जिसे प्रकृति एवं वन्यजीव फोटोग्राफी में ऑस्कर माना जाता है।
उनके नवीनतम पुरस्कार में साल 2023 के फोटोग्राफर ‘नेचर इन फोकस’ पुरस्कार शामिल है जिसे भारत में वन्यजीव छायाकारों के लिए ‘होली ग्रेल्स’ समझा जाता है। वह 2021 से संरक्षण की श्रेणी में यह पुरस्कार जीतते आ रहे हैं। पिछले पांच साल में वह कुल 14 पुरस्कार जीत चुके हैं।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY