विदेश की खबरें | पोप और दक्षिणपूर्वी एशिया की सबसे बड़ी मस्जिद के इमाम ने शांति और पर्यावरण की रक्षा की अपील की
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

पोप फ्रांसिस की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान अंतरधार्मिक मैत्री को बढ़ावा देने और साझा उद्देश्यों को हासिल करने के संबंध में संयुक्त बयान जारी किया गया।

फ्रांसिस इंडोनेशिया में आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त छह धर्मों - इस्लाम, बौद्ध, कन्फ्यूशीवाद, हिंदू, कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट के प्रतिनिधियों के साथ एक अंतरधार्मिक सभा के लिए जकार्ता की प्रतिष्ठित इस्तिकलाल मस्जिद पहुंचे।

इस दौरान पोप फ्रांसिस और इमाम नसरुद्दीन उमर "मैत्री सुरंग" के भूतल प्रवेश द्वार पर खड़े हुए। यह एक अंडरपास है जो मस्जिद परिसर को पड़ोसी कैथोलिक कैथेड्रल ‘अवर लेडी ऑफ द असम्पशन’ से जोड़ता है।

फ्रांसिस ने अपने शुरुआती संबोधन में कहा, “हमें आज अपने सामने मौजूद चुनौतियों का भाईचारे के साथ सामना करना चाहिए। बंधुत्व हमें एक साझा मार्ग पर मित्रतापूर्वक चलने के लिए प्रेरित करता है और प्रकाश की ओर ले जाता है।”

फ्रांसिस ने एशिया और ओशिनिया के चार देशों की अपनी 11 दिवसीय यात्रा की शुरुआत में इंडोनेशिया की यात्री की। पोप फ्रांसिस की इस यात्रा का उद्देश्य इंडोनेशिया को धार्मिक कट्टरपंथ से लड़ने के लिए प्रोत्साहित करना तथा भाईचारे को मजबूत बनाने की कैथोलिक चर्च की प्रतिबद्धता को दोहराना था।

पोप फ्रांसिस इंडोनेशिया के अलावा पापुआ न्यू गिनी, सिंगापुर और तिमोर-लेस्ते की भी यात्रा करेंगे।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)