गुवाहाटी, 24 जून गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने विदेशी न्यायाधिकरण (एफटी) से संबंधित एक मामले में अभिलेखों को "अव्यवस्थित तरीके से" प्रस्तुत किये जाने पर असम सरकार से कहा कि वह इन अर्ध-न्यायिक निकायों के सदस्यों और अधीक्षकों को ऐसे दस्तावेज के समुचित रखरखाव के लिए प्रशिक्षण देने पर विचार करे।
असम के लिए विशेष रूप से गठित इन विदेशी न्यायाधिकरणों का कार्य यह निर्धारित करना है कि जिन व्यक्तियों पर विदेशी होने का संदेह है, वे भारतीय नागरिक हैं या नहीं।
न्यायमूर्ति कल्याण राय सुराना और न्यायमूर्ति मालश्री नंदी की पीठ ने गोविंद साहा द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। साहा को नागांव के एक न्यायाधिकरण ने "अवैध विदेशी" घोषित किया था, लेकिन बाद में उच्च न्यायालय ने इसे खारिज कर दिया था।
मामले में एफ.टी. के दस्तावेज़ और रिकॉर्ड की समीक्षा करते समय पीठ ने पाया कि कई जगहों पर सबूतों को गलत तरीके से नामांकित किया गया था या उनमें दोहराव था।
पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि न्यायाधिकरण द्वारा रिकॉर्ड का रखरखाव "इतने अव्यवस्थित ढंग से" किया गया है कि निजी सचिवों की सहायता से अदालत को प्रदर्शित दस्तावेज को तलाशने में दो घंटे से अधिक का समय लग गया।
इस स्थिति ने न्यायालय को विवश किया कि वह यह निर्णय गृह एवं राजनीतिक विभाग के प्राधिकारियों पर छोड़ दे कि क्या राज्य विदेशी न्यायाधिकरणों के सदस्यों और अधीक्षकों को मामले के रिकॉर्ड के रखरखाव के संबंध में औपचारिक प्रशिक्षण देने पर विचार करेगा।
आदेश में कहा गया है कि मामला संख्या एफटी 2451/2011 के रिकॉर्ड को जिस अव्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत किया गया है, उसे देखते हुए न्यायालय रजिस्ट्री को निर्देश देने की इच्छुक है कि इस आदेश की एक प्रति असम सरकार के गृह एवं राजनीतिक (बी) विभाग के आयुक्त एवं सचिव को भेजी जाए, ताकि राज्य में विदेशी न्यायाधिकरणों के माननीय सदस्यों और अधीक्षकों को रिकॉर्ड के समुचित रखरखाव पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने पर विचार किया जा सके।
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