देश की खबरें | किताब में किया गया भारतीय जासूसों के साहसिक कारनामों का खुलासा
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, चार अगस्त भारत की बाह्य खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के जासूसों के साहसिक कारनामों का एक नयी किताब में खुलासा किया गया है और बताया गया है कि खुफिया समाज की स्याह दीवारों के पीछे आखिर असल में होता क्या है।

किताब ‘रॉ: ए हिस्टरी ऑफ इंडियाज कोवर्ट ऑपरेशंस’ असल जासूसों के बारे में विस्तृत ब्योरा भी उपलब्ध कराती है और उनके जीवन के अब तक अज्ञात रहे उन पहलुओं, आघात, कटु अनुभवों, सफलता और असफलता की कहानी बताती है, जिनका सामना उन्हें किसी ‘‘मिशन इंपॉसिबल’’ (किसी असंभव मिशन) को अंजाम तक पहुंचाने के दौरान करना पड़ा।

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किताब खोजी पत्रकार एवं लेखक यतीश यादव ने लिखी है।

रॉ की स्थापना 1968 में हुई थी, ताकि देश के लिए खुफिया सूचनाओं की बढ़ती आवश्यकता को पूरा किया जा सके, जिनकी कमी 1962 के भारत-चीन युद्ध और 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान महसूस हुई थी।

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जाने-माने जासूस रामेश्वर नाथ काव ने रॉ की स्थापना की थी।

लेखक ने कहा कि किताब लिखने का उद्देश्य यह था कि लोग खुफिया एजेंसी और इसके जासूसों से संबंधित अनुत्तरित प्रश्नों के उत्तर प्राप्त कर सकें तथा इनके द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका, राष्ट्रीय सुरक्षा एवं दीर्घकालिक गोपनीय कूटनीति पर इसके प्रभाव से परिचित हो सकें।

उन्होंने कहा, ‘‘किताब लिखने के दौरान मैंने इनमें से कई वीर गुप्तचर योद्धाओं से बात की और मुझे उम्मीद है कि किताब इन लोगों के शौर्य और बलिदान की कहानियों के साथ न्याय करेगी।’’

किताब वेस्टलैंड ने प्रकाशित की है, जो अमेजन पर ऑनलाइन और समूचे भारत में किताबों की दुकानों पर ऑफलाइन उपलब्ध है।

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