जरुरी जानकारी | तमिलनाडु ने केंद्र से किसानों को मुफ्त बिजली को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के दायरे से बाहर रखने को कहा

चेन्नई, आठ जुलाई तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी ने बुधवार को किसानों को मुफ्त और घरेलू उपभाक्ताओं को 100 यूनिट तक बिना किसी शुल्क के बिजली देने की योजना जारी रखने का संकल्प दोहराया। उन्होंने केंद्र से इसे प्रस्तावित प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली से अलग रखने का आग्रह किया।

उन्होंने यहां सचिवालय में केंद्रीय बिजली मंत्री आर के सिंह से मुलाकात के दौरान अपनी बातें उनके समक्ष रखी।

यह भी पढ़े | Sarkari Naukri: महाराष्ट्र पुलिस में निकलेगी बंपर भर्ती, गृह मंत्री अनिल देशमुख ने किया ऐलान.

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की यह नीति रही है कि किसानों कों मुफ्त बिजली मिले और इसे जारी रहना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘इसीलिए डीबीटी का सिद्धांत कृषि क्षेत्र के लिये लागू नहीं होना चाहिए। पुन: तमिलनाडु सरकार सभी घरेलू उपभोक्ताओं को 100 यूनिट बिजली मुफ्त दे रही है जिसके लिये हम तानजेडको को सब्सिडी देते हैं। इस योजना को भी डीबीटी व्यवस्था से अलग रखा जा सकता है।’’

यह भी पढ़े | जानिए क्या है IPPB मोबाइल बैंकिंग ऐप और कैसे कर सकते हैं प्रयोग?.

केंद्र ने बिजली (संशोधन) विधेयक, 2020 का मसौदा जारी किया है और बिजली क्षेत्र में डीबीटी योजना लागू करने की योजना है। इसके तहत सब्सिडी राज्य सरकार को सीधे ग्राहकों के खाते में डालनी होगी जो वितरण कंपनी के पास होता है।

सिंह को दिये पत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सब्सिडी कृषि क्षेत्र और घरेलू उपभोक्ताओं को देती है और उसे सार्वजनिक क्षेत्र की तानजेडको को जारी किया जाता है। वह सब्सिडी वितरण का जिम्मा संभालने वाली कंपनी को मिलती है। उसका आकलन राज्य आयोग की मंजूरी के साथ समुचित तरीके से होता है।

साथ ही सब्सिडी तमिलनाडु में अग्रिम तौर पर दी जाती है।

मीडिया को उपलब्ध कराये गये पत्र में मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘इसीलिए सब्सिडी भुगतान के तरीके को राज्य सरकार पर छोड़ दिया जाना चाहिए।’’

उन्होंने यह भी दलील दी कि बिजली संशोधन विधेयक के मसौदे में वितरण के क्षेत्र में निजी फ्रेंचाइजी /उप लाइसेंस की अनुमति दी गयी है। इससे लाभ वाले क्षेत्र फ्रेंचाइजी कंपनियां/उप वितरण लाइसेंस वाली कंपनियां ले लेंगी।

मुख्यमंत्री के अनुसार इससे सार्वजनिक वितरण कंपनियों के हित प्रभावित होंगे और उनके पास केवल सामाजिक क्षेत्र और ग्रामीण क्षेत्रों की जिम्मेदारी रह जाएगी। इसके कारण उन्हें काफी नुकसान होगा।

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु ने मसौदा विधेयक, 2020 पर अपनी राय भेज दी है। उसने कुछ प्रावधानों को लेकर चिंता जतायी है जो राज्य और उसकी वितरण कंपनियों के लिये नुकसानदायक है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)