ताजा खबरें | निजी क्षेत्र की मदद लें, संग्रहालयों, एएसआई स्थलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाएं : संसदीय समिति

नयी दिल्ली, 27 जुलाई देश के संग्रहालयों के विकास, स्मारकों और पुरातत्व महत्व के स्थलों के संरक्षण के वास्ते अंतरराष्ट्रीय मानक बनाए रखने के लिए आवश्यक निवेश की खातिर एक संसदीय स्थायी समिति ने निजी क्षेत्र की मदद लेने की सिफारिश की है।

विभाग संबंधित परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी स्थायी संसदीय समिति ने ‘‘संग्रहालयों और पुरातात्विक स्थलों का विकास और संरक्षण - चुनौतियां और अवसर’’ के संबंध में संसद में सोमवार को पेश किए गए अपने 294वें प्रतिवेदन में यह भी कहा है कि निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए मंत्रालय को योजनाएं बनानी चाहिए।

प्रतिवेदन में कहा गया है ‘‘संग्रहालयों और पुरातत्व महत्व के स्थलों एवं स्मारकों के संरक्षण एवं विकास के लिए मंत्रालय के समक्ष व्याप्त अर्थ संकट को देखते हुए समिति महसूस करती है कि निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। ’’ प्रतिवेदन के अनुसार, संग्रहालयों और पुरातत्व महत्व के स्थलों तथा स्मारकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने के लिए, भावी पीढ़ियों के लिए इन सांस्कृतिक धरोहरों को सुरक्षित एवं संरक्षित रखने तथा इस उद्देश्य से रोजगार सृजन सुनिश्चित करने के लिए निजी निवेश की आवश्यकता है।

इसमें कहा गया है ‘‘मंत्रालय, पीपीपी मोड के जरिये हमारी सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण एवं विकास के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित करने के वास्ते योजनाएं बना सकता है, उन्हें प्रायोगिक आधार पर कार्यान्वित कर सकता है और उनके सफल होने पर उन्हें व्यापक स्तर पर लागू कर सकता है।’’

प्रतिवेदन में कहा गया है कि मंत्रालय ने कुछ ऐसे स्टार्ट-अप की पहचान करने का विचार रखा था जो मंत्रालय द्वारा चिह्नित धरोहर स्थलों के लिए निवेश जुटाने के वास्ते अपने अपने दृष्टिकोण पेश करेंगे और अनुकूल पाए जाने पर उनका कार्यान्वयन करेंगे।

इसमें कहा गया है कि भारतीय पुरातत्व सर्वे (एएसआई) घरेलू और अंतराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए टिकटों के मूल्य में, राजस्व जुटाने के उद्देश्य से प्रयोग कर सकता है और उसके लिए धरोहर स्थल में अधिकतम व्यवहार्य संख्या में पर्यटकों को जाने की अनुमति दी जा सकती है।

समिति ने सिफारिश की है कि एएसआई युवा अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को विशेष छूट देने पर विचार कर सकता है। साथ ही घरेलू और विदेशी पर्यटकों को साप्ताहिक पास देने पर भी विचार किया जा सकता है ताकि वे प्रोत्साहित हों और अधिक संख्या में ऐतिहासिक स्थलों को देखते के लिए जाएं।

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